27 फरवरी 2026, Katihar पंचायत में तेंदुआ का आतंक: बिहार के कटिहार जिले में एक बार फिर वन्यजीवों और मानव के बीच टकराव की खबर सामने आई है। जिले के एक ग्रामीण पंचायत में तेंदुए के घूमने और महिला पर हमले की घटना ने स्थानीय निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। KBC News Katihar द्वारा रिपोर्ट की गई इस घटना में नोहरी गांव (एक पंचायत क्षेत्र) तेंदुए के आतंक से दहशत में है। तेंदुए ने खेत में काम कर रही एक महिला पर हमला किया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर फैल गया है।
घटना का विवरण
घटना कटिहार जिले के एक ग्रामीण पंचायत के नोहरी गांव में हुई। स्थानीय सूत्रों और KBC News के अनुसार, तेंदुआ पिछले कुछ दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था। बुधवार या गुरुवार को खेत में काम करने गई एक महिला (नाम अभी गोपनीय रखा गया है) पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। महिला खेत में फसल या चारा काट रही थीं, जब तेंदुआ पीछे से आया और उस पर झपटा। हमले में महिला घायल हुईं, लेकिन ग्रामीणों के शोर मचाने और मदद पहुंचने से तेंदुआ भाग गया।
महिला को तुरंत स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हमले में महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे निशान आए हैं। डॉक्टरों ने कहा कि अगर समय पर इलाज न मिलता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। घटना के बाद गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं, खासकर महिलाएं और बच्चे। कई ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ रात में भी गांव के आसपास दिखाई देता है, जिससे नींद हराम हो गई है।
ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश
नोहरी गांव के निवासियों ने बताया कि तेंदुआ का आतंक पिछले एक सप्ताह से जारी है। पहले वह मवेशियों पर हमला करता था, लेकिन अब मानव पर हमला करने लगा है। एक ग्रामीण ने कहा, “हम खेतों में काम करने से डर रहे हैं। तेंदुआ दिन में भी घूम रहा है। वन विभाग को पहले से सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” महिलाओं ने विशेष रूप से शिकायत की कि वे अकेले खेत जाने से डर रही हैं।
घटना के बाद गांव में आक्रोश है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया और तेंदुए को पकड़ने या स्थानांतरित करने की मांग की। कुछ ने प्रदर्शन की धमकी भी दी। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन हो सकता है।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
कटिहार वन विभाग ने घटना की पुष्टि की है। डिप्टी रेंजर और टीम घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने पगमार्क (तेंदुए के पैरों के निशान) देखे और ट्रैपिंग कैमरे लगाने का फैसला किया। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “हम तेंदुए को ट्रैक कर रहे हैं। अगर जरूरी हुआ तो ट्रैंक्विलाइजर गन से पकड़कर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करेंगे।” विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले न जाएं, शोर मचाकर तेंदुए को भगाएं और तुरंत सूचना दें।
बिहार में बढ़ते वन्यजीव-मानव संघर्ष
यह घटना बिहार में वन्यजीव-मानव संघर्ष की बढ़ती संख्या का उदाहरण है। कटिहार, पूर्णिया, अररिया जैसे सीमांचल जिलों में नेपाल बॉर्डर के पास जंगलों से तेंदुए और अन्य जानवर गांवों में आते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, क्योंकि जंगलों का क्षेत्र कम हो रहा है और मानव बस्तियां बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आवास हानि, शिकार और जलवायु परिवर्तन से तेंदुए इंसानी इलाकों में आ रहे हैं।
बिहार वन विभाग ने राज्य स्तर पर वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए ट्रैपिंग, जागरूकता और कम्पेंसेशन स्कीम चलाई है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर क्रियान्वयन कमजोर बताया जा रहा है। इस घटना के बाद विभाग ने कटिहार में विशेष टीम तैनात की है।
सुझाव
यह घटना ग्रामीणों के लिए चेतावनी है। वन विभाग को तुरंत तेंदुए को पकड़ना चाहिए, अन्यथा और घटनाएं हो सकती हैं। ग्रामीणों को जागरूक रहना चाहिए – रात में बाहर न निकलें, बच्चों को अकेला न छोड़ें और तुरंत पुलिस/वन विभाग को सूचित करें। सरकार को सीमांचल में वन्यजीव कॉरिडोर और जागरूकता अभियान बढ़ाने की जरूरत है।
स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और जल्द राहत मिलेगी। लेकिन फिलहाल नोहरी गांव और आसपास के क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है।
Sources: KBC न्यूज़