26 फरवरी 2026, सुप्रीम कोर्ट की NCERT किताब पर सख्त कार्रवाई: आज सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाया। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा हाल ही में जारी कक्षा 8 की सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in the Judiciary) से जुड़े चैप्टर पर कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इसे “गहरी साजिश” (deep-rooted conspiracy) करार देते हुए किताब की छपाई, वितरण, डिजिटल शेयरिंग और हार्ड कॉपी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमला बताया और कहा कि “गोली चलाई गई है, न्यायपालिका आज ब्लीडिंग है” (They have fired the gunshot, the judiciary is bleeding today)।
यह मामला स्वत: संज्ञान (suo motu) पर लिया गया, जिसकी शुरुआत 25 फरवरी को हुई जब मीडिया रिपोर्ट्स में किताब के इस हिस्से का जिक्र आया। NCERT ने पहले माफी मांगी और चैप्टर हटाने की बात कही, लेकिन कोर्ट ने इसे अपर्याप्त बताया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
विवाद की पृष्ठभूमि
NCERT ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8 के लिए नई सोशल साइंस किताब “Exploring Society: India and Beyond, Vol II” जारी की थी। इसमें चैप्टर “The Role of the Judiciary in Our Society” (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) के अंतर्गत एक उप-शीर्षक “Corruption in the Judiciary” शामिल था। इस हिस्से में न्यायपालिका की चुनौतियों के रूप में भ्रष्टाचार विभिन्न स्तरों पर, मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी, जटिल प्रक्रियाएं और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र किया गया था।
यह सामग्री स्कूली बच्चों (13-14 साल के) के लिए डिजाइन की गई थी, जो संवेदनशील उम्र में संस्थागत विश्वास बनाते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह हिस्सा पूर्व CJI बी.आर. गवई की कुछ टिप्पणियों से प्रेरित था, लेकिन कोर्ट ने इसे संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया बताया। वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे कोर्ट के समक्ष उठाया, जिसके बाद CJI ने स्वत: संज्ञान लिया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और टिप्पणियां
26 फरवरी को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की। मुख्य टिप्पणियां:
- CJI ने कहा, “यह गहरी साजिश लगती है। न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।”
- “They fired the gunshot, judiciary is bleeding today” – कोर्ट ने इसे संस्था पर हमला बताया।
- माफी पर: “माफी मांगने से काम नहीं चलेगा। इसके पीछे कौन है? नाम बताओ, एक्शन हम लेंगे।”
- NCERT की प्रतिक्रिया को “contemptuous and reckless” बताया।
- कोर्ट ने कहा कि युवा दिमागों में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करना खतरनाक है।
कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव और NCERT निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि अवमानना अधिनियम या अन्य कानून के तहत कार्रवाई क्यों न हो। किताब की सभी फिजिकल कॉपियां जब्त करने और डिजिटल PDF हटाने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 11 मार्च तय की गई।
NCERT और सरकार की प्रतिक्रिया
NCERT ने पहले बयान जारी कर कहा कि यह “अनजाने में हुई त्रुटि” थी और चैप्टर हटा दिया जाएगा। संशोधित किताब 2026-27 सत्र से उपलब्ध होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि चैप्टर रिवाइज होगा और वे खुद इसे वेट करेंगे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जांच के आदेश दिए और जिम्मेदारी तय करने की बात कही। किताब पहले ही वेबसाइट से हटा दी गई और वितरण रोका गया।
प्रभाव और विश्लेषण
यह फैसला शिक्षा और न्यायपालिका के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है। एक ओर, पाठ्यक्रम में वास्तविक चुनौतियों का जिक्र जरूरी है, लेकिन दूसरी ओर, स्कूली स्तर पर संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाना गलत माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह NEP 2020 के तहत क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देने के प्रयास में बैकलैश है।
कोर्ट का रुख न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा का संकेत है। लेकिन कुछ आलोचक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना शिक्षा नीति में संवेदनशील विषयों के हैंडलिंग पर बहस छेड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त कार्रवाई से साफ है कि न्यायपालिका अपनी छवि और अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। NCERT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को भी जवाबदेही का सामना करना पड़ा। यह मामला न केवल किताब के चैप्टर तक सीमित है, बल्कि शिक्षा में संतुलित और निष्पक्ष सामग्री की जरूरत पर जोर देता है। आगे जांच से जिम्मेदारों का पता चलेगा और शिक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद बनेगी।
Sources: लाइव लॉ