Ahmedabad Air India crashAhmedabad Air India crash

12 फरवरी 2026, अहमदाबाद Air India क्रैश जांच में सनसनीखेज खुलासा: 12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के क्रैश ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेक ऑफ के महज 32 सेकंड बाद ही एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरा, जिसमें सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई। ग्राउंड पर भी 19 लोग मारे गए, कुल 260 जानें गईं। केवल एक यात्री की जान बची। अब, करीब आठ महीने बाद, जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जो इस हादसे को तकनीकी खराबी से हटाकर जानबूझकर की गई कार्रवाई की ओर इशारा कर रहा है।

इटली के प्रमुख अखबार Corriere della Sera ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारतीय जांचकर्ता अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकालने वाले हैं कि क्रैश का कारण पायलट द्वारा इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच को जानबूझकर “कट-ऑफ” पोजीशन में डालना था। अखबार ने इसे “almost certainly intentional” (लगभग निश्चित रूप से जानबूझकर) बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैक बॉक्स डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की गहन जांच से यह पता चला है कि टेक ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई मैनुअल रूप से बंद कर दी गई।

जांच एजेंसी Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की जुलाई 2025 में जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में ही फ्यूल कंट्रोल स्विच के “रन” से “कट-ऑफ” पोजीशन में जाने का जिक्र था, लेकिन तब यह स्पष्ट नहीं था कि यह कैसे हुआ। अब, अमेरिकी NTSB लैब में ब्लैक बॉक्स डेटा की दोबारा जांच और CVR ऑडियो को बैकग्राउंड नॉइज से साफ करने के बाद आवाजें पहचानी गई हैं। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई दे रहा है, “तुमने इंजन क्यों बंद कर दिए?” और जवाब मिलता है, “मैंने तो नहीं किया।” इटैलियन रिपोर्ट के अनुसार, पहले बायां इंजन (कैप्टन की साइड) बंद हुआ, फिर दायां। सिमुलेटर टेस्ट में अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने पाया कि दोनों इंजन एक साथ बंद होना तकनीकी खराबी से संभव नहीं था – इसके लिए मैनुअल हस्तक्षेप जरूरी था।

मुख्य संदिग्ध पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल बताए जा रहे हैं, जो क्रैश में मारे गए। हादसे के एक महीने बाद उनके डिप्रेशन से जूझने की जानकारी सामने आई थी। को-पायलट क्लाइव कुंदर थे। कैप्टन सभरवाल के पिता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और नई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को मानसिक स्वास्थ्य या निजी जीवन (तलाक आदि) से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी। पायलट यूनियनों ने भी इसे “जल्दबाजी” बताया और बोइंग तथा एयरलाइन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।

यह खुलासा तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी 2026 को AAIB से तीन हफ्ते में जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने अटकलों से बचने की सलाह दी और कहा कि तकनीकी मामलों में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। बोइंग 787 में कोई तकनीकी खराबी नहीं मिली, जिससे बोइंग कंपनी को राहत मिली है, लेकिन एविएशन सेफ्टी के लिए पायलटों की नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच पर नए सुझाव आने की उम्मीद है।

यह हादसा भारतीय विमानन इतिहास के सबसे भयावह हादसों में से एक है। अगर अंतिम रिपोर्ट में जानबूझकर कार्रवाई की पुष्टि हुई तो यह पायलट सुसाइड या मेंटल हेल्थ से जुड़ा पहला बड़ा मामला होगा। फिलहाल DGCA और AAIB ने आधिकारिक टिप्पणी से इनकार किया है। पीड़ित परिवारों की व्याकुलता समझी जा सकती है, लेकिन सच्चाई सामने आने तक धैर्य जरूरी है।

Sources: नव भारत टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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