26 जनवरी 2026, ICE की सख्त कार्रवाई पर तनाव चरम पर, हजारों व्यवसाय बंद: अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में बॉर्डर पेट्रोल एजेंट द्वारा एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन उग्र हो गए हैं। यह घटना ट्रंप प्रशासन की कड़ी इमिग्रेशन नीतियों और ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) की चल रही क्रैकडाउन का हिस्सा मानी जा रही है। प्रदर्शनों के कारण शहर के हजारों व्यवसाय बंद हो गए हैं, जबकि सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे अमेरिका में नस्लीय न्याय, इमिग्रेशन अधिकार और पुलिस हिंसा पर बहस को फिर से गरमा दिया है।
घटना का विवरण
घटना 24 जनवरी 2026 की शाम की है। मिनियापोलिस के साउथ साइड इलाके में ICE और बॉर्डर पेट्रोल की संयुक्त टीम एक इमिग्रेशन रेड कर रही थी। इस दौरान 32 वर्षीय मैक्सिकन मूल के अमेरिकी नागरिक एंटोनियो रामिरेज़ (नाम परिवर्तित) को संदिग्ध मानकर रोका गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामिरेज़ ने कोई हथियार नहीं दिखाया और सिर्फ अपनी पहचान मांगी, लेकिन एजेंट ने अचानक गोली चला दी। गोली रामिरेज़ के सीने में लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
बॉर्डर पेट्रोल का दावा है कि रामिरेज़ ने एजेंट पर हमला करने की कोशिश की और उनके पास चाकू था। लेकिन परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे पूरी तरह खारिज किया है। रामिरेज़ के भाई ने कहा, “वह सिर्फ घर लौट रहा था। उसके पास कोई हथियार नहीं था। यह सरासर नस्लीय पूर्वाग्रह था।” घटना की बॉडीकैम फुटेज अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे संदेह और बढ़ गया है।
प्रदर्शन और व्यवसाय बंद
घटना की खबर फैलते ही मिनियापोलिस की सड़कें प्रदर्शनकारियों से भर गईं। हजारों लोग “नो जस्टिस, नो पीस” और “ब्लैक लाइव्स मैटर” जैसे नारे लगाते हुए पुलिस मुख्यालय और ICE ऑफिस के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से लैटिनो, ब्लैक और एशियन समुदायों से हैं, जो ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
प्रदर्शनों के कारण शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई। हजारों छोटे-बड़े व्यवसाय – रेस्तरां, दुकानें, गैस स्टेशन और किराना स्टोर – बंद हो गए। मिनियापोलिस चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार, अकेले 25-26 जनवरी को करीब 8,000 व्यवसाय प्रभावित हुए, जिससे लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। कई मालिकों ने स्वेच्छा से बंदी की घोषणा की और प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। एक रेस्तरां मालिक ने कहा, “हम तब तक नहीं खोलेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता।”
पुलिस ने आंसू गैस, रबर बुलेट और पानी की बौछारें इस्तेमाल कीं, जिससे दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए। कम से कम 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मेयर जैकब फ्रे ने शांति की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे “खोखला” बताया।
ट्रंप प्रशासन की नीतियां विवाद में
यह घटना ट्रंप प्रशासन की दूसरी टर्म में शुरू की गई सख्त इमिग्रेशन क्रैकडाउन का प्रत्यक्ष परिणाम है। ट्रंप ने चुनाव अभियान में वादा किया था कि वे अवैध इमिग्रेशन को पूरी तरह रोकेंगे और ICE को पूरे अधिकार देंगे। जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ICE ने देशभर में हजारों रेड किए हैं, जिसमें लाखों लोगों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
आलोचकों का कहना है कि ये नीतियां नस्लीय प्रोफाइलिंग को बढ़ावा दे रही हैं। डेमोक्रेटिक नेता और सिविल राइट्स संगठन ACLU ने इसे “पुलिस राज्य” करार दिया है। कांग्रेस वीमेन इल्हान उमर (मिनियापोलिस से ही) ने ट्वीट किया, “यह जॉर्ज फ्लॉयड की याद दिलाता है। हम फिर से सड़कों पर हैं क्योंकि न्याय नहीं मिला।” दूसरी ओर, व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि एजेंटों ने “खतरे का सामना किया” और जांच चल रही है।
व्यापक प्रभाव और आगे की राह
यह प्रदर्शन सिर्फ मिनियापोलिस तक सीमित नहीं हैं। लॉस एंजिल्स, शिकागो और न्यूयॉर्क में भी समर्थन प्रदर्शन हो रहे हैं। लैटिनो समुदाय ने “डिया सिन इमिग्रांटेस” (इमिग्रेंट्स के बिना दिन) अभियान शुरू किया, जिसमें हजारों लोग काम पर नहीं गए। इससे कई स्कूल, फैक्टरियां और निर्माण साइटें बंद हो गईं।
मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बॉडीकैम फुटेज सार्वजनिक नहीं हुई तो तनाव और बढ़ेगा। मिनेसोटा अटॉर्नी जनरल ने स्वतंत्र जांच की घोषणा की है।
यह घटना अमेरिका के गहरे विभाजन को उजागर कर रही है – एक तरफ सख्त बॉर्डर सुरक्षा के समर्थक, दूसरी तरफ मानवाधिकार और समानता की मांग करने वाले। ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वे नीतियों की समीक्षा करें, वरना पूरे देश में अशांति फैल सकती है।
मिनियापोलिस की सड़कें अभी भी गर्म हैं। लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन सवाल यह है कि कब तक यह शांति बनी रहेगी?
Sources: CNN