Pothiya CDPO charge disputePothiya CDPO charge dispute

10 फरवरी 2026, पोठिया CDPO प्रभार विवाद में डीएम-कमिश्नर के आदेशों का टकराव: किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड में बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) के अतिरिक्त प्रभार को लेकर जिलाधिकारी और पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के बीच गंभीर प्रशासनिक मतभेद सामने आया है। डीएम विशाल राज ने कोचाधामन CDPO नागेंद्र कुमार को प्रभार से हटाकर बहादुरगंज की CDPO कुमारी रेखा-2 को जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन कमिश्नर कार्यालय ने विभागीय अधिसूचना का हवाला देते हुए नागेंद्र कुमार को ही बनाए रखने का निर्देश जारी कर दिया। इस उलझन ने जिला प्रशासन में नई चर्चा छेड़ दी है।

शिकायतों के बाद डीएम की सख्ती

जून 2025 में समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना संख्या 5101 (दिनांक 30.06.2025) के तहत कोचाधामन के CDPO नागेंद्र कुमार को पोठिया का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। लेकिन इसके बाद से सेविकाओं, सहायिकाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। मुख्य आरोप थे:

  • सेविकाओं के साथ अभद्र व्यवहार
  • पंचायत समिति की बैठकों में अनुपस्थिति
  • आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण न करना
  • विभागीय योजनाओं में लापरवाही और देरी

किशनगंज विधायक कमरूल होदा ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और डीएम से कई बार कार्रवाई की मांग की। सेविकाओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन किए। आखिरकार 6 फरवरी 2026 को डीएम विशाल राज ने आदेश संख्या 138 जारी कर नागेंद्र कुमार को पोठिया के प्रभार से मुक्त कर दिया। अगले दिन 7 फरवरी को डीपीओ अनीता कुमारी-2 ने बहादुरगंज CDPO कुमारी रेखा-2 को 24 घंटे में चार्ज लेने का निर्देश दिया।

कमिश्नर कार्यालय का उलटा निर्देश

ठीक उसी दिन (7 फरवरी) पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से एक पत्र जारी हुआ जिसमें विभागीय अधिसूचना का हवाला देकर नागेंद्र कुमार को ही प्रभार बनाए रखने को कहा गया। पत्र में स्पष्ट लिखा था कि बिना विभागीय अनुमति के प्रभार में बदलाव नहीं किया जा सकता और इससे प्रशासनिक जटिलताएं पैदा होती हैं।

इससे दोनों स्तरों के आदेश एक-दूसरे के विपरीत हो गए। जिला स्तर पर नया प्रभार सौंपा जा चुका था, जबकि प्रमंडलीय स्तर पर पुरानी व्यवस्था बहाल रखने का फरमान आ गया।

डीएम का स्पष्ट बयान

मामले पर डीएम विशाल राज ने कहा, “हमने शिकायतों के आधार पर बदलाव किया था और नई CDPO ने चार्ज भी ले लिया है। आयुक्त महोदय का पत्र आया है जिसमें विभागीय अप्रूवल की बात कही गई है। हमने विभाग से बात की है और मामला होल्ड पर है। विभाग का अगला निर्देश आने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।”

फिलहाल कुमारी रेखा-2 ही पोठिया का प्रभार संभाल रही हैं, लेकिन अंतिम फैसला समाज कल्याण विभाग को करना है।

स्थानीय स्तर पर राहत, प्रशासनिक स्तर पर सवाल

पोठिया प्रखंड में सेविकाओं और जनप्रतिनिधियों ने डीएम के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पहले अधिकारी की लापरवाही से पोषण, टीकाकरण और अन्य बाल विकास योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। विधायक कमरूल होदा ने इसे जनता की जीत बताया।

हालांकि प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जिला और प्रमंडलीय स्तर के बीच समन्वय की कमी क्यों है? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभागीय नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है, लेकिन स्थानीय शिकायतों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

आगे क्या?

समाज कल्याण विभाग से जल्द स्पष्ट निर्देश आने की उम्मीद है। यदि विभाग डीएम के पक्ष में फैसला लेता है तो नागेंद्र कुमार पूरी तरह हटाए जा सकते हैं। वहीं कमिश्नर के निर्देश को मानते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल हो सकती है।

यह विवाद बिहार के ग्रामीण प्रशासन में अधिकार क्षेत्र और समन्वय की चुनौतियों को रेखांकित करता है। पोठिया जैसे सीमांचल के प्रखंडों में बाल विकास योजनाएं लाखों महिलाओं-बच्चों से जुड़ी हैं, इसलिए जल्द स्थायी समाधान जरूरी है।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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