Major action by DGGI in KishanganjMajor action by DGGI in Kishanganj

1 फरवरी 2026, Kishanganj में DGGI की बड़ी कार्रवाई: बिहार के सीमांत जिले किशनगंज में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्थानीय स्तर पर प्रमुख कारोबारी समूह अहमद कंपनी के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जीएसटी चोरी, फेक बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों के तहत यह कार्रवाई पटना से आई विशेष टीम द्वारा की जा रही है। छापेमारी किशनगंज, बहादुरगंज और पड़ोसी जिले अररिया के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर एक साथ चल रही है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

छापेमारी की शुरुआत और टीम की तैनाती

सूत्रों के अनुसार, DGGI की टीम पटना से सुबह ही किशनगंज पहुंची और दोपहर से कार्रवाई शुरू की। बहादुरगंज क्षेत्र में ही 12 से अधिक वाहनों में सवार 45 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए। टीम ने अहमद कंपनी से जुड़े गोदामों, शोरूमों, पेट्रोल पंप और अन्य कारोबारी ठिकानों को घेर लिया। स्थानीय लोगों ने कई सफेद स्कॉर्पियो और अन्य सरकारी वाहनों को कंपनी के प्रतिष्ठानों के बाहर खड़े देखा। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री जब्त की जा रही है। अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन जांच कई दिनों तक चलने की संभावना है।

अहमद कंपनी का कारोबारी साम्राज्य

अहमद कंपनी किशनगंज और आसपास के क्षेत्रों में एक प्रमुख कारोबारी समूह है। कंपनी का कारोबार विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें चमड़ा व्यापार, लोहे का कारोबार, सीमेंट और सरिया (TMT बार) की सप्लाई, बाइक शोरूम और पेट्रोल पंप शामिल हैं। विशेष रूप से सीमेंट व्यापार में कंपनी की बड़े पैमाने पर मौजूदगी है, और आरोप इसी सेक्टर में फेक बिलिंग पर केंद्रित हैं। फेक बिलिंग का मतलब है कि बिना वास्तविक लेन-देन के बिल जारी करना, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाया जाता है और सरकार को जीएसटी का नुकसान होता है।

किशनगंज जैसे सीमांत क्षेत्र में नेपाल बॉर्डर की निकटता के कारण व्यापार आसान होता है, लेकिन कई बार यह टैक्स चोरी के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अहमद कंपनी लंबे समय से इलाके में सक्रिय है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कंपनी के कई प्रतिष्ठान बहादुरगंज और किशनगंज मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित हैं, जहां बड़े गोदाम और शोरूम हैं।

आरोपों की गंभीरता और फेक बिलिंग का खेल

DGGI की जांच मुख्य रूप से फेक बिलिंग पर फोकस है। जीएसटी व्यवस्था में फेक बिलिंग एक आम तरीका है टैक्स चोरी का। इसमें कंपनियां बिना माल की सप्लाई के बिल जारी करती हैं, जिससे खरीदार को ITC का फायदा मिलता है और विक्रेता टैक्स नहीं चुकाता। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में करोड़ों रुपये की चोरी हो सकती है। हालांकि इस मामले में अभी चोरी की सटीक राशि का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन बड़े पैमाने पर सीमेंट व्यापार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह रकम काफी बड़ी हो सकती है।

DGGI देश भर में जीएसटी चोरी के खिलाफ सक्रिय एजेंसी है। हाल के वर्षों में इसने कई बड़े मामलों का पर्दाफाश किया है, जैसे ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों और मार्बल व्यापार में करोड़ों की चोरी। बिहार में भी पहले कई छापेमारियां हो चुकी हैं, लेकिन किशनगंज जैसे छोटे जिले में इतनी बड़ी कार्रवाई दुर्लभ है।

स्थानीय प्रभाव और लोगों की प्रतिक्रिया

छापेमारी की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। बहादुरगंज और किशनगंज के बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई स्थानीय व्यापारियों ने इसे जीएसटी व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ ने कंपनी के मालिकों की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए। कंपनी से जुड़े कर्मचारियों में भी बेचैनी है, क्योंकि जांच से कारोबार पर असर पड़ सकता है।

किशनगंज जिला नेपाल बॉर्डर से सटा होने के कारण व्यापार का हब है। यहां सीमेंट, लोहा और चमड़े का बड़ा कारोबार होता है। ऐसे में जीएसटी चोरी के मामले स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। सरकार को टैक्स नहीं मिलने से विकास कार्यों पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां ईमानदार व्यापारियों को प्रोत्साहन देती हैं और चोरी करने वालों को सबक सिखाती हैं।

DGGI की भूमिका और आगे की जांच

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करती है। इसका मुख्य कार्य जीएसटी चोरी, स्मगलिंग और फर्जीवाड़े को रोकना है। 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद DGGI ने हजारों मामलों में कार्रवाई की है और अरबों रुपये की वसूली की है। इस मामले में टीम दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। अगर सबूत मिले तो गिरफ्तारियां और बड़ी रिकवरी हो सकती है।

अभी जांच प्रारंभिक चरण में है। DGGI अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि कई अन्य कंपनियों के लिंक भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यह कार्रवाई पूरे सीमांत क्षेत्र में जीएसटी अनुपालन को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

निष्कर्ष

किशनगंज में अहमद कंपनी पर DGGI की यह छापेमारी जीएसटी व्यवस्था की पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। टैक्स चोरी न केवल सरकार को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ईमानदार करदाताओं के साथ अन्याय भी करती है। जांच के नतीजे आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल, इलाके में यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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