22 फरवरी 2026, पाकिस्तान की अफगानिस्तान में Airstrike: – पाकिस्तान ने रविवार की सुबह अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्सों में बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक्स किए, जिसमें टीटीपी (तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के कैंप्स और हाइडआउट्स को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी सेना ने इसे “इंटेलिजेंस-बेस्ड, सेलेक्टिव ऑपरेशंस” बताया, जबकि अफगानिस्तान ने इसे “नागरिकों पर हमला” करार दिया। हमलों में कम से कम 17 लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, और कई लापता बताए जा रहे हैं। यह घटना दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाई पर ले गई है।
हमलों का विवरण और लक्ष्य
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना ने रात के समय तीन प्रांतों – नंगरहार, पक्तिका और खोस्त – में टीटीपी के सात कैंप्स और हाइडआउट्स पर हमले किए। इनमें आईएसआईएस-खोरासान (ISKP) से जुड़े एक ग्रुप को भी टारगेट किया गया। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि इन हमलों में 80 से ज्यादा टीटीपी आतंकी मारे गए, और कई कैंप्स पूरी तरह तबाह हो गए।
पाकिस्तान का कहना है कि ये हमले “हाल की आतंकी घटनाओं” के जवाब में किए गए, खासकर 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद की खदीजा तुल कुबरा शिया मस्जिद में हुए सुसाइड बॉम्बिंग का, जिसमें 31 लोग मारे गए और 170 से ज्यादा घायल हुए। आईएसआईएस-के ने हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन पाकिस्तान ने टीटीपी और उसके अफगानिस्तान-आधारित लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगा रहा है कि अफगानिस्तान टीटीपी को शेल्टर दे रहा है, जिसे काबुल हमेशा नकारता रहा है।
अफगानिस्तान का पक्ष और नागरिक हताहत
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय और तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी जेट्स ने नंगरहार के बिहसूद जिले और पक्तिका प्रांत में नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें एक मदरसा (धार्मिक स्कूल) और कई घर तबाह हुए। मुजाहिद ने इसे “अफगानिस्तान की संप्रभुता का घोर उल्लंघन” और अंतरराष्ट्रीय कानून का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया।
स्थानीय अफगान अधिकारियों और अल जजीरा के रिपोर्टर नासिर शादिद के अनुसार, नंगरहार के गिरदी कास गांव में एक घर पर हमला हुआ, जहां 23 परिवार के सदस्य थे। कम से कम 17 लोग मारे गए, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे। छह लोग लापता हैं, जो मलबे में दबे होने की आशंका है। अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने 18 मौतों की पुष्टि की, जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी सैयद तयेब हमाद ने कहा कि हमले मध्यरात्रि के आसपास शुरू हुए और तीन जिलों को प्रभावित किया।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने “उचित समय पर गणना की गई प्रतिक्रिया” देने की धमकी दी है। तालिबान के एक अधिकारी ने कहा कि यह “नागरिकों पर हमला” है और पाकिस्तान को “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ेंगे।
पृष्ठभूमि: बढ़ते तनाव और टीटीपी की भूमिका
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं। पाकिस्तान टीटीपी को अफगानिस्तान से संचालित होने वाला ग्रुप मानता है, जो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमले करता है। टीटीपी ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान में हमलों में तेजी लाई है, जिसमें डेरा इस्माइल खान में सुरक्षा पोस्ट पर हमला भी शामिल है, जिसमें 23 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए।
इस्लामाबाद मस्जिद ब्लास्ट ने स्थिति को और भड़काया, जहां अफगान मूल के हमलावर ने हमला किया। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को बार-बार टीटीपी लीडरशिप को सौंपने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले साल अक्टूबर में ड्यूरंड लाइन पर झड़पों में 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिसके बाद अस्थायी शांति समझौता हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
ये हमले दोनों देशों के बीच शांति समझौते को खतरे में डाल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन सीमा पर अस्थिरता से चिंतित हैं, क्योंकि इससे क्षेत्रीय आतंकवाद बढ़ सकता है। पाकिस्तान का दावा है कि हमले “सटीक” थे, लेकिन अफगानिस्तान के नागरिक हताहतों के दावे से विवाद बढ़ गया है।
यह घटना दक्षिण एशिया में सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकती है। पाकिस्तान की सेना ने कहा कि वह “आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई” जारी रखेगी, जबकि अफगानिस्तान ने “संप्रभुता की रक्षा” का वादा किया है।
यह हमला पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में एक नया संकट है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि कोई भी गलत कदम बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है।
Sources: CNN