Non-veg ban on Republic Day in Koraput Distriict of OdishaNon-veg ban on Republic Day in Koraput Distriict of Odisha

24 जनवरी 2026, Odisha के कोरापुट में विवाद: ओडिशा के कोरापुट जिले में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर मांस, चिकन, मछली, अंडा और अन्य गैर-शाकाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट मनोज सत्यवान महाजन ने 23 जनवरी को जारी एक आधिकारिक पत्र में सभी तहसीलदारों, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (बीडीओ) और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें। आदेश में कहा गया है कि यह कदम 77वें गणतंत्र दिवस को “सम्मान और एकसमानता” के साथ मनाने के लिए उठाया गया है, तथा नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस दिन शाकाहारी भोजन अपनाएं। हालांकि, इस फैसले ने जिले में विवाद खड़ा कर दिया है। कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और खाद्य विकल्प पर अनावश्यक हस्तक्षेप बता रहे हैं, जबकि कुछ ने इसका समर्थन किया है।

आदेश की पृष्ठभूमि और विवरण

कलेक्टर के पत्र (लेटर नंबर 93, दिनांक 23 जनवरी 2026) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 26 जनवरी को पूरे जिले में मांस, चिकन, मछली, अंडा और अन्य नॉन-वेज आइटम्स की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यह निर्देश “प्रशासनिक दिशानिर्देशों” के तहत जारी किया गया है, ताकि राष्ट्रीय पर्व को एकसमान तरीके से मनाया जा सके। कोरापुट एक आदिवासी बहुल जिला है, जहां बड़ी आबादी गैर-शाकाहारी भोजन पर निर्भर है। जिले में सैकड़ों छोटे-बड़े मांस-मछली विक्रेता हैं, जिनकी दैनिक कमाई इस बिक्री पर टिकी है।

यह प्रतिबंध केवल एक दिन का है, लेकिन इसे लागू करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को आधिकारिक अधिसूचना जारी करने को कहा गया है। पशुपालन विभाग को भी इसमें सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर कार्यालय का तर्क है कि राष्ट्रीय दिवस पर ऐसा प्रतिबंध सम्मान का प्रतीक है और यह देश के अन्य हिस्सों में भी प्रचलित है।

विवाद क्यों भड़का?

आदेश जारी होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठने लगे। कोरापुट के निवासी बिद्युत खारा ने कहा, “यह प्रतिबंध मांस-मछली विक्रेताओं की आजीविका पर सीधा असर डालेगा। दैनिक बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान होगा। प्रशासन टाइमिंग रेगुलेट कर सकता था, लेकिन पूर्ण बैन क्यों?” कई लोगों ने इसे “खाद्य विकल्प पर थोपा गया प्रतिबंध” करार दिया और सवाल उठाया कि संविधान जिस व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, उसी के उत्सव पर यह पाबंदी क्यों?

कुछ आलोचकों ने इसे धार्मिक या सांस्कृतिक थोपने की कोशिश बताया। ओडिशा में अल्पसंख्यक समुदायों और आदिवासी समूहों में गैर-शाकाहारी भोजन आम है। सोशल मीडिया पर कमेंट्स में लोग लिख रहे हैं कि “गणतंत्र दिवस एकता का पर्व है, लेकिन नागरिकों के खाद्य विकल्प पर प्रतिबंध लगाना संविधान की भावना के खिलाफ है।” स्टॉक में रखे माल के बर्बाद होने और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की भी चिंता जताई जा रही है। कई ने पूछा कि इतना महत्वपूर्ण आदेश इतनी कम सूचना पर क्यों जारी किया गया?

समर्थन में तर्क

दूसरी ओर, कुछ लोगों और संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर ऐसा प्रतिबंध पहले से कई जगहों पर लागू होता है। उदाहरण के लिए, गांधी जयंती पर देश के कई हिस्सों में मांस बिक्री बंद रहती है। महाराष्ट्र के कुछ नगर निगमों ने स्वतंत्रता दिवस पर भी ऐसा किया था। समर्थकों का तर्क है कि एक दिन का प्रतिबंध राष्ट्रीय सम्मान और एकता का प्रतीक है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह अच्छा कदम है। कोरापुट जैसे संवेदनशील जिले में शांति और सम्मान बनाए रखने के लिए जरूरी है।”

देश में ऐसी प्रथा का इतिहास

भारत में राष्ट्रीय और धार्मिक पर्वों पर मांस बिक्री प्रतिबंध की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। 2025 में महाराष्ट्र के कई शहरों में स्वतंत्रता दिवस पर मांस बिक्री बंद करने पर बड़ा विवाद हुआ था, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी और आदित्य ठाकरे जैसे नेताओं ने विरोध किया था। इसी तरह, पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान गैर-शाकाहारी बिक्री पर स्थायी प्रतिबंध है। अयोध्या और पंजाब के पवित्र शहरों में भी ऐसे नियम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये प्रतिबंध अक्सर “सांस्कृतिक संवेदनशीलता” और “सार्वजनिक शांति” के नाम पर लगाए जाते हैं, लेकिन ये संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 19 और 21) से टकराते हैं।

विश्लेषण और भविष्य

यह विवाद एक बार फिर खाद्य स्वतंत्रता बनाम सांस्कृतिक/राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे को उजागर करता है। कोरापुट जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां मांस-मछली स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है, ऐसा प्रतिबंध संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन को चाहिए था कि व्यापारियों को पहले से सूचना देता और वैकल्पिक व्यवस्था सुझाता। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के बजाय विभाजन पैदा कर सकते हैं।

जिले में अब नजर इस पर है कि 26 जनवरी को यह आदेश कितनी सख्ती से लागू होता है और क्या कोई विरोध प्रदर्शन होता है। राज्य सरकार ने अभी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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