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19 फरवरी 2026, e-Voting का डेमो AI समिट में: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में बिहार स्टेट इलेक्शन कमीशन (SECB) ने एक क्रांतिकारी प्रदर्शन किया। कमीशन ने AI-पावर्ड मोबाइल-बेस्ड रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम का लाइव डेमो दिया, जो भारत का पहला ऐसा राज्य-स्तरीय मोबाइल ई-वोटिंग प्लेटफॉर्म है। यह सिस्टम 2025 में अर्बन लोकल बॉडी (नगर निकाय) चुनावों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हुआ था और अब विधानसभा चुनावों में विस्तार की तैयारी है। कमीशन का दावा है कि यह वोटर एक्सक्लूजन (वोटर बहिष्कार) की सबसे बड़ी समस्या को हल करेगा – जैसे प्रवासी मजदूर, बुजुर्ग, दिव्यांग, गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच पाते। NDTV, News18, GKToday और अन्य मीडिया में इसे ‘गेम-चेंजिंग’ और ‘डिजिटल डेमोक्रेसी’ का मॉडल बताया गया। बिहार पवेलियन (हॉल नंबर 5, फर्स्ट फ्लोर) में यह प्रदर्शन BIPARD और बिहार जेननेक्स्ट लैब के साथ मिलकर किया गया, जिसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा।

ई-वोटिंग सिस्टम कैसे काम करता है? यह सिस्टम पूरी तरह मोबाइल-बेस्ड है और AI का इस्तेमाल करता है। मुख्य विशेषताएं:

  • डेडिकेटेड ऐप: “e-Voting SECBHR” नामक एंड्रॉइड ऐप, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) और बिहार स्टेट इलेक्शन कमीशन ने मिलकर डेवलप किया।
  • प्रक्रिया: वोटर ऐप में रजिस्ट्रेशन करता है, बायोमेट्रिक या फेस रिकग्निशन से वेरिफिकेशन होता है (AI-सपोर्टेड), फिर वोट कास्ट करता है। पूरा प्रोसेस डिजिटल है – रजिस्ट्रेशन से वोटिंग तक।
  • सुरक्षा: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, ब्लॉकचेन-लाइक ट्रांसपेरेंसी (कुछ रिपोर्ट्स में उल्लेख), और AI-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन। कमीशन का कहना है कि यह EVM से अलग है, लेकिन उतना ही सुरक्षित।
  • टारगेट ग्रुप: मुख्य रूप से वे वोटर जो पोलिंग बूथ नहीं जा सकते। 2025 नगर निकाय चुनावों में 10,000+ रजिस्ट्रेशन और 50,000+ संभावित वोटर्स थे। जून 2025 में पटना, बक्सर, रोहतास और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में सफल पायलट हुआ।

स्टेट इलेक्शन कमिश्नर दीपक प्रसाद ने समिट में कहा, “यह तकनीक वोटर एक्सक्लूजन को खत्म करती है। बिहार में लो डिजिटल लिटरेसी के बावजूद, हमने इसे सुरक्षित और इंक्लूसिव बनाया।” समिट में डेमो के दौरान वोटर एक्सेसिबिलिटी बढ़ाने पर जोर दिया गया, और यह भारत की डिजिटल डेमोक्रेसी का मॉडल बन सकता है।

2025 अर्बन लोकल बॉडी चुनावों में सफलता जून 2025 में बिहार ने नगर निकाय चुनावों में यह सिस्टम पहली बार लाइव इस्तेमाल किया। छह नगर पंचायतों में पायलट रन हुआ, जहां मोबाइल वोटिंग से वोटर टर्नआउट बढ़ा। कमीशन ने दावा किया कि इससे प्रवासी वर्कर्स और दिव्यांगों की भागीदारी बढ़ी। कोई बड़ा फ्रॉड या तकनीकी गड़बड़ी की रिपोर्ट नहीं आई। यह सफलता समिट में दिखाई गई, जहां इसे ‘इंडिया का पहला मोबाइल-बेस्ड रिमोट वोटिंग’ कहा गया।

बिहार विधानसभा चुनावों (अगले टर्म में) में इसे स्केल करने की योजना है। इससे राज्य में वोटर टर्नआउट (2024 लोकसभा में कम रहा) बढ़ सकता है।

फायदे और चुनौतियां फायदे:

  • वोटर एक्सक्लूजन खत्म: प्रवासी, बुजुर्ग, PwD, बीमार वोटर घर से वोट दे सकेंगे।
  • बढ़ी हुई भागीदारी: डिजिटल प्रोसेस से टर्नआउट बढ़ेगा।
  • लागत कम: पोलिंग बूथ्स और स्टाफ की जरूरत घटेगी।
  • ट्रांसपेरेंसी: AI से फ्रॉड डिटेक्शन आसान।

चुनौतियां और आलोचनाएं:

  • प्राइवेसी और फ्रॉड रिस्क: फेस रिकग्निशन और डेटा स्टोरेज पर सवाल। CSOHATE जैसी रिपोर्ट्स में कहा गया कि बिना रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के यह प्राइवेसी और चुनावी पवित्रता को खतरा पैदा कर सकता है। लो डिजिटल लिटरेसी वाले राज्य में फ्रॉड या हैकिंग का डर।
  • डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण बिहार में स्मार्टफोन और इंटरनेट की कमी।
  • कानूनी मुद्दे: बिहार म्युनिसिपल एक्ट 2007 के तहत रूल्स बदले गए, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ECI की मंजूरी और SC के गाइडलाइंस की जरूरत।
  • ट्रस्ट: कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि EVM पर भरोसा है, मोबाइल वोटिंग पर नहीं। News18 ने पूछा – “क्या यह फ्रॉड-प्रूफ है?”

कमीशन ने जवाब दिया कि सिस्टम रिगोरस टेस्टिंग से गुजरा और ट्रांसपेरेंसी पर फोकस है।

समिट में प्रदर्शन का महत्व इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में बिहार पवेलियन ने AI को गवर्नेंस से जोड़ा। डिप्टी CM सम्राट चौधरी, IT मंत्री श्रेयसी सिंह और MP संजय झा ने उद्घाटन किया। यह ‘डाटा-ड्रिवन गवर्नेंस’ का उदाहरण है। अन्य स्टेट्स भी अब इसे देख रहे हैं।

बिहार का AI-बेस्ड मोबाइल ई-वोटिंग सिस्टम डिजिटल इंडिया और इनक्लूसिव डेमोक्रेसी की दिशा में बड़ा कदम है। 2025 की सफलता के बाद विधानसभा चुनावों में विस्तार से लोकतंत्र मजबूत होगा। लेकिन प्राइवेसी, सिक्योरिटी और डिजिटल इक्वालिटी सुनिश्चित करना जरूरी। यदि सही तरीके से लागू हुआ, तो यह भारत के चुनावी सुधारों में मील का पत्थर साबित होगा। समिट में इसका डेमो न सिर्फ बिहार की, बल्कि पूरे देश की AI-ड्रिवन गवर्नेंस की ताकत दिखाता है।

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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