12 फरवरी 2026, पूर्णिया सांसद Pappu Yadav को कोर्ट से नहीं मिली राहत: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन नए दर्ज मामलों के कारण उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद वे पटना की बेउर जेल में ही रहेंगे।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी पिछले सप्ताह हुई थी, जब पटना पुलिस ने उन्हें 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया। यह मामला 1995 का है, जिसमें जालसाजी और संपत्ति विवाद के आरोप थे। सोमवार को स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें इस पुराने मामले में जमानत दे दी थी, लेकिन जमानत मिलते ही पुलिस ने अन्य मामलों में उन्हें रिमांड पर ले लिया। इनमें बुद्धा कॉलोनी और कोतवाली थाना से जुड़े 2017 के मामले शामिल हैं, साथ ही गिरफ्तारी के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने का नया आरोप भी लगा।
कोर्ट में क्या हुआ?
गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट में पप्पू यादव को पेश किया गया। उनके वकील ने नए मामलों में जमानत की याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में भावुक दृश्य देखने को मिला। पप्पू यादव फूट-फूटकर रो पड़े और हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाते नजर आए। उनके वकील ऋषि केश नारायण सिन्हा ने बताया कि पुलिस ने दो और नए मामले जोड़ दिए हैं, जिसके कारण जमानत पर सुनवाई टल गई या राहत नहीं मिली। अदालत ने पुलिस की ओर से नए मामलों का हवाला देने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब अगली सुनवाई शुक्रवार को हो सकती है।
पप्पू यादव ने कोर्ट में कहा कि उनकी जान को खतरा है और यह सब एक साजिश का हिस्सा है। जेल से उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी हत्या की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बेउर जेल में अपनी सुरक्षा की मांग की।
पुराना बैकग्राउंड और राजनीतिक विवाद
पप्पू यादव का आपराधिक और राजनीतिक इतिहास लंबा रहा है। वे कई बार जेल जा चुके हैं। सबसे चर्चित मामला सीपीआई नेता अजित सरकार हत्याकांड का है, जिसमें वे आरोपी थे लेकिन बाद में बरी हो गए। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्णिया सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की और RJD-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती दी। राजनीतिक विश्लेषक इसे उनकी गिरफ्तारी का कारण मान रहे हैं।
पप्पू यादव के समर्थकों का कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। पूर्णिया और पटना में उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किए, सड़कें जाम कीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने भी गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार का पुतला फूंका। वहीं, NDA नेताओं ने इसे कानूनी प्रक्रिया बताया और बदले की राजनीति से इनकार किया। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है।
परिवार और समर्थकों की प्रतिक्रिया
पप्पू यादव की मां शांति प्रिया गिरफ्तारी के बाद रो-रोकर बेहाल हो गईं। परिवार का कहना है कि यह अन्याय है। उनकी पत्नी और पूर्व सांसद रंजीत रंजन भी सक्रिय हैं और कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। पूर्णिया में पूर्व मुखिया संजीव कुमार की भूख हड़ताल जारी है, जो पप्पू यादव की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
वकीलों का कहना है कि तीन-चार मामलों में जमानत लेनी है। अगर शुक्रवार को राहत मिलती है तो रिहाई संभव है, वरना मुश्किलें बढ़ेंगी। पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष कानून की जीत।
पूर्णिया की जनता पप्पू यादव को गरीबों का मसीहा मानती है। उनकी अनुपस्थिति में क्षेत्रीय मुद्दे प्रभावित हो रहे हैं। देखना यह है कि कोर्ट कब उन्हें राहत देता है। फिलहाल, बेउर जेल में बंद पप्पू यादव की लड़ाई जारी है।
Sources: प्रभात खबर