26 जनवरी 2026, Farmer ID और PM-KISAN में क्यों अटक रहे लाखों किसान: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना देश के छोटे-सीमांत किसानों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। इस योजना के तहत हर साल 6000 रुपये की सहायता तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में जाती है। बिहार सरकार ने इसमें 3000 रुपये जोड़कर कुल 9000 रुपये सालाना करने का ऐलान किया है। लेकिन 2026 में नया नियम लागू होने से लाखों किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब PM-KISAN की अगली किस्त (22वीं किस्त) पाने के लिए Farmer ID रजिस्ट्रेशन और e-KYC अनिवार्य कर दिया गया है। बिहार में अभी तक करोड़ों किसानों में से बड़ी संख्या अभी भी इस प्रक्रिया से वंचित है, जिससे वे सरकारी योजनाओं की सब्सिडी, बीमा और अन्य लाभों से दूर हो सकते हैं।
मुख्य समस्याएं क्या हैं?
Farmer ID रजिस्ट्रेशन Agri Stack योजना का हिस्सा है, जो डिजिटल तरीके से किसानों की पहचान बनाता है। इसके लिए आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज (जमाबंदी, खाता-खेसरा) और बैंक खाते की जरूरत पड़ती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ये प्रक्रिया आसान नहीं रही।
- जमाबंदी और लैंड रिकॉर्ड में गड़बड़ी: बिहार में भूमि सर्वे और दाखिल-खारिज की पुरानी समस्याएं अब सामने आ रही हैं। कई किसानों के नाम पर जमाबंदी नहीं है या बंटवारा नामा पूरा नहीं हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार जैसे जिलों में हजारों किसान इसी वजह से अटके हैं। नाम में छोटा सा अंतर (जैसे आधार में “मो० माजुद्दीन” और रसीद में “शेख माजुद्दीन”) भी रजिस्ट्रेशन रोक देता है। 80 प्रतिशत किसान के ऑनलाइन जमाबंदी पंजी में खसरा वार रकबा नहीं है, जिस से रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है, उन किसानो को परिमार्जिन प्लस के द्वारा खेसरा वार रकबा अपडेट करने के बाद ही फार्मर रजिस्ट्रेशन होगा और परिमार्जिन प्लस में विभाग 2-3 महीने समय लगा देता है कुछ लोगो का कहना है कि 6-8 महीने लग जाता है।
- e-KYC की तकनीकी दिक्कतें: e-KYC OTP या बायोमेट्रिक से होती है, लेकिन आधार से लिंक मोबाइल नंबर न होने, फिंगरप्रिंट मैच न करने या सर्वर स्लो होने से फेल हो जाती है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट में कटिहार जिले का उदाहरण है, जहां 1.25 लाख किसानों की रजिस्ट्री बाकी है जबकि e-KYC पूरी हो चुकी है। सर्वर की धीमी गति और डेटा अपडेट की कमी से CSC सेंटर्स पर लंबी कतारें लग रही हैं।
- डिजिटल और जागरूकता की कमी: ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। बुजुर्ग किसान ऑनलाइन पोर्टल समझ नहीं पाते। कई जगहों पर किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक पर्याप्त नहीं हैं। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, बक्सर जैसे जिलों में बिना रजिस्ट्री के सब्सिडी बंद होने की चेतावनी दी गई है।
- CSC सेंटर्स पर भीड़ और शुल्क: ऑनलाइन फेल होने पर CSC या वसुधा केंद्र जाना पड़ता है, जहां 15-50 रुपये शुल्क के अलावा घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ जगहों पर फ्रॉड के भी मामले सामने आए हैं।
- समय सीमा का दबाव: जनवरी 2026 में कई जिलों में 10-15 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन पूरा करने के निर्देश दिए गए। लेकिन, बिहार में अभी भी 71 लाख से अधिक किसानों की Farmer ID नहीं बनी है। स्पेशल कैंप लगाए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों से लक्ष्य दूर है।
किसानों की परेशानी और उदाहरण
सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज) में मक्का-जूट किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एक किसान ने बताया, “जमीन पुरखों के नाम पर है, बंटवारा नहीं हुआ। अब रजिस्ट्री नहीं हो रही, तो 2000 रुपये की किस्त कैसे आएगी?” कई किसानों को लगता है कि यह प्रक्रिया शहरों के लिए आसान है, लेकिन गांवों में मुश्किल। सोशल मीडिया और लोकल रिपोर्ट्स में किसान शिकायत कर रहे हैं कि बार-बार दौड़ने के बाद भी “रिकॉर्ड मिसमैच” का मैसेज आता है।
सरकारी प्रयास और आगे की राह
बिहार सरकार ने मिशन मोड में स्पेशल कैंप शुरू किए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रखंड स्तर पर कृषि समन्वयकों को जिम्मेदारी दी है। कुछ जिलों में एक दिन में हजारों रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड बना है। केंद्र सरकार ने भी हेल्पलाइन (155261) और पोर्टल पर सुविधा बढ़ाई है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लैंड रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटाइज करने और नाम सुधार की प्रक्रिया आसान करने की जरूरत है।
यह समस्याएं सिर्फ PM-KISAN तक सीमित नहीं – फसल बीमा, सब्सिडी और अन्य योजनाओं से भी किसान वंचित हो सकते हैं। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। किसानों से अपील है कि नजदीकी कैंप या CSC पर जाकर प्रक्रिया पूरी करें। सरकार को भी जागरूकता अभियान और तकनीकी सुधार पर जोर देना चाहिए।
आखिरकार, ये योजनाएं किसानों की समृद्धि के लिए हैं। इन्हें पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि कोई किसान पीछे न रह जाए।
Sources: इकनोमिक टाइम्स