The economic impact of the Iran-Israel war on IndiaThe economic impact of the Iran-Israel war on India

4 मार्च 2026, Iran-Israel युद्ध का भारत पर आर्थिक असर: 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए यूएस-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध ने अब वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG गुजरता है। यह संकट भारत के लिए सबसे गंभीर है, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और 85-90% तेल की जरूरत आयात से पूरी होती है। होर्मुज स्ट्रेट से भारत के करीब 40-50% कच्चे तेल आयात (लगभग 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन) आते हैं, मुख्य रूप से सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत और ईरान से। युद्ध के कारण टैंकर ट्रैफिक ठप है, सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं, और ब्रेंट क्रूड की कीमतें $80-82 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं—कुछ विश्लेषकों के अनुसार $100 या इससे ज्यादा भी जा सकती हैं। भारत के लिए यह आयात बिल बढ़ने, मुद्रास्फीति, रुपए पर दबाव और आर्थिक विकास पर असर डाल सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व और बंदी का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है—यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है। ईरान के IRGC ने “कोई जहाज नहीं गुजरेगा” की चेतावनी दी, जिसके बाद शिपिंग कंपनियां, ऑयल मेजर्स और ट्रेडर्स ने ट्रांजिट रोक दिया। Kpler और अन्य डेटा फर्म्स के अनुसार, ट्रैफिक 86% तक गिर गया है। भारत के लिए यह सीधा झटका है:

  • कुल कच्चा तेल आयात: ~5-5.6 मिलियन बैरल प्रति दिन।
  • होर्मुज से: ~2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (लगभग 50%)।
  • अगर बंदी लंबी चली तो भारत का आयात बिल सालाना $1.8-2 बिलियन प्रति $1/बैरल बढ़ोतरी से प्रभावित होगा।
  • LPG (80-85%) और LNG आयात भी प्रभावित, घरेलू और इंडस्ट्रीयल उपयोग पर असर। कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल, LPG सिलेंडर महंगे होंगे, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ेगी, जिससे मुद्रास्फीति 1-2% तक बढ़ सकती है। रुपया कमजोर होगा, CAD (करंट अकाउंट डेफिसिट) बढ़ेगा, और शेयर बाजार गिरावट देख सकता है।

भारत के तेल स्टॉक और बफर सरकार और इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में:

  • कच्चे तेल का स्टॉक: ~25 दिन (कमर्शियल + ट्रांजिट में)।
  • पेट्रोल-डीजल का स्टॉक: ~25 दिन।
  • कुल मिलाकर 50 दिन की सुविधा (कुछ स्रोतों में 6-8 हफ्ते तक)। Kpler डेटा के अनुसार, कमर्शियल स्टॉक ~100 मिलियन बैरल (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स सहित—मंगलौर, पदुर, विशाखापत्तनम में)। होर्मुज से आने वाले 2.5 मिलियन बैरल/दिन के हिसाब से यह 40-45 दिन का कवर दे सकता है। स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स (SPR) अतिरिक्त बफर हैं, लेकिन ये लंबे संकट के लिए हैं। अगर बंदी 1-2 महीने चली तो राशनिंग, LPG सप्लाई कटौती या निर्यात रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

सरकार की तैयारी और रूस से आयात बढ़ाने की योजना तेल मंत्रालय और पीएनजी मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि स्टॉक पर्याप्त हैं, लेकिन इंटर-मिनिस्टीरियल पैनल गठित है। मुख्य कदम:

  • रूस से आयात बढ़ाना: रूस पहले से भारत का सबसे बड़ा सप्लायर था (2025 में 30-40% तक), लेकिन हाल में US दबाव से घटा था (जनवरी 2026 में 19% तक)। अब रूस ने “रिन्यूड इंटरेस्ट” के सिग्नल पर ज्यादा सप्लाई देने की पेशकश की है। रूसी क्रूड पहले से एशियाई पानी में फ्लोटिंग स्टोरेज में है—9.5 मिलियन बैरल भारत पहुंच सकता है। रूस से आयात पूर्वी रूट से होता है, होर्मुज से बचता है।
  • अन्य स्रोत: US, वेस्ट अफ्रीका, लैटिन अमेरिका से डाइवर्सिफिकेशन।
  • डिमांड-साइड मेजर्स: इंडस्ट्री को गैस राशनिंग, पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट रोकना। रूस से बढ़ोतरी US के साथ ट्रेड डील (ट्रंप की टैरिफ राहत) को प्रभावित कर सकती है, लेकिन संकट में जरूरी माना जा रहा है।

आर्थिक प्रभाव और लंबी अवधि की चुनौतियां

  • आयात बिल: FY25 में $137 बिलियन, अब $100+ प्रति बैरल से और बढ़ सकता है।
  • मुद्रास्फीति और विकास: ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, फूड, मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित। RBI की ब्याज दर कटौती मुश्किल।
  • रुपया और बाजार: डॉलर डिमांड बढ़ेगी, रुपया कमजोर। FII आउटफ्लो संभव।
  • एनर्जी सिक्योरिटी: भारत SPR बढ़ा रहा है, लेकिन अभी भी कमजोर। लंबे संकट में रिफाइनरी रन-कट, इंडस्ट्री शटडाउन संभव। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध हफ्तों तक चला तो भारत सबसे ज्यादा प्रभावित एशियाई देशों में होगा (चीन के पास 6 महीने का स्टॉक है)।

यह संकट भारत की एनर्जी डिपेंडेंसी को उजागर करता है। सरकार डाइवर्सिफिकेशन, रूस से आयात और राशनिंग से शॉर्ट-टर्म मैनेज कर रही है, लेकिन लंबे समय में होर्मुज जैसे चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। स्थिति तेज बदल रही है—तेल कीमतें, शिपिंग और डिप्लोमेसी पर नजर रखें। अगर युद्ध बढ़ा तो भारत में ईंधन महंगा होने के साथ आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

Sources: इकनोमिक टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *