Patna University Students Union Election (PUSU) 2026Patna University Students Union Election (PUSU) 2026

28 फरवरी 2026, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (PUSU) 2026: पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव (Patna University Students’ Union – PUSU) के लिए मतदान हुआ, लेकिन यह प्रक्रिया कई विवादों, हिंसा और रिकॉर्ड कम मतदान से घिरी रही। कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 20,036 थी, जिनमें से केवल 7,577 छात्रों ने वोट डाला, यानी कुल मतदान प्रतिशत सिर्फ 37.84% रहा। यह पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों के इतिहास में सबसे कम मतदान में से एक माना जा रहा है। चुनाव के दौरान पटना साइंस कॉलेज में फायरिंग की घटना ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया, जबकि अन्य कॉलेजों में हंगामा, फर्जी वोटिंग की कोशिश और पुलिस के साथ झड़प की खबरें आईं।

मतदान प्रतिशत और कॉलेज-वार विश्लेषण

मतदान की रफ्तार पूरे दिन धीमी रही। सुबह 11 बजे तक कई कॉलेजों में मतदान 1-2% से भी कम था। अंतिम आंकड़ों के अनुसार, पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज (Women’s Training College) में सबसे अधिक मतदान हुआ, जहां लड़कियों की लंबी कतारें लगीं और कुल 2,470 वोट डाले गए। यह कॉलेज महिलाओं के मजबूत प्रतिनिधित्व वाला रहा और यहां चुनावी उत्साह सबसे ज्यादा दिखा।

दूसरी ओर, पटना साइंस कॉलेज, पटना कॉलेज और बीएन कॉलेज में मतदान कमजोर रहा। पटना कॉलेज में सुबह के समय सिर्फ 60 छात्रों ने वोट डाला था, जबकि बीएन कॉलेज में आईडी कार्ड न मिलने पर छात्रों ने विरोध किया और वैकल्पिक परिचय पत्र से मतदान करवाया गया। फैकल्टी ऑफ कॉमर्स, एजुकेशन एंड लॉ जैसे विभागों में भी मतदान औसत से नीचे रहा। कुल मिलाकर, लड़कियों वाले कॉलेजों (जैसे मगध महिला कॉलेज और पटना वीमेंस कॉलेज) में बेहतर भागीदारी दिखी, जबकि पुरुष-प्रधान कॉलेजों में उदासीनता ज्यादा थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम मतदान के कई कारण हैं – छात्रों में राजनीतिक उदासीनता, हाल के वर्षों में छात्र संघ की भूमिका पर सवाल, कैंपस में बढ़ती हिंसा का डर और परीक्षाओं की तैयारी। पिछले कुछ चुनावों में भी मतदान 45% के आसपास रहा था, लेकिन इस बार यह और नीचे गिरा।

हिंसा और फायरिंग की घटना

चुनावी प्रक्रिया के दौरान सबसे गंभीर घटना पटना साइंस कॉलेज में हुई, जहां दो राउंड (कुछ रिपोर्ट्स में 2-3 राउंड) गोलीबारी की सूचना मिली। गोली चलने से कैंपस में अफरा-तफरी मच गई। एसडीपीओ राजेश रंजन मौके पर पहुंचे और जांच में एक खोखा (खाली कारतूस) बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि यह हवा में फायरिंग थी, लेकिन कोई घायल होने की सूचना नहीं आई। घटना के बाद सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई गई।

इससे पहले पटना कॉलेज में हंगामा हुआ, जहां कुछ छात्रों ने फर्जी वोटिंग (जैसे लड़की को लड़का बनाकर वोट डालने की कोशिश) की कोशिश की, जिसे प्रशासन ने रोका। बीएन कॉलेज में भी मारपीट और विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं। कुछ जगहों पर पुलिस के साथ झड़प हुई। चुनाव आयोग और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन घटनाओं को आचार संहिता उल्लंघन बताया।

पिछले दिनों भी कैंपस में तनाव था। चुनाव से पहले पटना वीमेंस कॉलेज में बिना अनुमति प्रवेश, नारेबाजी और पोस्टरबाजी हुई थी। पटना साइंस कॉलेज में शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें आईं। इन कारणों से चुनाव पहले ही एक बार स्थगित होने की चर्चा हुई थी, लेकिन अंततः 28 फरवरी को ही करवाया गया।

उम्मीदवार और राजनीतिक दलों की टक्कर

इस बार सेंट्रल पैनल (प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट आदि) पर 41 उम्मीदवार मैदान में थे। अध्यक्ष पद पर JDU, NSUI और ABVP के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर रही। रिंकल यादव जैसे उम्मीदवारों ने विभिन्न कॉलेजों में प्रचार किया। महिलाओं के सुरक्षा, कैंपस सुधार और सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

काउंसलर पदों के लिए विभिन्न फैकल्टी में प्रत्याशी थे – पटना वीमेंस कॉलेज से 7, सोशल साइंस से 6, ह्यूमैनिटीज से 4 आदि। कुछ सीटें (जैसे कुछ ट्रेनिंग कॉलेज) निर्विरोध भी रही।

मतगणना और परिणाम

मतदान दोपहर 2:30 बजे तक चला। शाम 5 बजे से आर्ट्स एंड क्राफ्ट कॉलेज में मतगणना शुरू हुई। देर रात तक परिणाम आने की उम्मीद थी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, लेकिन हिंसा की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ाई।

प्रभाव

PUSU 2026 चुनाव छात्र राजनीति की वर्तमान स्थिति का आईना साबित हुआ – जहां उत्साह के बजाय हिंसा, उदासीनता और विवाद प्रमुख रहे। रिकॉर्ड कम मतदान से सवाल उठ रहे हैं कि छात्र संघ कितना प्रासंगिक बचा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब कैंपस में शांति और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। यदि परिणाम विवादास्पद हुए, तो आगे कानूनी चुनौतियां भी आ सकती हैं।

यह घटना बिहार की छात्र राजनीति में एक चेतावनी है – जहां राजनीतिक दलों की पहुंच बढ़ रही है, वहीं छात्रों की भागीदारी घट रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति सुधरेगी और छात्र संघ शिक्षा-केंद्रित बनेगा।

Sources: हिंदुस्तान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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