23 फरवरी 2026, Bihar में बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम पर नीति बनाने की तैयारी: डिजिटल युग की तेज रफ्तार में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है। बिहार सरकार ने इसे “अदृश्य महामारी” करार देते हुए बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया एक्सपोजर को नियंत्रित करने के लिए व्यापक नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर ठोस नीति फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।
समस्या की गहराई: ‘अदृश्य महामारी’ क्यों?
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में कहा, “बच्चों में स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करना एक बहु-विभागीय मुद्दा है। यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और सामाजिक व्यवहार पर गहरा असर डाल रहा है।” उन्होंने इसे “अदृश्य महामारी” बताया क्योंकि यह दिखाई नहीं देती लेकिन तेजी से फैल रही है।
भारत में हाल की कई स्टडीज (जैसे AIIMS रायपुर की 2025 की रिपोर्ट) से पता चलता है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम 2.22 घंटे प्रतिदिन है, जो WHO और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सुझाए गए समय से दोगुना है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों में भी यह 1.23 घंटे तक पहुंच गया है, जबकि WHO इस उम्र में शून्य स्क्रीन टाइम की सलाह देता है। कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन क्लासेस और पैरेंट्स के वर्क-फ्रॉम-होम ने इस समस्या को और बढ़ावा दिया।
NIMHANS के SHUT (Service for Healthy Use of Technology) क्लिनिक के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में निम्नलिखित समस्याएं बढ़ रही हैं:
- नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या
- आंखों में स्ट्रेन, डिजिटल आई स्ट्रेन और कम उम्र में चश्मे की जरूरत
- एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन और व्यवहार संबंधी विकार
- सामाजिक कौशल में कमी (दूसरों से बातचीत कम होना)
- मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन और डिजिटल एडिक्शन
- शारीरिक गतिविधि की कमी से मोटापा और अन्य स्वास्थ्य जोखिम
NIMHANS ने हाल ही में पेरेंट्स के लिए ऑनलाइन ग्रुप शुरू किया, जिसमें हजारों रजिस्ट्रेशन आए हैं, जो समस्या की गंभीरता दर्शाता है।
बिहार सरकार का प्लान: क्या होगा नीति में?
आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी पुष्टि की कि विभाग ने NIMHANS से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद:
- सभी स्टेकहोल्डर्स (शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, महिला-बाल विकास विभाग, स्कूल, पैरेंट्स, विशेषज्ञ) की बैठक होगी।
- नीति में स्क्रीन टाइम लिमिट, सोशल मीडिया एक्सेस पर उम्र-आधारित प्रतिबंध, स्कूलों में डिजिटल हाइजीन शिक्षा, पैरेंटल कंट्रोल गाइडलाइंस और जागरूकता अभियान शामिल हो सकते हैं।
- कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि 18 साल तक के बच्चों के लिए मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध या रात में गेमिंग ब्लॉक (जैसे दक्षिण कोरिया का सिंड्रेला लॉ) जैसी सख्त व्यवस्था हो सकती है।
यह नीति बहु-विभागीय होगी, क्योंकि स्क्रीन टाइम शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों से जुड़ा है। बिहार में विधानसभा में विधायक संजीव कुमार झा और अन्य ने भी इस मुद्दे को उठाया, जिसमें बच्चों के लिए मोबाइल पर स्टेट्यूटरी वार्निंग की मांग की गई।
राष्ट्रीय और वैश्विक संदर्भ
यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता का हिस्सा है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में डिजिटल एडिक्शन को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट का कारण बताया गया है। कई देशों में पहले से ही स्क्रीन टाइम लॉ लागू हैं, जैसे:
- दक्षिण कोरिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंधित।
- अन्य देश: उम्र-आधारित सोशल मीडिया एक्सेस लिमिट।
भारत में अभी राष्ट्रीय स्तर पर कोई सख्त नीति नहीं है, लेकिन बिहार का यह प्रयास अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है।
चुनौतियां और सुझाव
नीति लागू करने में चुनौतियां हैं:
- डिजिटल शिक्षा का महत्व: ऑनलाइन क्लासेस और लर्निंग ऐप्स जरूरी हैं।
- प्रवर्तन: पैरेंट्स, स्कूल और सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी।
- जागरूकता: ग्रामीण इलाकों में पहुंचाना मुश्किल।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं:
- 0-2 साल: स्क्रीन टाइम शून्य (वीडियो कॉल को छोड़कर)।
- 2-5 साल: अधिकतम 1 घंटा, पैरेंट्स के साथ।
- 5+ साल: 1-2 घंटे, शैक्षणिक कंटेंट पर फोकस।
- 30-30-30 नियम: हर 30 मिनट स्क्रीन के बाद 30 सेकंड ब्रेक, 30 फीट दूर देखें।
आउटडोर खेल, किताबें पढ़ना और परिवार के साथ समय बिताना प्रोत्साहित करें।
बिहार का यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। NIMHANS रिपोर्ट आने के बाद नीति का रूप स्पष्ट होगा। उम्मीद है कि यह न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनेगा।
Sources: जी न्यूज़