26 जनवरी 2026, 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ की भव्य परेड: भारत ने आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड ने एक बार फिर दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और नारी शक्ति का अद्भुत नजारा दिखाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस वर्ष की परेड का मुख्य थीम ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ रहा, जो राष्ट्रप्रेम और एकता का प्रतीक बना।
परेड सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई और लगभग 97 मिनट तक चली। हजारों दर्शकों और लाखों टीवी दर्शकों के सामने भारतीय सेना की टुकड़ियों ने अनुशासन और शौर्य का शानदार प्रदर्शन किया। आकाश में राफेल लड़ाकू विमानों की गर्जना, जमीन पर टैंकों-मिसाइलों की धमक और महिलाओं की अगुवाई में मार्चिंग टुकड़ियां – सबने मिलकर एक यादगार तस्वीर पेश की। परेड के अंत में तिरंगे के हजारों गुब्बारे आसमान में छोड़े गए, जो पूरे वातावरण को तिरंगा रंग में रंग दिया।
पहली बार प्रदर्शित हुईं स्वदेशी हाइपरसोनिक और LR-AShM मिसाइलें
इस वर्ष की परेड का सबसे बड़ा आकर्षण रहा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी हथियार प्रणालियां। पहली बार कर्तव्य पथ पर लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन हुआ। यह मिसाइल 12,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकती है और स्थिर तथा गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निषेध क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी। DRDO के अधिकारियों के अनुसार, यह मिसाइल कई प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है और मोबाइल लॉन्चर पर तैनात की जा सकती है।
इसके साथ ही ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी पहली बार दिखाया गया, जो लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने में सक्षम है। ये दोनों प्रणालियां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का भी प्रतीक बनीं, जिसमें भारतीय सेना ने इन हथियारों की ताकत को साबित किया था। दर्शकों ने जब इन मिसाइलों को कर्तव्य पथ पर गुजरते देखा तो पूरे वातावरण में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे गूंज उठे।
ब्रह्मोस, आकाश और अन्य उन्नत मिसाइलों का दमदार प्रदर्शन
परेड में स्वदेशी हथियारों की झड़ी लगी रही। विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा। यह मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा – तीनों माध्यमों से लॉन्च की जा सकती है और दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर तक को नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसके साथ ही आकाश सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जो हवाई हमलों से रक्षा करने में अत्यंत प्रभावी है।
इसके अलावा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, धनुष तोप, एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) और मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) जैसी प्रणालियां भी प्रदर्शित हुईं। ये सभी हथियार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता का प्रमाण हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इन हथियारों के सफल उपयोग ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति का एहसास कराया था, और आज कर्तव्य पथ पर इनका प्रदर्शन उस गर्जना की याद दिलाता रहा।
नारी शक्ति का ऐतिहासिक और प्रेरणादायक प्रदर्शन
इस वर्ष की परेड में नारी शक्ति सबसे चमकदार सितारा रही। पहली बार एक महिला अधिकारी ने पुरुष प्रधान CRPF दल की अगुवाई की, जो इतिहास रचने वाला पल था। CRPF और SSB की ऑल-वूमेन टुकड़ियां भी परेड में शामिल हुईं। BSF और दिल्ली पुलिस की महिला बाइक सवारों ने खतरनाक स्टंट कर सबको हैरान कर दिया। ये महिला जवान बाइकों पर संतुलन, साहस और परफेक्शन का अद्भुत नजारा पेश कर रही थीं।
कुल 16 मार्चिंग टुकड़ियों में से चार का नेतृत्व महिला अधिकारियों ने किया। हरियाणा की अक्षिता धनखड़, सिमरन बाला और निकिता जैसी युवा महिला अधिकारियों ने अनुशासन और शौर्य का शानदार उदाहरण पेश किया। आकाश में महिला पायलटों ने राफेल और अन्य लड़ाकू विमानों की उड़ान भरी। यह प्रदर्शन सिर्फ परेड तक सीमित नहीं था – यह भारत की उन लाखों महिलाओं का प्रतीक था जो सेना, पुलिस और अन्य क्षेत्रों में देश सेवा कर रही हैं।
सांस्कृतिक झांकियां और समापन
परेड में 30 से अधिक राज्यों की झांकियां निकलीं, जिनमें जम्मू-कश्मीर की हस्तशिल्प विरासत, केरल की वाटर मेट्रो, राजस्थान की उस्ता कला आदि प्रमुख रहीं। ये झांकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को दर्शाती रहीं।
परेड का समापन तिरंगे गुब्बारों के साथ हुआ, जो आसमान में उड़ते हुए पूरे देश को एकता का संदेश दे रहे थे।
77वें गणतंत्र दिवस की यह परेड सिर्फ एक आयोजन नहीं थी – यह आत्मनिर्भर भारत, नारी शक्ति और अटूट राष्ट्रप्रेम की जीवंत तस्वीर थी। कर्तव्य पथ पर गूंजी मिसाइलों की धमक और महिलाओं की हुंकार ने दुनिया को बता दिया कि भारत अब सिर्फ लोकतंत्र का सबसे बड़ा देश नहीं, बल्कि एक मजबूत और आत्मविश्वास से भरा राष्ट्र है। जय हिंद!
Sources: एनडीटीवी