7 फरवरी 2026, पूर्णिया सांसद Pappu Yadav गिरफ्तार: बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 1995 के एक पुराने मामले में हुई, जिसमें उन पर धोखाधड़ी से किराए का मकान लेकर कब्जा करने का आरोप है। गिरफ्तारी के दौरान करीब तीन घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला, समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए अपनी जान को खतरा बताया, जबकि विपक्ष ने नीतीश कुमार सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम पप्पू यादव के मंदिरी स्थित आवास पर पहुंची। कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर कार्रवाई की गई। पप्पू यादव उस समय घर पर मौजूद थे। समर्थकों ने पुलिस को घेर लिया और गिरफ्तारी का विरोध किया। करीब तीन घंटे चले ड्रामे के बाद आधी रात के बाद उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस वाहन में बैठाया गया।
गिरफ्तारी के समय पप्पू यादव ने मीडिया से कहा, “मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे नहीं पता मेरे साथ क्या होगा। यह नीतीश कुमार सरकार की साजिश है। मेरी हत्या हो सकती है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है क्योंकि वे हाल ही में नीट छात्रा की मौत के मामले में न्याय की मांग जोर-शोर से उठा रहे थे।
31 साल पुराना मामला क्या है?
यह मामला 1995 का है, जो पटना के गर्दनीबाग थाने में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि पप्पू यादव ने धोखाधड़ी से उनका मकान किराए पर लिया और बाद में उस पर कब्जा कर सांसद कार्यालय के रूप में उपयोग किया। मामले में फोर्जरी और धोखाधड़ी के आरोप हैं। लंबे समय तक यह केस लंबित रहा, लेकिन हाल ही में विशेष अदालत ने पप्पू यादव के कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहने पर उनकी जमानत रद्द कर दी और गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अदालत ने पप्पू यादव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती का भी आदेश दिया था।
पप्पू यादव का आपराधिक और राजनीतिक इतिहास पुराना रहा है। वे कई आपराधिक मामलों में आरोपी रह चुके हैं, जिनमें से कुछ में बरी भी हुए। 1990 के दशक में बिहार की क्राइम-पॉलिटिक्स में उनका नाम प्रमुख था। हालांकि, हाल के वर्षों में वे सामाजिक कार्यों और गरीबों-पीड़ितों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ा, अस्पताल में भर्ती
गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच के लिए पप्पू यादव को पहले IGIMS ले जाया गया, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें PMCH शिफ्ट कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान हुई धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी और वे बेहोश हो गए। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई है, लेकिन समर्थक इसे साजिश का हिस्सा बता रहे हैं। शनिवार सुबह उन्हें कोर्ट में पेश किया जाना है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से इसमें देरी हो सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस गिरफ्तारी ने बिहार की सियासत में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “राजनीतिक बदला” करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “पप्पू यादव नीट छात्रा की मौत के मामले में न्याय मांग रहे थे, इसलिए नीतीश सरकार उन्हें दबा रही है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
आरजेडी ने भी नीतीश कुमार सरकार पर हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “पुराने मामलों को चुनिंदा तरीके से खोलना साफ दिखाता है कि यह बदले की कार्रवाई है।” वहीं, जदयू और भाजपा ने इसे कानून का राज बताया। एक भाजपा नेता ने कहा, “कोई कानून से ऊपर नहीं है। पुराना मामला हो या नया, अदालत के आदेश का पालन होना चाहिए।”
पूर्णिया और पटना में पप्पू यादव के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। कई जगहों पर नीतीश कुमार का पुतला फूंका गया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति नियंत्रित की।
बिहार राजनीति पर प्रभाव
पप्पू यादव की गिरफ्तारी से बिहार में महागठबंधन और एनडीए के बीच तनाव बढ़ सकता है। पूर्णिया में यादव वोट बैंक मजबूत है और पप्पू यादव वहां लोकप्रिय हैं। उनकी अनुपस्थिति में विपक्ष को मजबूती मिल सकती है, खासकर नीट जैसे मुद्दों पर। साथ ही, यह नीतीश सरकार की छवि पर भी असर डालेगा, क्योंकि पुराने मामलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना बिहार की अपराध-सियासत की पुरानी कहानी को फिर से जीवंत कर रही है। कानूनी प्रक्रिया आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना बाकी है। फिलहाल पप्पू यादव अस्पताल में हैं और उनका स्वास्थ्य स्थिर बताया जा रहा है।
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