India-EU Trade DealIndia-EU Trade Deal

28 जनवरी 2026, भारत-EU FTA पर अंततः लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। दोनों पक्षों के बीच 2007 से चल रही बातचीत आखिरकार सफल रही और आज औपचारिक समझौता हस्ताक्षरित हुआ। इस डील से भारतीय निर्यातकों को यूरोप के विशाल बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय लग्जरी सामान भारत में काफी सस्ता हो जाएगा। हालांकि, अमेरिका ने इस समझौते पर नाराजगी जताई है और कहा है कि इससे भारत को असमान लाभ मिलेगा, जो वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

बातचीत का लंबा सफर

भारत और EU के बीच FTA की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन पर्यावरण मानक, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), कृषि सब्सिडी और डेयरी उत्पादों जैसे मुद्दों पर मतभेद के कारण कई बार रुक गई। 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बातचीत को फिर से गति दी। पिछले चार वर्षों में 20 से अधिक दौर की वार्ताएं हुईं और आखिरकार 2026 की शुरुआत में समझौता फाइनल हो गया।

इस डील में दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण रियायतें दीं। भारत ने ऑटोमोबाइल, वाइन, चॉकलेट और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती स्वीकार की, जबकि EU ने भारतीय टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम किया। समझौते के तहत 90 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक सामान पर शुल्क शून्य या न्यूनतम हो जाएगा।

भारत को क्या फायदा?

यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में भारत का EU को निर्यात 50-60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मुख्य लाभ वाले सेक्टर:

  • टेक्सटाइल और गारमेंट्स: यूरोप में भारतीय कपड़ों की मांग पहले से ऊंची है, अब बिना भारी टैरिफ के और प्रतिस्पर्धी होंगे।
  • फार्मास्यूटिकल्स: जेनेरिक दवाओं का निर्यात आसान, जो भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
  • आईटी और सर्विसेज: डेटा फ्लो और प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी पर बेहतर प्रावधान।
  • कृषि उत्पाद: बासमती चावल, आम, मसाले आदि पर छूट।

सबसे बड़ी चर्चा लग्जरी गुड्स की है। वर्तमान में मर्सिडीज, BMW, ऑडी जैसी लग्जरी कारों पर 100 प्रतिशत से अधिक आयात शुल्क लगता है, जिससे 1 करोड़ की कार भारत में 2-2.5 करोड़ में बिकती है। FTA के बाद शुल्क चरणबद्ध रूप से घटकर 10-20 प्रतिशत तक रह जाएगा। अनुमान है कि 1 करोड़ वाली यूरोपीय कार भारत में 50-60 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकती है। इसी तरह स्विस चॉकलेट, फ्रेंच वाइन, इटालियन चीज और लग्जरी फैशन ब्रांड्स (गुच्ची, लुई वुइटन आदि) भी 30-50 प्रतिशत सस्ते हो जाएंगे।

भारतीय उपभोक्ताओं, खासकर मध्यम और उच्च वर्ग के लिए यह खुशखबरी है। ऑटो इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि लग्जरी कार सेगमेंट में बिक्री दोगुनी हो सकती है, जो घरेलू निर्माताओं (टाटा, महिंद्रा) को भी प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित करेगा।

अमेरिका क्यों नाराज?

अमेरिका ने इस डील पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह समझौता भारत को असमान लाभ देता है। यूरोप अपने बाजार खोल रहा है, लेकिन भारत की कृषि और डेयरी सब्सिडी बरकरार हैं, जो वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ है।” अमेरिकी थिंक टैंक ने चेतावनी दी कि इससे EU-अमेरिका व्यापार प्रभावित हो सकता है और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत हो जाएगा।

पृष्ठभूमि में अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और भारत-अमेरिका के बीच चल रही FTA बातचीत भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत EU के साथ इतनी करीबी व्यापारिक साझेदारी बनाए, क्योंकि इससे इंडो-पैसिफिक रणनीति में संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि यह डील किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और सभी सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत रहेंगे।

EU की नजर में फायदे

यूरोपीय संघ के लिए यह डील एशिया में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका है। EU की अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, ऐसे में भारत जैसे तेज बढ़ते बाजार की जरूरत है। EU को भारतीय सर्विसेज, सस्ते जेनेरिक दवाओं और कुशल मानव संसाधन की पहुंच मिलेगी। साथ ही, पर्यावरण और श्रम मानकों पर भारत की प्रतिबद्धता से EU अपनी ग्रीन डील को आगे बढ़ा सकेगा।

चुनौतियां और आलोचनाएं

सभी खुश नहीं हैं। भारतीय किसान संगठनों ने डेयरी और कृषि उत्पादों पर छूट को लेकर विरोध जताया है, क्योंकि सस्ते यूरोपीय डेयरी उत्पाद घरेलू बाजार में चुनौती बन सकते हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर “भारतीय हितों से समझौता” करने का आरोप लगाया। पर्यावरण कार्यकर्ता कार्बन टैक्स और सस्टेनेबिलिटी क्लॉज को अपर्याप्त बता रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि सभी संवेदनशील सेक्टरों की सुरक्षा की गई है और समझौते में रिव्यू क्लॉज है, जिससे जरूरत पड़ने पर बदलाव संभव हैं।

नई शुरुआत

भारत-EU FTA न केवल द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर से ऊपर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक व्यापार के नए समीकरण बनाएगा। लग्जरी सामान सस्ता होना आम उपभोक्ता के लिए सीधी राहत है, जबकि निर्यात बढ़ने से रोजगार और अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति यहां साफ दिख रही है।

आने वाले महीनों में डील के कार्यान्वयन पर नजर रहेगी। यदि सफल रही, तो यह भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षा का बड़ा प्रमाण बनेगी। उपभोक्ताओं के लिए तो यह त्योहार जैसा है – लग्जरी अब पहुंच के भीतर!

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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