20-year ban on books by retired officers20-year ban on books by retired officers

14 फरवरी 2026, रिटायर्ड अधिकारियों की किताबों पर 20 साल का प्रतिबंध: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े नीतिगत बदलाव की ओर बढ़ता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारियों द्वारा सेवा से जुड़ी किताबें प्रकाशित करने पर 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह प्रस्ताव नरवणे की किताब से उपजे विवाद का सीधा नतीजा माना जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक होने की आशंका जताई गई है।

नरवणे किताब विवाद की शुरुआत

जनरल एमएम नरवणे ने अप्रैल 2022 में सेना प्रमुख के पद से रिटायरमेंट लिया था। उनकी आत्मकथा फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी का मसौदा 2023 में पेंगुइन रैंडम हाउस को सौंपा गया। किताब में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में भारतीय सेना की रणनीतिक सफलताओं और राजनीतिक निर्णयों का जिक्र है।

रक्षा मंत्रालय ने 2024 से इस किताब की मंजूरी रोकी हुई है। मंत्रालय का कहना है कि कुछ अध्यायों में गोपनीय जानकारी है, जो ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और आर्मी रूल्स का उल्लंघन करती है। पिछले चार सालों में मंत्रालय ने 35 अन्य किताबों को मंजूरी दी, लेकिन नरवणे की किताब अकेली लंबित है।

विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फरवरी 2026 में संसद में किताब के कुछ अंशों का हवाला देते हुए सरकार पर हमला बोला। राहुल ने दावा किया कि किताब में पुलवामा हमले और गलवान संघर्ष से जुड़े ऐसे खुलासे हैं जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने किताब के कथित अनधिकृत सर्कुलेशन पर FIR दर्ज की और पब्लिशर को नोटिस जारी किया। जनरल नरवणे ने खुद एक बयान में कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और वे पब्लिशर के स्टैंड का समर्थन करते हैं।

20 साल कूलिंग-ऑफ का प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक, नरवणे मामले के बाद कैबिनेट स्तर पर चर्चा हुई कि रिटायर्ड अधिकारियों द्वारा जल्दबाजी में लिखी किताबें राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं। प्रस्तावित नियम के तहत:

  • सेना के तीन सितारा और उससे ऊपर के अधिकारी,
  • IAS, IPS और अन्य संवेदनशील पदों पर रहे अफसर

रिटायरमेंट के 20 साल तक अपनी सेवा से जुड़ी कोई किताब या मेमॉयर प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

यह नियम मौजूदा पेंशन रेगुलेशंस और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट को और सख्त बनाने की दिशा में है। फिलहाल रिटायर्ड अधिकारियों को किताब प्रकाशित करने से पहले मंत्रालय की मंजूरी लेनी पड़ती है, लेकिन कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है। नया नियम इसे अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड में बदल देगा।

सरकार का तर्क है कि संवेदनशील जानकारी समय के साथ कम गोपनीय हो जाती है, इसलिए 20 साल का अंतराल उचित है। यह कदम विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा ऐसी किताबों से जानकारी निकालने की आशंका को भी कम करेगा।

विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। राहुल गांधी ने कहा, “सरकार सच छिपाना चाहती है। अगर किताब में कुछ गलत है तो स्पष्ट करें, लेकिन 20 साल की रोक लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।” अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे “सेंसरशिप की नई मिसाल” बताया।

रक्षा विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और कई देशों (जैसे अमेरिका और ब्रिटेन) में इसी तरह के प्रतिबंध हैं। वहीं, अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इतना लंबा प्रतिबंध अनावश्यक है और इससे सेवानिवृत्त अधिकारियों का अनुभव समाज तक नहीं पहुंच पाएगा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा, “संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। गोपनीयता बनाए रखें, लेकिन लोकतंत्र में पारदर्शिता भी जरूरी है।”

प्रभाव और भविष्य

अगर यह नियम लागू होता है तो भविष्य में पूर्व अधिकारियों की आत्मकथाएं दशकों बाद ही आएंगी। इससे राजनीतिक विवाद तो कम हो सकते हैं, लेकिन इतिहासकारों और जनता को समकालीन घटनाओं की प्रामाणिक जानकारी देर से मिलेगी।

पिछले उदाहरणों में जनरल वीके सिंह और जनरल शंकर रॉयचौधरी की किताबों ने भी विवाद पैदा किया था, लेकिन उन्हें प्रकाशित होने दिया गया। नरवणे का मामला पहला है जहां किताब सालों से अटकी हुई है।

सरकार ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जल्द ही आदेश जारी हो सकते हैं। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच चल रही बहस को और गहरा देगा।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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