Tejaswi Yadav RJDTejaswi Yadav RJD

25 जनवरी 2026, RJD में तेजस्वी युग की शुरुआत: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (वर्किंग प्रेसिडेंट) नियुक्त कर दिया गया। यह फैसला पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से लिया गया। इस नियुक्ति को ‘तेजस्वी युग’ की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है, क्योंकि अब पार्टी की कमान पूरी तरह युवा नेतृत्व के हाथों में सौंप दी गई है। हालांकि, इस खुशी के माहौल में लालू परिवार की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलकर पार्टी के अंदरूनी कलह को फिर से उजागर कर दिया।

बैठक का पूरा विवरण

RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पटना में पार्टी मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक में लालू प्रसाद यादव खुद मौजूद थे और उन्होंने तेजस्वी को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह पद विशेष रूप से तेजस्वी के लिए बनाया गया है, ताकि वे पार्टी के दैनिक कार्यों और संगठनात्मक गतिविधियों की पूरी कमान संभाल सकें। लालू प्रसाद यादव अभी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और उम्र को देखते हुए अब तेजस्वी ही पार्टी का चेहरा होंगे।

बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने तेजस्वी की प्रशंसा की और इसे पार्टी के लिए ‘नए युग’ की शुरुआत बताया। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है, क्योंकि 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उस हार के बाद पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग जोर पकड़ रही थी। तेजस्वी की इस नियुक्ति को पार्टी को मजबूत करने और युवा वोटरों को जोड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

रोहिणी आचार्य का तीखा तंज

तेजस्वी की ताजपोशी की खबर फैलते ही लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक के बाद एक पोस्ट करके सनसनी मचा दी। रोहिणी ने बिना नाम लिए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि पार्टी की कमान अब ‘घुसपैठियों’ और ‘साजिशकर्ताओं’ के हाथों में है। एक पोस्ट में उन्होंने तेजस्वी को ‘कठपुतली शहजादा’ कहकर संबोधित किया और उनकी ताजपोशी पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि यह ‘ठकुरसुहाती करने वालों’ की जीत है।

रोहिणी ने आगे लिखा कि लालूवाद को खत्म करने की साजिश चल रही है और असली लालूवादी कार्यकर्ता हाशिए पर पहुंच गए हैं। उनकी पोस्ट में पार्टी की मौजूदा बदहाली, करीबियों के गिरोह और फासीवादी ताकतों का जिक्र था। यह हमला बैठक से ठीक पहले और बाद में आया, जिससे पार्टी के अंदरूनी मतभेद फिर से सामने आ गए।

यह कोई नई बात नहीं है। 2025 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी से दूरी बना ली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि तेजस्वी और उनके करीबियों ने उन्हें अपमानित किया और राजनीति से बाहर कर दिया। उस समय भी परिवार में खींचतान सार्वजनिक हो गई थी। अब तेजस्वी की इस बड़ी नियुक्ति पर रोहिणी का फिर से मुखर होना लालू परिवार की पुरानी कलह को याद दिला रहा है।

पार्टी और विपक्ष की प्रतिक्रिया

RJD के अंदर अधिकांश नेता तेजस्वी की नियुक्ति से खुश हैं। कई कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी के पुनर्जनन की शुरुआत बताया। हालांकि, रोहिणी के पोस्ट के बाद पार्टी में असहज माहौल है। कुछ नेताओं ने निजी तौर पर कहा कि परिवार के अंदरूनी विवाद को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए।

विपक्षी दलों, खासकर NDA ने इस मौके को लपक लिया। भाजपा और जदयू नेताओं ने रोहिणी के बयानों का हवाला देकर आरजेडी पर परिवारवाद और अंदरूनी कलह का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी परिवार में ही लोकप्रिय नहीं हैं, तो पार्टी कैसे मजबूत होगी।

राजनीतिक निहितार्थ

तेजस्वी यादव की यह नियुक्ति बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। तेजस्वी अब पार्टी के पूर्णकालिक चेहरे होंगे और आगामी लोकसभा या अन्य चुनावों में उनकी भूमिका और मजबूत होगी। पार्टी को उम्मीद है कि युवा नेतृत्व से MY (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक के साथ अन्य वर्गों को भी जोड़ा जा सकेगा।

दूसरी ओर, रोहिणी आचार्य का विरोध पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर रहा है। अगर यह कलह बढ़ी तो पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव को परिवार और पार्टी को एकजुट रखने के लिए बीच-बचाव करना पड़ेगा।

RJD में तेजस्वी यादव का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी के लिए नई शुरुआत है, लेकिन रोहिणी आचार्य के तीखे हमले ने इसे विवादास्पद बना दिया है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि लालू परिवार की राजनीति में व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध कितने जटिल हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि तेजस्वी इस नई जिम्मेदारी को कैसे संभालते हैं और पार्टी को एकजुट रख पाते हैं या नहीं। बिहार की सियासत में यह ‘तेजस्वी युग’ कितना सफल होता है, यह समय बताएगा।

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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