24 फरवरी 2026, केरल का नाम बदलकर ‘Keralam’ होगा: आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया और केरल राज्य के नाम को आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि की। यह बदलाव केरल विधानसभा के सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर आधारित है, जो जून 2024 में पारित हुआ था।
पृष्ठभूमि और विधानसभा का प्रस्ताव
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ की बजाय ‘केरलम’ किया जाए। मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने यह प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव में कहा गया कि मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से ‘केरलम’ कहा जाता है। भारत के राज्यों का गठन भाषाई आधार पर 1 नवंबर 1956 को हुआ था, और यह तारीख केरल पिरावी डे के रूप में मनाई जाती है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मलयालम भाषी लोगों के लिए एक संयुक्त राज्य की मांग मजबूत थी, लेकिन संविधान में नाम ‘केरल’ दर्ज हो गया।
विधानसभा ने यह प्रस्ताव दूसरी बार पारित किया था, क्योंकि गृह मंत्रालय ने पहले प्रस्ताव (अगस्त 2023) में कुछ तकनीकी बदलाव सुझाए थे। प्रस्ताव में कहा गया: “हमारी राज्य का नाम मलयालम में ‘केरलम’ है। भाषाई आधार पर राज्यों का गठन हुआ, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में ‘केरल’ दर्ज है। केंद्र सरकार से अनुच्छेद 3 के तहत तत्काल कदम उठाने की अपील है।”
केंद्र सरकार की मंजूरी और प्रक्रिया
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत केरल विधानसभा को भेजेंगी, जहां विधानसभा अपनी राय देगी। विधानसभा की राय मिलने के बाद केंद्र सरकार राष्ट्रपति की अनुशंसा लेकर संसद में बिल पेश करेगी। संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नाम आधिकारिक रूप से बदल जाएगा।
यह प्रक्रिया में समय लग सकता है, क्योंकि इसमें संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है (केवल नाम परिवर्तन), लेकिन सभी आधिकारिक दस्तावेजों, साइनबोर्ड, पासपोर्ट, मैप्स, अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में बदलाव होगा।
‘केरलम’ नाम का मतलब और महत्व
‘केरलम’ दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘केरा’ (नारियल) और ‘आलम’ (भूमि या जगह), यानी “नारियल की भूमि”। यह नाम प्राचीन काल से मलयालम में इस्तेमाल होता रहा है। राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भाषाई पहचान को मजबूत करने का यह कदम है। ‘गॉड्स ओन कंट्री’ के नाम से मशहूर केरल की यह मांग लंबे समय से चली आ रही थी, जो भाषाई गौरव और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और समय का महत्व
यह फैसला केरल विधानसभा चुनाव (अप्रैल-मई 2026 अनुमानित) से ठीक पहले आया है, जिसे राजनीतिक रणनीति से जोड़ा जा रहा है। भाजपा ने इसे सकारात्मक बताया और कहा कि यह राज्य की सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की: “अब ‘केरलाइट’ या ‘केरलन’ का क्या होगा? ‘केरलम-आइट’ कहोगे?” उन्होंने नाम बदलाव पर सवाल उठाया कि इससे जुड़े शब्दों (जैसे Keralite) पर क्या असर पड़ेगा।
विपक्षी दलों ने इसे चुनावी स्टंट बताया, लेकिन LDF सरकार ने इसे भाषाई पहचान की जीत कहा।
अन्य राज्यों के नाम बदलाव के उदाहरण
भारत में पहले भी कई राज्यों/शहरों के नाम बदले गए हैं, जैसे:
- मद्रास → तमिलनाडु (1969)
- बॉम्बे → मुंबई (1995)
- कलकत्ता → कोलकाता (2001)
- बैंगलोर → बेंगलुरु (2006)
- ओरिसा → ओडिशा (2011)
इन बदलावों में भी भाषाई और सांस्कृतिक आधार रहा। केरल का यह बदलाव इसी कड़ी में एक और कदम है।
केरल का नाम ‘केरलम’ होना राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा। यह फैसला केंद्र-राज्य सहयोग का उदाहरण है, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा। राज्य के लोग, प्रवासी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘केरलम’ का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ेगा। यह बदलाव ‘गॉड्स ओन कंट्री’ की नई पहचान को और मजबूत बनाएगा।
Sources: द हिन्दू