13 फरवरी 2026, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना में ऐतिहासिक बदलाव: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और अधिक किसान-हितैषी बनाने के लिए बड़े सुधारों का ड्राफ्ट जारी किया है। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव KCC की कुल वैलिडिटी अवधि को 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष करने का है। इससे लंबी अवधि वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों को लोन चुकाने में अधिक लचीलापन मिलेगा। RBI ने इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर हितधारकों से 6 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
यह बदलाव कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकता है, जहां क्रेडिट की कमी और असुविधा अक्सर किसानों की परेशानी का कारण बनती है। RBI के अनुसार, नए प्रस्तावों से फसल चक्र के साथ लोन अवधि का बेहतर तालमेल होगा, जिससे किसानों पर बार-बार रिन्यूअल का बोझ कम होगा।
KCC योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत 1998 में हुई थी, ताकि किसानों को सस्ती दर पर समय पर क्रेडिट उपलब्ध हो सके। वर्तमान में यह योजना फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और घरेलू खर्चों के लिए लोन प्रदान करती है। 3 लाख रुपये तक के लोन पर 7% ब्याज दर है, जिसमें समय पर भुगतान पर 3% सब्सिडी मिलती है, यानी प्रभावी ब्याज केवल 4% रह जाता है।
हालांकि, पुरानी व्यवस्था में KCC की वैलिडिटी आमतौर पर 5 वर्ष होती थी, जिसे हर साल रिव्यू करना पड़ता था। लंबी अवधि वाली फसलों जैसे गन्ना, फल बागान या वन रोपण के लिए यह अवधि अपर्याप्त साबित हो रही थी। किसान संगठनों की लंबी मांग थी कि अवधि बढ़ाई जाए और प्रक्रिया सरल की जाए।
प्रमुख प्रस्तावित बदलाव
RBI के ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में कई क्रांतिकारी प्रावधान हैं:
- अवधि में वृद्धि: KCC की कुल वैलिडिटी 6 वर्ष तक। इससे लंबी फसलों के किसानों को लोन चुकाने के लिए अधिक समय मिलेगा। टर्म लोन कंपोनेंट भी फसल चक्र के अनुसार लचीला।
- फसल चक्र का मानकीकरण: छोटी अवधि वाली फसलों के लिए 12 माह और लंबी अवधि वाली के लिए 18 माह का चक्र। इससे वास्तविक उत्पादन लागत के आधार पर सटीक क्रेडिट लिमिट तय होगी।
- स्केल ऑफ फाइनेंस में एकरूपता: सभी बैंकों में फसल-वार लागत को एकसमान करना, ताकि क्षेत्रीय अंतर कम हो।
- संबद्ध गतिविधियों का विस्तार: पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन आदि को अधिक कवरेज। निवेश क्रेडिट जैसे ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण भी शामिल।
- डिजिटल और सरलीकरण: ऑनलाइन आवेदन, कोलेटरल और मार्जिन में छूट (2 लाख तक), और तकनीकी खर्चों को शामिल करना।
ये दिशानिर्देश वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक और छोटे वित्त बैंक सभी पर लागू होंगे।
किसानों को मिलने वाले फायदे
नए प्रस्तावों से किसानों को बहुआयामी लाभ होंगे:
- लंबी फसलों के लिए चुकौती दबाव कम, ब्याज बोझ घटेगा।
- बार-बार बैंक दौड़ने और कागजी कार्रवाई से मुक्ति।
- अधिक सटीक और उच्च लोन लिमिट, जो वास्तविक जरूरत पर आधारित।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, क्योंकि संबद्ध गतिविधियां मजबूत होंगी।
- डिजिटल प्रक्रिया से युवा और दूरदराज के किसानों को आसानी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी लक्ष्य को बल मिलेगा। बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसानों को विशेष लाभ होगा, जहां लंबी अवधि वाली फसलें आम हैं।
प्रतिक्रियाएं और स्वागत
किसान संगठनों ने RBI के इस कदम का जोरदार स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन के एक नेता ने कहा, “यह किसानों की पुरानी मांग पूरी करने वाला कदम है। 6 वर्ष की अवधि से गन्ना और फल उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।”
कृषि मंत्रालय ने भी इसे सकारात्मक बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे KCC की पहुंच बढ़ेगी और NPA कम होंगे। हालांकि, कुछ ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता पर जोर दिया।
चुनौतियां
ये बदलाव अभी ड्राफ्ट में हैं। अंतिम दिशानिर्देश सुझावों के बाद जारी होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच और डिजिटल साक्षरता अभी भी चुनौती है। RBI ने सभी पक्षों से फीडबैक मांगा है, ताकि योजना और प्रभावी बने।
यह सुधार भारतीय कृषि को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि जल्द लागू होकर यह करोड़ों किसानों की जिंदगी आसान बनाएगा।
Sources: इकनोमिक टाइम्स