28 जनवरी 2026, Bihar में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम: बिहार सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिला अवर निबंधकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति (जमीन, मकान, फ्लैट आदि) की रजिस्ट्री में खरीदार और विक्रेता दोनों का PAN कार्ड अनिवार्य होगा। यह नियम आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139A और आयकर नियम 1962 के प्रावधानों पर आधारित है, लेकिन हालिया जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद राज्य स्तर पर इसे सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया।
यह बदलाव टैक्स चोरी, काले धन के उपयोग और बेनामी संपत्ति सौदों पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विभाग का मानना है कि बड़े लेन-देन में PAN की अनिवार्यता से आयकर विभाग को ट्रैकिंग आसान होगी और अवैध कमाई से प्रॉपर्टी खरीद की संभावना कम हो जाएगी। खासकर बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध धन के निवेश की आशंकाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
नए नियम की विस्तृत जानकारी
नए निर्देशों के अनुसार:
- लागू सीमा: 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री, गिफ्ट डीड या अन्य निबंधन पर PAN अनिवार्य।
- किन पर लागू: खरीदार, विक्रेता दोनों पक्षों का PAN नंबर देना और उसका सत्यापन कराना जरूरी। सिर्फ नंबर लिखना काफी नहीं, वेरीफिकेशन भी अनिवार्य है।
- PAN नहीं होने पर विकल्प: यदि किसी व्यक्ति (कंपनी या फर्म को छोड़कर) के पास PAN कार्ड नहीं है, तो उसे आयकर नियमों के तहत फॉर्म-60 में घोषणा पत्र भरना होगा। इसमें आय के स्रोत की जानकारी देनी पड़ती है। अगर मुख्य आय कृषि से है, तो कुछ अपवाद लागू हो सकते हैं।
- रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी: निबंधन कार्यालयों को बिना PAN या फॉर्म-60 वाले लेन-देन की जानकारी फॉर्म-61 में आयकर विभाग को भेजनी होगी। यह रिपोर्टिंग हर छह महीने में (31 अक्टूबर और 30 अप्रैल तक) अनिवार्य है।
- कब से सख्ती: यह प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन आयकर विभाग की हालिया जांच में पटना, गया सहित कई जिलों में अनियमितताएं मिलीं। हजारों रजिस्ट्री रिकॉर्ड की समीक्षा में बिना PAN के बड़े सौदे पाए गए, जिसके बाद विभाग ने सभी अवर निबंधकों को पत्र जारी कर तत्काल लागू करने के निर्देश दिए।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले कई रजिस्ट्री कार्यालयों में 10-30 लाख या उससे अधिक के सौदों में यह नियम नजरअंदाज किया जा रहा था। अब लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्यों उठाया गया यह कदम? मुख्य वजहें
बिहार में संपत्ति बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही काले धन के निवेश और टैक्स चोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। आयकर विभाग की जांच में पता चला कि कई बड़े सौदे बिना PAN या अधूरे विवरण के हो रहे थे, जो संभावित कर चोरी की ओर इशारा करते हैं।
मद्य निषेध विभाग की सख्ती की एक बड़ी वजह राज्य में पूर्ण शराबबंदी भी है। अवैध शराब कारोबार से होने वाली कमाई को संपत्ति में निवेशित करने की आशंका को देखते हुए पारदर्शिता जरूरी बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि PAN लिंकिंग से बेनामी संपत्ति कानून के उल्लंघन को भी रोका जा सकेगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार की डिजिटलाइजेशन और ब्लैक मनी पर कार्रवाई की मुहिम से भी यह कदम जुड़ा हुआ है। बिहार में IGRS पोर्टल पर ऑनलाइन प्रक्रिया पहले से चल रही है, अब PAN इंटीग्रेशन से पूरी प्रक्रिया और मजबूत होगी।
खरीदारों-विक्रेताओं पर प्रभाव और प्रक्रिया
इस नियम से आम नागरिकों को शुरुआत में थोड़ी असुविधा हो सकती है। जिनके पास PAN नहीं है, उन्हें पहले PAN बनवाना पड़ेगा या फॉर्म-60 तैयार करना होगा। लेकिन लंबे समय में यह फायदेमंद साबित होगा क्योंकि फर्जी सौदों और विवादों की संभावना कम हो जाएगी।
रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया अब इस प्रकार होगी:
- IGRS बिहार पोर्टल पर अपॉइंटमेंट बुक करें।
- दस्तावेजों के साथ PAN कार्ड और आधार लेकर निबंधन कार्यालय पहुंचें।
- PAN का ऑनलाइन सत्यापन।
- फॉर्म-60 (यदि जरूरी) जमा करें।
- शुल्क भुगतान और रजिस्ट्री पूरी।
यदि PAN नहीं दिया गया तो रजिस्ट्री रुक सकती है या बाद में आयकर नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। वरिष्ठ नागरिकों या ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान की जरूरत बताई जा रही है।
विशेषज्ञों और हितधारकों की राय
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम बाजार को और व्यवस्थित बनाएगा। पटना के एक प्रॉपर्टी डीलर ने बताया, “बड़े सौदों में पारदर्शिता आएगी, लेकिन छोटे खरीदारों को PAN बनवाने में समय लग सकता है।” वहीं, कर विशेषज्ञों ने इसे स्वागतयोग्य कदम बताया, क्योंकि इससे राज्य का राजस्व भी बढ़ेगा।
कुछ लोगों की चिंता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में PAN की पहुंच कम है, इसलिए सरकार को कैंप लगाकर जागरूकता फैलानी चाहिए।
बिहार सरकार का यह फैसला संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल टैक्स चोरी रोकेगा बल्कि आम नागरिकों के संपत्ति अधिकारों को भी सुरक्षित बनाएगा। यदि आप रजिस्ट्री कराने की योजना बना रहे हैं, तो तुरंत अपना PAN चेक करें और जरूरत पड़ने पर नया बनवाएं। ज्यादा जानकारी के लिए नजदीकी निबंधन कार्यालय या IGRS बिहार निबंधन कार्यालय पोर्टल विजिट करें।
यह बदलाव बिहार को डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की ओर ले जाने वाली नीतीश सरकार की पहलों का हिस्सा है। आने वाले दिनों में और सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
Sources: प्रभात खबर