8 फरवरी 2026, Madhepura में मिड-डे मील कांड: बिहार के मधेपुरा जिले में एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 70 से अधिक छात्र बीमार पड़ गए। उत्क्रमित मध्य विद्यालय कारू टोला (साहुगढ़) में शनिवार को परोसे गए खिचड़ी में मरी हुई छिपकली मिलने की आशंका के बाद बच्चों में उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायतें शुरू हो गईं। सभी प्रभावित बच्चों को तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है और जांच शुरू कर दी गई है।
घटना का विवरण
घटना मधेपुरा सदर प्रखंड के कारू टोला साहुगढ़ स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय की है। स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र पढ़ते हैं। शनिवार को मिड-डे मील में खिचड़ी और सब्जी परोसी गई। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। पहले कुछ बच्चों ने उल्टी की शिकायत की, फिर एक-एक कर दर्जनों बच्चे बेहोश होने लगे। अभिभावकों और शिक्षकों ने तुरंत बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक थाली में मरी हुई छिपकली मिली, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। कुछ बच्चों ने बताया कि खाने में अजीब स्वाद था और उन्होंने खाना छोड़ दिया, लेकिन कई बच्चों ने पूरा खा लिया। अस्पताल में भर्ती बच्चों की संख्या 70 से अधिक बताई जा रही है। अधिकांश बच्चे कक्षा 5 से 8 के हैं।
अस्पताल में स्थिति और इलाज
सदर अस्पताल में अचानक इतने बच्चों के पहुंचने से हड़कंप मच गया। वार्डों में बेड कम पड़ गए और कई बच्चों को फर्श पर रखकर इलाज किया गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सलाइन और दवाएं शुरू कीं। अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है और खतरा टल गया है। अधिकांश में फूड पॉइजनिंग के लक्षण थे, जो अब नियंत्रण में हैं। कुछ बच्चों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) भी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
अभिभावकों का आक्रोश और गंभीर आरोप
अभिभावकों में भारी गुस्सा है। कई ने स्कूल प्रबंधन और मिड-डे मील सप्लायर पर लापरवाही का आरोप लगाया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि खाना खराब लगने पर मना करने पर शिक्षक ने डंडे से मारकर जबरन खिलाया। एक अभिभावक ने कहा, “हमारे बच्चे की जान जोखिम में डाल दी गई। यह लापरवाही है, दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
मिड-डे मील एक NGO के माध्यम से सप्लाई किया जा रहा था। अभिभावकों ने NGO और स्कूल प्रधान पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
जिला प्रशासन ने तुरंत जांच समिति गठित की है। शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रधान और रसोइयों से स्पष्टीकरण मांगा है। खाने के सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और मिड-डे मील की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
बिहार में मिड-डे मील योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जो बच्चों की उपस्थिति और पोषण बढ़ाने के लिए चलाई जा रही है। लेकिन समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो योजना की कमियों को उजागर करती हैं।
मिड-डे मील योजना की चुनौतियां
यह घटना बिहार में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल उठाती है। पहले भी कई जिलों में छिपकली, कीड़े या जहरीले पदार्थ मिलने की घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन में पारदर्शिता, रसोई की सफाई और नियमित जांच की जरूरत है। NGO को ठेका देने की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकार ने योजना में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे हॉट कुक्ड मील, मेन्यू फिक्स करना आदि, लेकिन जमीनी स्तर पर लागू करने में कमी रह जाती है।
बच्चों की सुरक्षा सबसे ऊपर
यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाती है। अभिभावक स्कूल भेजने से डरने लगे हैं। उम्मीद है कि जांच से सच सामने आएगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। सभी बच्चे जल्द स्वस्थ हों, यही कामना है।
Sources: हिंदुस्तान