21 फरवरी 2026, Trump के ग्लोबल टैरिफ पर यूएस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में उनकी सबसे चर्चित आर्थिक नीतियों में से एक – ग्लोबल टैरिफ – को बुधवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ अवैध हैं। इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की प्रमुख व्यापार नीति को गहरा धक्का पहुंचाया है, लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए सभी देशों पर 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, हालांकि भारत को कुछ राहत मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: IEEPA में टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखित बहुमत के फैसले में स्पष्ट कहा गया कि 1977 का IEEPA कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल में विदेशी खतरों से निपटने के लिए “आयात को विनियमित” करने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने “मेजर क्वेश्चन्स डॉक्ट्रिन” का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इतनी व्यापक टैक्सेशन शक्ति नहीं सौंपी है, जो मूल रूप से कांग्रेस का विशेष क्षेत्र है।
यह मामला Learning Resources, Inc. v. Trump और संबंधित याचिकाओं पर आधारित था, जहां व्यवसायों और कुछ राज्यों ने ट्रंप के 2025 में लगाए गए “Liberation Day” टैरिफ को चुनौती दी थी। इनमें कनाडा, मैक्सिको और चीन से आने वाले अधिकांश सामानों पर 25% तक, चीन पर 10% और अन्य देशों पर कम से कम 10% (कुछ पर अधिक) टैरिफ शामिल थे। ट्रंप ने इन्हें ड्रग तस्करी (फेंटेनिल) और व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर लगाया था।
कोर्ट ने कहा, “IEEPA में ‘टैरिफ’ या ‘ड्यूटी’ शब्द नहीं है। राष्ट्रपति ने ऐसी शक्ति का दावा किया है जो पहले कभी किसी राष्ट्रपति ने नहीं की।” तीन जजों (थॉमस, कवानॉ और अलिटो) ने असहमति जताई, लेकिन बहुमत ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। इस फैसले से पहले से वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ पर रिफंड की संभावना खुल गई है, हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया। अनुमान है कि इससे 130-160 अरब डॉलर तक के टैरिफ प्रभावित हुए हैं।
ट्रंप का तुरंत पलटवार: 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान
फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कोर्ट को “भयानक फैसला” बताते हुए जजों पर “अनपैट्रियॉटिक” होने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “यह मेरा महान सम्मान है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ साइन किया है, जो लगभग तुरंत प्रभावी होगा।”
यह नया टैरिफ ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है, जो बैलेंस ऑफ पेमेंट्स समस्याओं के लिए 150 दिनों तक 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। ट्रंप ने इसे “अस्थायी” बताया और 24 फरवरी से प्रभावी करने की घोषणा की। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि यह मौजूदा टैरिफ (जैसे सेक्शन 232 और 301) के ऊपर होगा, लेकिन IEEPA टैरिफ अब अमान्य हैं।
ट्रंप ने कहा कि इससे अमेरिका को अधिक राजस्व मिलेगा और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर अंकुश लगेगा। हालांकि, यह कदम वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा सकता है।
भारत पर प्रभाव: ट्रेड डील बरकरार, लेकिन 10% टैरिफ लागू
भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में (फरवरी 2026 की शुरुआत में) एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने का वादा किया था, जबकि अमेरिका ने भारत पर 25% से घटाकर 18% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से IEEPA आधारित टैरिफ अमान्य होने से भारत को कुछ राहत मिली है, क्योंकि पुराने उच्च टैरिफ अब लागू नहीं रहेंगे।
हालांकि, नए 10% ग्लोबल टैरिफ के तहत भारत भी प्रभावित होगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील वाले देशों (भारत, यूके, यूरोपीय संघ आदि) पर अब 10% टैरिफ लागू होगा, न कि पहले तय उच्च दर। एक अधिकारी ने कहा, “भारत 10% टैरिफ देगा जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं होता। सभी ट्रेड पार्टनर्स को अपने समझौतों का पालन करना चाहिए।”
यह भारत के निर्यातकों (टेक्सटाइल, फार्मा, जेम्स एंड ज्वेलरी, मशीनरी आदि) के लिए मिश्रित प्रभाव वाला है। कुछ क्षेत्रों में टैरिफ कम हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ेगा। भारत सरकार ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में नई चुनौतियां ला सकता है, खासकर जब दोनों देश BTA (बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट) पर आगे बढ़ रहे हैं।
वैश्विक और आर्थिक प्रभाव
यह फैसला ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर बड़ा सवालिया निशान है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिल सकती है, लेकिन ट्रंप के नए टैरिफ से मुद्रास्फीति का खतरा बरकरार है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती हैं, और चीन, कनाडा, मैक्सिको जैसे देश जवाबी कदम उठा सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि सेक्शन 301 (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) और सेक्शन 232 (नेशनल सिक्योरिटी) के तहत नए जांच शुरू होंगे, जिससे भविष्य में टैरिफ फिर से लग सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता का प्रतीक है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाया, लेकिन ट्रंप की दृढ़ता से वैश्विक व्यापार युद्ध नया मोड़ ले सकता है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह अवसर और चुनौती दोनों है – बेहतर डील की गुंजाइश है, लेकिन अल्पकालिक दबाव भी।
Sources: ब्लूमबर्ग