11 फरवरी 2026, Ajit Pawar की मौत: प्लेन क्रैश या सुनियोजित साजिश?: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट के पास हुए विमान हादसे में मौत ने पूरे राज्य ही नहीं, देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना माना गया, लेकिन अब उनके भतीजे और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट के विधायक रोहित पवार ने इसे ‘100% साजिश’ करार देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। रोहित पवार ने 10 फरवरी को मुंबई में एक घंटे लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 54 स्लाइड्स की प्रस्तुति दी, जिसमें व्हाट्सएप चैट्स, फ्लाइट डेटा और तकनीकी सबूत पेश किए। उन्होंने पायलट के इतिहास, यात्रा कार्यक्रम में अचानक बदलाव और विमान की सुरक्षा प्रणालियों पर सवाल उठाते हुए विदेशी जांच एजेंसियों से जांच की मांग की है।
हादसे का पूरा विवरण
28 जनवरी 2026 की सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुआ चार्टर्ड लियरजेट एक्सआर विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। हादसे में अजित पवार के अलावा पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, पीएसओ विदिप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की भी मौत हो गई। सभी पांच सवार मारे गए। विमान वीएसआर वेंचर्स कंपनी का था, जिसे एरो एयरक्राफ्ट सेल्स एंड चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने चार्टर्ड किया था। प्रारंभिक जांच में डीजीसीए और एएआईबी ने ब्लैक बॉक्स बरामद किया, जबकि महाराष्ट्र सीआईडी को जांच सौंपी गई। शरद पवार ने शुरुआत में इसे दुर्घटना बताया और साजिश की आशंका खारिज की थी।
रोहित पवार के विस्फोटक आरोप
रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह हादसा नहीं, 100% साजिश है। मैं राजनीतिक साजिश की बात नहीं कर रहा, लेकिन तकनीकी और परिस्थितिजन्य सबूत इसे साजिश की ओर इशारा करते हैं।” उन्होंने परिवार के किसी सदस्य द्वारा पहली बार सार्वजनिक रूप से साजिश का आरोप लगाते हुए कई सवाल उठाए:
- यात्रा कार्यक्रम में अचानक बदलाव: अजित पवार का मूल प्लान कार से पुणे जाना था। कैबिनेट मीटिंग के बाद विदर्भ के एक बड़े नेता के साथ फाइल साइन करने के कारण देरी हुई, जिसके बाद अचानक प्लेन से जाने का फैसला लिया गया। रोहित ने पूछा, “क्या यह पहले से तय था कि उन्हें प्लेन से भेजा जाएगा?”
- पायलट का संदिग्ध इतिहास: कैप्टन सुमित कपूर को शराब पीने की आदत के कारण तीन साल तक ग्राउंडेड किया गया था। अमेरिका में ट्रेनिंग के दौरान भी शराब पीकर पकड़े जाने के कारण उन्हें बीच में ही लौटना पड़ा। रोहित ने वीएसआर कंपनी के पायलट्स के व्हाट्सएप ग्रुप की चैट्स दिखाईं, जिसमें कैप्टन वीके सिंह ने सुमित को कई बार शराब न पीने की चेतावनी दी थी। रोहित ने सवाल उठाया कि क्या पायलट नशे में था या डिप्रेशन में?
- को-पायलट और क्रू पर सवाल: हालांकि मुख्य आरोप कैप्टन पर हैं, लेकिन रोहित ने पूरी क्रू की भूमिका पर संदेह जताया। को-पायलट शांभवी पाठक के साथ अंतिम मिनटों में कम्युनिकेशन की कमी पर भी सवाल उठाए गए।
- तकनीकी खामियां: स्टॉल वॉर्निंग सिस्टम बंद था। ट्रांसपोंडर अंतिम एक मिनट में बंद हो गया। रनवे 29 की बजाय पायलट ने बार-बार रनवे 11 की मांग की, जो कम विजिबिलिटी में खतरनाक था। अंतिम मिनटों में कॉकपिट में खामोशी थी, सिर्फ “ओह श**ट” शब्द रिकॉर्ड हुए। फ्लाइट रडार डेटा क्रैश से एक मिनट पहले कट गया।
- कंपनी पर गंभीर आरोप: वीएसआर वेंचर्स पर मेंटेनेंस में लापरवाही और ईंधन अवैध रूप से ले जाने के आरोप। डीजीसीए ने 2023 में जांच की थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण कार्रवाई नहीं हुई। रोहित ने राज्य सरकार से पूछा कि वीवीआईपी ट्रैवल के लिए एरो कंपनी को क्यों चुना गया?
रोहित ने गांव पंचायत के सीसीटीवी फुटेज का जिक्र किया, जिसमें विमान का झुकना साफ दिख रहा है, जिसने साजिश की आशंका को बल दिया।
जांच की मांग और राजनीतिक असर
रोहित पवार ने सीआईडी जांच को अपर्याप्त बताते हुए अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी), फ्रांस की ब्यूरो ऑफ एनक्वायरी एंड एनालिसिस फॉर सिविल एविएशन सेफ्टी या ब्रिटेन की एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच से जांच की मांग की। उन्होंने वीएसआर ग्रुप के सभी विमानों पर बैन की भी मांग की। रोहित ने कहा कि उन्होंने यह प्रस्तुति शरद पवार को नहीं दिखाई, लेकिन उन्हें लगता है कि बुजुर्ग नेता के मन में भी यही सवाल हैं।
इस आरोपों से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी में उत्तराधिकार की लड़ाई तेज हो गई है। सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ-जय पवार की भूमिका बढ़ी है, जबकि शरद पवार गुट इसे सत्ता के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है। विपक्ष इसे सरकार पर हमला करने का मौका मान रहा है।
अजित पवार की मौत ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा किया है। रोहित पवार के सबूतों और आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। क्या यह वाकई साजिश थी या तकनीकी खामी? जवाब जांच से ही मिलेगा। फिलहाल, पूरा देश इस रहस्यमयी हादसे की सच्चाई जानने को बेताब है। जांच एजेंसियों पर निष्पक्षता की बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि इसमें एक बड़े नेता की जान गई है।
Sources: आज तक