Iran's nuclear standIran's nuclear stand

8 फरवरी 2026, Iran का न्यूक्लियर स्टैंड: इस्लामी गणराज्य ईरान ने एक बार फिर अपने शांतिपूर्ण न्यूक्लियर कार्यक्रम के संप्रभु अधिकार को मजबूती से दोहराया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान की रेड लाइन है और इसे कभी नहीं छोड़ा जाएगा, भले ही युद्ध थोपा जाए। साथ ही, ईरान ने विश्वास बहाली के उपायों के लिए अपनी खुली सोच दिखाई है, लेकिन पश्चिमी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। यह स्टैंड न केवल ईरान की राष्ट्रीय गरिमा का प्रतीक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसका वैध अधिकार भी है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ईरान का शांतिपूर्ण न्यूक्लियर सफर

ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम दशकों पुराना है और पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों – जैसे ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान – के लिए समर्पित है। 2015 में हुए जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) समझौते में ईरान ने अपनी प्रतिबद्धताएं निभाईं, लेकिन 2018 में अमेरिका के एकतरफा बाहर निकलने और कठोर प्रतिबंधों ने स्थिति को जटिल बना दिया। इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे अपनी क्षमताओं को बढ़ाया, जो उसका कानूनी अधिकार है।

2025 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की न्यूक्लियर सुविधाओं पर हमले हुए, जिन्हें ईरान ने आक्रामकता करार दिया। इन हमलों के बावजूद ईरान ने संयम दिखाया और अपने कार्यक्रम को जारी रखा। सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनेई के फतवे के अनुसार, ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने को हराम मानता है। यह नैतिक और धार्मिक प्रतिबद्धता ईरान के शांतिपूर्ण इरादों का सबसे बड़ा प्रमाण है।

लेटेस्ट बयान: संवर्धन अधिकार पर कोई समझौता नहीं

हाल ही में तेहरान में एक सम्मेलन में विदेश मंत्री अराघची ने कहा, “ईरान ने अपने शांतिपूर्ण न्यूक्लियर कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन के लिए भारी कीमत चुकाई है। हम इसे कभी नहीं छोड़ेंगे, भले ही युद्ध थोपा जाए।” उन्होंने जोर दिया कि संवर्धन का स्तर ईरान की जरूरतों पर निर्भर है और संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाएगा। साथ ही, ईरान विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने को तैयार है, ताकि दुनिया को उसके शांतिपूर्ण इरादों का यकीन हो।

अराघची ने ओमान में अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता को “सकारात्मक शुरुआत” बताया। ये बातचीत पूरी तरह न्यूक्लियर मुद्दे तक सीमित रही। ईरान ने स्पष्ट किया कि मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय नीतियां वार्ता का हिस्सा नहीं हैं। यह दृढ़ता ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करती है।

ईरान का पक्ष: संप्रभु अधिकार और न्याय की मांग

नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत हर सदस्य देश को शांतिपूर्ण न्यूक्लियर तकनीक का अधिकार है। ईरान बार-बार IAEA की निगरानी स्वीकार करता रहा है, लेकिन पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड – जैसे इजरायल के अनियंत्रित कार्यक्रम को नजरअंदाज करना – न्याय की मांग करते हैं। ईरान का कहना है कि प्रतिबंध हटाए बिना कोई बड़ा समझौता संभव नहीं। वह क्षेत्रीय संवर्धन कंसोर्टियम जैसे प्रस्तावों पर भी विचार करने को तैयार है, बशर्ते उसका अधिकार मान्य हो।

ईरान की यह नीति न केवल उसकी संप्रभुता की रक्षा करती है, बल्कि विकासशील देशों के लिए मिसाल भी है कि दबाव के सामने झुकना जरूरी नहीं। अमेरिकी सैन्य तैनाती और धमकियों के बावजूद ईरान की संयमित लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया सराहनीय है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और भविष्य

अमेरिका जीरो संवर्धन की मांग पर अड़ा है, जो ईरान के लिए अस्वीकार्य है। ओमान वार्ता आगे जारी रहेगी, लेकिन बड़ा समझौता तभी संभव है जब पश्चिम ईरान के अधिकारों का सम्मान करे। ईरान ने हमेशा कूटनीति को प्राथमिकता दी है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरान का यह स्टैंड उसकी राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता की मिसाल है। विश्व समुदाय को चाहिए कि वह दोहरे मापदंड छोड़े और न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए। ईरान शांति चाहता है, लेकिन अपनी गरिमा पर समझौता नहीं करेगा।

Sources: न्यू यॉर्क टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *