5 फरवरी 2026, Darbhanga के हरिनगर गांव में जातीय तनाव: बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र में स्थित हरिनगर गांव इन दिनों जातीय तनाव की चपेट में है। मामला 2015 के मजदूरी बकाया भुगतान से शुरू हुआ था, जो अब बड़े जातीय विवाद में बदल गया है। दलित पक्ष के आरोपों पर पुलिस ने गांव के 70 नामजद ब्राह्मणों समेत 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। गिरफ्तारी के डर से गांव के कई ब्राह्मण पुरुष घर छोड़कर फरार हो गए हैं, जिससे पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
विवाद की जड़: 2.47 लाख रुपये की मजदूरी
यह पूरा मामला 2015 का है, जब पासवान टोला निवासी कैलाश पासवान ने ब्राह्मण परिवार के हेमंत झा के मकान निर्माण में मजदूरी की थी। आरोप है कि 2.47 लाख रुपये का भुगतान आज तक नहीं हुआ। वर्षों से चले आ रहे इस लेन-देन विवाद ने 31 जनवरी 2026 को हिंसक रूप ले लिया। दलित पक्ष का आरोप है कि ब्राह्मण समुदाय के लोग पासवान टोला पर हमला करने पहुंचे। घरों में घुसकर लाठी-डंडों से मारपीट की, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और लूटपाट की। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिनका इलाज चल रहा है।
पीड़ित अशर्फी पासवान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें 70 ब्राह्मणों को नामजद और 150 अज्ञात को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
ब्राह्मण पक्ष का दावा: SC/ST एक्ट का दुरुपयोग
दूसरी तरफ ब्राह्मण समुदाय का कहना है कि यह मामला जबरन जातीय रंग दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि 30 जनवरी को ही उन्होंने मजदूरी भुगतान को लेकर हुए झगड़े की शिकायत पुलिस में की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब दलित पक्ष की शिकायत पर एकतरफा FIR दर्ज कर पूरे ब्राह्मण समाज को आरोपी बना दिया गया है। कई लोग जो गांव में रहते तक नहीं हैं या घटना के समय मौजूद नहीं थे, उनके नाम भी FIR में शामिल हैं।
गिरफ्तारी के भय से गांव के अधिकांश ब्राह्मण पुरुष घर छोड़कर चले गए हैं। गांव में केवल महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बचे हैं। सड़कों पर सन्नाटा है और दहशत का माहौल है। ब्राह्मण पक्ष का कहना है कि SC/ST एक्ट का दुरुपयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
पुलिस ने गांव में भारी बल तैनात कर दिया है। कुशेश्वरस्थान थाने की पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि कोई नई घटना न हो। अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और छापेमारी जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच impartial तरीके से की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घायलों को मुआवजे और उचित इलाज का आश्वासन दिया गया है। अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और जांच के निर्देश दिए हैं।
सामाजिक सौहार्द पर असर
हरिनगर गांव में ब्राह्मण और पासवान (दलित) समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं। लेकिन यह विवाद अब जातीय रंग ले चुका है, जिससे गांव का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे छोटे-छोटे आर्थिक विवाद अक्सर बड़े जातीय संघर्ष में बदल जाते हैं, जो पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मध्यस्थता और निष्पक्ष जांच से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारी लगातार दोनों पक्षों से बातचीत कर रहे हैं ताकि शांति बहाल हो। गांव में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बना हुआ है।
आगे क्या?
यह मामला न केवल हरिनगर गांव बल्कि पूरे बिहार में जातीय संबंधों और SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर बहस छेड़ रहा है। एक तरफ दलित समुदाय अत्याचार के खिलाफ न्याय मांग रहा है, तो दूसरी तरफ ब्राह्मण समुदाय झूठे मुकदमे का आरोप लगा रहा है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण बिहार में छिपे जातीय तनाव को उजागर कर दिया है।
प्रशासन से अपील है कि दोनों पक्षों की शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई हो और गांव में शांति जल्द बहाल हो। आमजन को भी संयम बरतने और अफवाहों से बचने की जरूरत है।
Sources: पंजाब केसरी