26 फरवरी 2026, Kishanganj में बच्चा चोर अफवाहों से दहशत: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में स्थित किशनगंज जिले में पिछले कुछ दिनों से “बच्चा चोर” (child lifter) की अफवाहों ने आमजन में भय का माहौल बना दिया है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स और मौखिक चर्चाओं के माध्यम से फैली इन अफवाहों ने लोगों में इतनी दहशत पैदा कर दी है कि संदेह के आधार पर निर्दोष व्यक्ति—जैसे भिखारी, राहगीर, अपंग, महिला या मंदबुद्धि व्यक्ति—को भीड़ द्वारा पकड़कर मारपीट की जा रही है। किशनगंज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में अधिकांश सूचनाएं बेबुनियाद और झूठी साबित हुई हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अफवाहों पर विश्वास न करें, कानून अपने हाथ में न लें और किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाने में दें।
यह समस्या केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है, क्योंकि इसी तरह की अफवाहें पटना, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया आदि जिलों में भी फैल रही हैं। बिहार पुलिस के ADG अमित कुमार जैन ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों और मॉब लिंचिंग में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अफवाहों का फैलाव और असर
किशनगंज के विभिन्न थाना क्षेत्रों—जैसे पोठिया, सदर, बहादुरगंज आदि—में अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। उदाहरण के लिए:
- हलीम चौक के पास एक भिखारी महिला को बच्चे को बिस्कुट देने पर बच्चा चोर समझकर पीटा गया। भीड़ ने उसके पास से भीख में मिले साढ़े तीन सौ रुपये भी छीन लिए।
- पोठिया थाना क्षेत्र के थावाभीठा गांव में एक युवक पर बच्ची उठाने का आरोप लगाकर पिटाई की गई। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस वाहन को घेरकर हंगामा किया।
- कई मामलों में अपंग या अर्द्धविक्षिप्त व्यक्तियों को संदेह के आधार पर प्रताड़ित किया गया।
ये घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से और तेज हो रही हैं। पुराने वीडियो या अन्य राज्यों के क्लिप को “किशनगंज में बच्चा चोर पकड़ा” बताकर शेयर किया जा रहा है। इससे ग्रामीण इलाकों में दहशत बढ़ गई है—माता-पिता बच्चों को बाहर नहीं निकाल रहे, स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है, और आमजन में अजनबियों पर शक बढ़ गया है।
बिहार पुलिस के अनुसार, 2025 में राज्य से 14,699 बच्चे लापता हुए थे, जिनमें से 7,772 सुरक्षित बरामद हो चुके हैं। लेकिन वर्तमान अफवाहों से जुड़े अधिकांश क्लेम झूठे पाए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को 24 घंटे अलर्ट रहने और बच्चा गुम होने पर तुरंत जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस की अपील और कार्रवाई
किशनगंज पुलिस ने स्पष्ट अपील जारी की है:
- बच्चा चोरी की कोई भी सूचना अपुष्ट न मानें। तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाने में सूचना दें।
- अफवाह फैलाने या फॉरवर्ड करने से बचें। सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट शेयर करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज होगी।
- संदिग्ध व्यक्ति को देखकर भीड़ न बनाएं। कानून हाथ में लेना अपराध है (IPC की धारा 147, 323, 506 आदि के तहत कार्रवाई)।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावक सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं। बच्चे को अकेला न छोड़ें, लेकिन अफवाहों से प्रभावित न हों।
पुलिस ने थानों में विशेष टीम गठित की है जो ऐसी अफवाहों की जांच कर रही है। SP संतोष कुमार ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। राज्य स्तर पर भी बिहार पुलिस ने फेक न्यूज अलर्ट जारी किया है।
समाज पर प्रभाव और विशेषज्ञों की राय
ये अफवाहें न केवल निर्दोषों की जान जोखिम में डाल रही हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित कर रही हैं। सीमांचल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह धार्मिक या जातिगत रंग ले सकती है, जिससे तनाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया की तेजी से अफवाह फैलती है, और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और जागरूकता की कमी इसे और बढ़ावा देती है।
बिहार पुलिस ने जनता से अपील की है कि बच्चे की सुरक्षा के नाम पर हिंसा न फैलाएं। इसके बजाय, बच्चों को जागरूक बनाएं—अजनबी से बात न करें, मदद मांगें तो शोर मचाएं।
किशनगंज में बच्चा चोर अफवाहों ने एक बार फिर दिखाया है कि अफवाह कितनी खतरनाक हो सकती हैं। पुलिस की अपील स्पष्ट है—सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं। सूचना दें, जांच होने दें। अफवाह फैलाने वाले असली अपराधी हैं। समाज को मिलकर इन अफवाहों का मुकाबला करना होगा, ताकि निर्दोष सुरक्षित रहें और असली अपराधियों पर नजर रखी जा सके। यदि आपके इलाके में ऐसी कोई अफवाह फैल रही है, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
Sources: हिंदुस्तान