10 फरवरी 2026, पूर्णिया सांसद Pappu Yadav को 31 साल पुराने मामले में जमानत: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को आज पटना की एमपी-एमएलए विशेष अदालत से 31 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में जमानत मिल गई। यह मामला 1995 का है, जिसमें उन पर फर्जी दस्तावेजों से मकान किराए पर लेकर कब्जा करने का आरोप है। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद पप्पू यादव जेल से बाहर नहीं आ सके, क्योंकि एक अन्य मामले में उनकी न्यायिक हिरासत बरकरार है। कोर्ट परिसर के बाहर समर्थकों ने जमानत की खबर पर जश्न मनाया और आतिशबाजी की।
मामले की पृष्ठभूमि: 1995 का गर्दनीबाग कांड
यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाने में 1995 में दर्ज किया गया था। आरोप है कि पप्पू यादव ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक संपत्ति को किराए पर लिया और उस पर कब्जा कर लिया। आईपीसी की धारा 467 (जालसाजी) सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ। लंबे समय तक ट्रायल चलता रहा, लेकिन पप्पू यादव की लगातार अनुपस्थिति के कारण कोर्ट ने उनका जमानत रद्द कर दिया और गैर-जमानती वारंट जारी किया। जुलाई 2025 में जमानत रद्द होने के बाद पुलिस ने मौका देखकर कार्रवाई की।
8 फरवरी 2026 की रात पटना पुलिस ने उनके आवास पर छापेमारी कर गिरफ्तारी की। गिरफ्तारी के दौरान काफी ड्रामा हुआ। पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया। व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि उनकी जान को खतरा है।
कोर्ट में सुनवाई और जमानत
सोमवार (9 फरवरी) को सुनवाई तय थी, लेकिन कोर्ट परिसर में बम की धमकी मिलने से कार्यवाही स्थगित हो गई। मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में जज ने पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई की। उनके वकीलों ने स्वास्थ्य आधार और पुराने मामले का हवाला देकर राहत की मांग की। कोर्ट ने जमानत स्वीकार कर ली, लेकिन दूसरे मामले (बुद्धा कॉलोनी कांड या नई एफआईआर) में रिमांड होने से वे जेल से रिहा नहीं हुए।
कोर्ट से बाहर आने पर पप्पू यादव ने मीडिया से कहा, “यह मेरे खिलाफ साजिश है। मैं गरीबों-मजलूमों की आवाज उठाता हूं, इसलिए मुझे फंसाया जा रहा है। न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।” उन्होंने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बदले की राजनीति है।
समर्थकों का जश्न और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जमानत की खबर मिलते ही कोर्ट परिसर और पूर्णिया में समर्थकों ने जश्न मनाया। पटना में आतिशबाजी हुई और नारे लगे। पूर्णिया में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं। हालांकि, रिहाई न होने से कुछ निराशा भी है। कांग्रेस और आरजेडी ने इसे राजनीतिक बदला बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज दबाना गलत है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी एनडीए ने इसे कानूनी प्रक्रिया बताया। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि यह कानून का पालन है, कोई बदला नहीं। जदयू नेताओं ने पप्पू यादव के बयानों को हताशा करार दिया।
पप्पू यादव का राजनीतिक सफर
पप्पू यादव बिहार की राजनीति के विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली चेहरे हैं। छह बार सांसद रह चुके हैं। पहले आरजेडी, फिर अपनी पार्टी बनाई और हाल में निर्दलीय चुनाव लड़े। वे गरीबों के लिए आवाज उठाने और बाहुबली इमेज के लिए जाने जाते हैं। उनके ऊपर कई पुराने मामले हैं, जिनमें से कई में बरी हो चुके हैं। हाल के दिनों में वे नीट छात्रा मौत मामले में प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे गिरफ्तारी का कारण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह गिरफ्तारी और जमानत बिहार की सियासत को गरमा रही है। विपक्ष इसे नीतीश सरकार के खिलाफ हथियार बना रहा है। आने वाले दिनों में अन्य मामलों की सुनवाई तय होगी, जिससे पप्पू यादव की रिहाई संभव है।
कुल मिलाकर, आज की जमानत पप्पू यादव के लिए बड़ी राहत है, लेकिन पूर्ण स्वतंत्रता अभी दूर है। यह घटना बिहार में सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही जंग को और उजागर करती है। देखना यह है कि आगे की कानूनी लड़ाई क्या रंग लाती है।
Sources: दैनिक जागरण