15 फरवरी 2026, Kishanganj में महाशिवरात्रि पर आस्था का सैलाब: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के किशनगंज जिले में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। ठाकुरगंज स्थित 130 वर्ष पुराने ऐतिहासिक हरगौरी मंदिर को फूलों की मालाओं और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और शाही शिव बारात ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया। किशनगंज शहर, ठाकुरगंज और बहादुरगंज के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। रात भर पूजा-अर्चना, जागरण और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा।
मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता
हरगौरी मंदिर किशनगंज जिले की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। यह सिद्धपीठ माना जाता है और इसका इतिहास नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से जुड़ा हुआ है। मंदिर की स्थापना लगभग 130 वर्ष पहले हुई थी। वर्ष 2000 में इसका स्वर्ण जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया था। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव की अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। भक्त मानते हैं कि यहां आने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस बार मंदिर को हजारों फूलों, रंग-बिरंगी एलईडी लाइटों और विशेष सजावट से सजाया गया था। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, फल और दूध का अभिषेक निरंतर चलता रहा।
भक्तों की अपार भीड़ और रुद्राभिषेक
सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से उत्साहित नजर आए। मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक और जलाभिषेक की धूम रही। कई भक्तों ने उपवास रखा और रात भर जागरण किया। एक स्थानीय भक्त ने कहा, “हर साल महाशिवरात्रि पर यहां आता हूं। बाबा भोलेनाथ की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।” प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी।
शाही शिव बारात का भव्य आयोजन
महाशिवरात्रि की शाम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा — शाही शिव बारात का निकलना। हरगौरी मंदिर से भगवान शिव की बारात गाजे-बाजे के साथ निकली। भक्तों ने भोलेनाथ की पालकी को कंधों पर उठाया और माता पार्वती के साथ विवाह उत्सव का जीवंत चित्रण किया। बारात में ढोल-नगाड़ों की थाप, भजन-कीर्तन और नृत्य की धुन पर सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। युवा भूत-प्रेत के वेश में, महिलाएं पारंपरिक पोशाक में और बच्चे उत्साह से नाचते-गाते चल रहे थे।
बारात का मार्ग और समापन
बारात शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी और वापस मंदिर पहुंचकर विशेष आरती और पूजा के साथ संपन्न हुई। यह दृश्य देखते ही बनता था — पूरा ठाकुरगंज क्षेत्र शिव भक्ति में डूब गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर साल अधिक भव्य होती जा रही है।
अन्य क्षेत्रों में उत्सव की झलक
केवल हरगौरी मंदिर ही नहीं, किशनगंज शहर के भूतनाथ मंदिर, बहादुरगंज और ठाकुरगंज के अन्य शिवालयों में भी भक्तों की भारी भीड़ जुटी। कई जगहों पर प्रसाद वितरण, भजन संध्या और सामूहिक पूजा का आयोजन हुआ। सीमांचल की सांस्कृतिक विविधता यहां स्पष्ट दिखी — विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ शिव भक्ति में लीन नजर आए।
प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस बल की तैनाती, ट्रैफिक नियंत्रण और मेडिकल टीम की व्यवस्था रही। किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई और उत्सव शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
महाशिवरात्रि का यह पर्व आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। किशनगंज जैसे क्षेत्र में शिव भक्ति सभी को एक सूत्र में बांधती है। इस बार का उत्सव पिछले वर्षों से अधिक भव्य रहा और हरगौरी मंदिर की परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक यूं ही जीवित रहेगी।
Sources: दैनिक भास्कर