Tractor-JCB drivers' work stoppage protest in KishanganjTractor-JCB drivers' work stoppage protest in Kishanganj

28 जनवरी 2026, Kishanganj में ट्रैक्टर-जेसीबी चालकों का काम बंद आंदोलन: बिहार के किशनगंज जिले में ट्रैक्टर और जेसीबी चालकों एवं मालिकों ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर शोषण के आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है। सैकड़ों चालकों और मालिकों ने ‘ट्रैक्टर मालिक सह चालक संघ’ के बैनर तले एकजुट होकर जिलाधिकारी विशाल राज को ज्ञापन सौंपा। चालकों का कहना है कि छोटी-मोटी गलतियों पर ओवरलोडिंग के नाम पर वाहन जब्त करना और भारी जुर्माना लगाना उनकी रोजी-रोटी छीन रहा है। यदि समस्या का त्वरित समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

यह आंदोलन जिले के ग्रामीण इलाकों में निर्माण कार्य, खनन गतिविधियों और ईंट भट्ठों से जुड़े कामों पर सीधा असर डाल सकता है। किशनगंज जैसे सीमांचल क्षेत्र में ट्रैक्टर और जेसीबी छोटे स्तर के ठेकेदारों और किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन होते हैं। ये वाहन मिट्टी ढोने, निर्माण सामग्री पहुंचाने और खनन कार्यों में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन प्रशासनिक कार्रवाइयों ने इन चालकों की कमर तोड़ दी है।

आरोपों की जड़: नियमों का दुरुपयोग और भेदभावपूर्ण कार्रवाई

चालकों ने ज्ञापन में जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी और वाहन निरीक्षक सहित अन्य अधिकारियों पर नियमित शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छोटी-छोटी गलतियों, जैसे मामूली ओवरलोडिंग या कागजी खामियों पर वाहन जब्त कर लिए जाते हैं। इसके बाद भारी जुर्माना वसूला जाता है, जो हजारों रुपये में होता है। कई मामलों में वाहन महीनों तक जब्त रहते हैं, जिससे चालकों को रोजगार से हाथ धोना पड़ता है।

ट्रैक्टर-जेसीबी चालक संघ के प्रमुख सदस्य महफूज आलम और बरकतउल्ला ने बताया, “हम किस्तों पर ट्रैक्टर और जेसीबी खरीदकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। बार-बार की जब्ती और जुर्माने से किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जिले में बड़े ईंट भट्ठों और प्रतिष्ठानों के बड़े वाहनों को कोई रोक-टोक नहीं होती, लेकिन छोटे चालकों को निशाना बनाया जाता है। यह भेदभावपूर्ण रवैया चालकों में भारी आक्रोश पैदा कर रहा है।

चालकों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी नियमों को हथियार बनाकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। ओवरलोडिंग के केस बनाकर न केवल जुर्माना वसूला जाता है, बल्कि रिश्वत की मांग भी की जाती है। कई चालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिना रिश्वत दिए वाहन छुड़ाना असंभव हो जाता है। यह शोषण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब चालक एकजुट होकर सामने आए हैं।

ज्ञापन सौंपा, काम बंद करके दिया अल्टीमेटम

आंदोलन के तहत सैकड़ों ट्रैक्टर और जेसीबी चालकों ने अपनी गाड़ियां एक जगह पार्क कर दीं और काम पूरी तरह बंद कर दिया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित समाधान की मांग की। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक शोषण बंद नहीं होता और जब्त वाहनों को बिना अतिरिक्त जुर्माने के छोड़ा नहीं जाता, काम शुरू नहीं होगा।

संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को जिले भर में फैलाया जाएगा। इसमें सड़क जाम और धरना जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी ज्ञापन पर जांच के निर्देश दे सकते हैं।

आंदोलन का स्थानीय प्रभाव और व्यापक संदर्भ

किशनगंज जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्य, जैसे सड़क निर्माण, नदी कटाव रोकने के प्रोजेक्ट और निजी निर्माण कार्य इस आंदोलन से प्रभावित हो सकते हैं। कई ठेकेदारों ने बताया कि ट्रैक्टर-जेसीबी की कमी से काम रुक सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी और बालू ढोने का काम ठप होने से किसानों को भी परेशानी हो रही है।

बिहार के कई जिलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों पर ओवरलोडिंग को लेकर स hाई कोर्ट के निर्देश हैं, लेकिन चालकों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग हो रहा है। सीमांचल क्षेत्र में नेपाल सीमा से सटे होने के कारण खनन और परिवहन गतिविधियां ज्यादा हैं, जिससे ऐसे विवाद आम हो जाते हैं। पहले भी यहां मवेशी तस्करी, शराब तस्करी जैसे मामलों में वाहन जब्ती की खबरें आती रही हैं, लेकिन चालकों का इतना बड़ा संगठित आंदोलन पहली बार देखने को मिल रहा है।

आगे क्या?

ट्रैक्टर-जेसीबी चालक संघ ने जिलाधिकारी से अपील की है कि मानवीय आधार पर उनकी समस्याओं को समझा जाए। यदि प्रशासन ने सकारात्मक कदम उठाया तो आंदोलन खत्म हो सकता है, अन्यथा यह जिले की कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। चालक परिवारों की जीविका दांव पर लगी है, और उनका गुस्सा जायज लगता है।

यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है। उम्मीद है कि जिलाधिकारी स्तर पर बातचीत से मामला सुलझ जाएगा और चालक वापस काम पर लौट सकेंगे।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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