Assam CM Himanta Biswa SarmaAssam CM Himanta Biswa Sarma

30 जनवरी 2026, असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का ‘मिया’ बयान निंदनीय: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने ‘मिया’ (बंगाली मूल के मुस्लिमों) समुदाय को परेशान करने की बात कही, बेहद निंदनीय और विभाजनकारी है। सरमा ने कहा कि ‘मिया’ लोगों को परेशान करना चाहिए, जैसे रिक्शा वाले को 5 रुपये की जगह 4 रुपये देना, ताकि वे असम छोड़कर चले जाएं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा और वह खुद ‘मिया मुस्लिमों’ को परेशान करने के लिए हैं। यह बयान न केवल घृणा फैलाने वाला है, बल्कि संविधान की भावना के खिलाफ है। मुस्लिम समुदाय असम की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है, और ऐसे बयान से राज्य में सद्भाव को गहरा आघात पहुंचता है। यह हेट स्पीच का स्पष्ट मामला है, जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए खतरा है।

बयान का विवरण और इसका घातक प्रभाव

हिमंता बिस्वा सरमा ने विभिन्न कार्यक्रमों में कहा कि ‘मिया’ वोटरों को परेशान करना उनका काम है। उन्होंने रिक्शा उदाहरण देते हुए आर्थिक बहिष्कार की अपील की और दावा किया कि विशेष मतदाता सूची संशोधन में 4-5 लाख ‘मिया’ वोट कटेंगे। सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देकर बचाव किया, लेकिन विपक्ष ने इसे कोर्ट के नाम का दुरुपयोग बताया। यह बयान अवैध घुसपैठ के नाम पर पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता है। ‘मिया’ शब्द खुद अपमानजनक है और इसका इस्तेमाल समुदाय को हीन भावना से जोड़ता है।

ऐसे बयान से मुस्लिम समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है। कई मुस्लिम परिवार सदियों से असम में बसे हैं, वे राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं—कृषि, मजदूरी, छोटे व्यापार में। रिक्शा चालक, किसान, मजदूर जैसे मेहनतकश लोग समाज की रीढ़ हैं। उन्हें परेशान करने की अपील न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से अपराध है, क्योंकि यह आर्थिक बहिष्कार और भेदभाव को बढ़ावा देती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का स्पष्ट उल्लंघन है, जो समानता और जीवन के अधिकार की गारंटी देते हैं।

मुस्लिम समुदाय का योगदान और असली तस्वीर

असम के मुस्लिम समुदाय ने राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बंगाली मूल के मुस्लिमों ने चाय बागानों, कृषि और सांस्कृतिक विविधता में योगदान दिया। ‘मिया कविता’ जैसे साहित्यिक आंदोलन ने उनकी पीड़ा को आवाज दी और असम की साहित्यिक धरोहर को समृद्ध किया। अधिकांश मुस्लिम भारतीय नागरिक हैं, जिनके पूर्वज दशकों पहले यहां बसे। अवैध घुसपैठ एक अलग मुद्दा है, जिसका समाधान कानूनी तरीके से होना चाहिए, न कि पूरे समुदाय को निशाना बनाकर। सरमा का बयान घुसपैठ के बहाने मुस्लिमों के खिलाफ पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है, जो असम की बहुलतावादी परंपरा के खिलाफ है।

मुस्लिम समुदाय शांतिप्रिय है और राज्य के विकास में भागीदार। वे चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ऐसे बयानों से नफरत बढ़ती है, जो आतंक और हिंसा को जन्म दे सकती है। असम पहले से ही जातीय संघर्षों से गुजरा है, ऐसे में मुख्यमंत्री का यह रुख गैर-जिम्मेदाराना है।

विपक्ष और समाज की तीव्र प्रतिक्रिया

विपक्ष ने सरमा के बयान की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे ‘शर्मनाक और बेशर्म’ बताया और सुप्रीम कोर्ट के नाम के दुरुपयोग का आरोप लगाया। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हाथ जोड़कर बयान वापस लेने की अपील की और चेतावनी दी कि ‘मिया’ लोग सरमा की ‘नाव डुबो देंगे’। अन्य विपक्षी दलों ने इसे हेट स्पीच करार दिया और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन किए और माफी की मांग की।

समाज के बुद्धिजीवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी सरमा की आलोचना कर रहे हैं। यह बयान चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति लगता है, जो असम की शांति को खतरे में डालता है।

सद्भाव और एकता की जरूरत

हिमंता बिस्वा सरमा को तुरंत अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए और ऐसे विभाजनकारी भाषण बंद करने चाहिए। मुख्यमंत्री का दायित्व समाज को जोड़ना है, न कि तोड़ना। मुस्लिम समुदाय असम का अभिन्न अंग है, और उनकी सुरक्षा व सम्मान सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे बयानों से नफरत बढ़ती है, जो राज्य और देश के लिए हानिकारक है। हमें संवैधानिक मूल्यों—समानता, भाईचारा और धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करना चाहिए। असम की विविधता उसकी ताकत है, इसे कमजोरी नहीं बनने देना चाहिए। मुस्लिम समुदाय के खिलाफ यह घृणा रुकनी चाहिए, ताकि राज्य शांति और प्रगति की राह पर चले।

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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