Meeting in Abu DhabiMeeting in Abu Dhabi

24 जनवरी 2026, Abu Dhabi में रूस-यूक्रेन-अमेरिका की पहली त्रिपक्षीय वार्ता: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में 23 जनवरी को रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच पहली त्रिपक्षीय वार्ता हुई। यह रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण (फरवरी 2022) के बाद तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों से आयोजित इस वार्ता में मुख्य रूप से पूर्वी यूक्रेन के डॉनबास क्षेत्र पर नियंत्रण जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। वार्ता के कुछ घंटों बाद ही रूस ने यूक्रेन के कीव और खारकीव शहरों पर नए हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और कई घायल हुए।

वार्ता की पृष्ठभूमि

यह त्रिपक्षीय वार्ता अमेरिकी प्रशासन की सक्रिय कूटनीति का नतीजा है। कुछ दिन पहले स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बैठक हुई थी। जेलेंस्की ने इसे “बेहद सकारात्मक” बताया और कहा कि यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर समझौता लगभग तैयार है। इसके बाद ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर मॉस्को पहुंचे, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लंबी मुलाकात की। रूस ने इस बैठक को “उपयोगी” करार दिया। इन द्विपक्षीय चर्चाओं के बाद अबू धाबी में त्रिपक्षीय वार्ता का आयोजन हुआ, जिसकी मेजबानी UAE ने की। UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया।

वार्ता दो दिनों (23-24 जनवरी) तक चलनी तय थी और इसे तकनीकी स्तर की बैठक बताया गया। इसमें राष्ट्राध्यक्ष शामिल नहीं थे, लेकिन उच्चस्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

प्रमुख प्रतिभागी

  • यूक्रेन प्रतिनिधिमंडल: रुस्तेम उमेरोव (राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव) के नेतृत्व में। इसमें किरिलो बुडानोव (राष्ट्रपति कार्यालय निदेशक), डेविड अराखामिया (नेता नेगोशिएटर) और दूसरे दिन जनरल एंड्री हनातोव (चीफ ऑफ जनरल स्टाफ) शामिल हुए।
  • रूस प्रतिनिधिमंडल: जनरल इगोर कोस्त्युकोव (GRU सैन्य खुफिया एजेंसी प्रमुख) के नेतृत्व में। आर्थिक मुद्दों पर अलग से किरिल दमित्रिएव (निवेश दूत) ने अमेरिकी प्रतिनिधि से बात की।
  • अमेरिका प्रतिनिधिमंडल: स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत) और जेरेड कुश्नर प्रमुख थे। अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

जेलेंस्की ने कहा कि उनकी टीम हर घंटे उन्हें अपडेट दे रही थी और उन्होंने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए थे।

चर्चा के मुख्य मुद्दे

वार्ता का केंद्र बिंदु क्षेत्रीय विवाद रहा, विशेष रूप से डॉनबास क्षेत्र। रूस की मांग है कि यूक्रेन डोनेट्स्क क्षेत्र का शेष 20-25% हिस्सा (लगभग 5,000 वर्ग किमी) छोड़ दे, जिस पर अभी यूक्रेन का नियंत्रण है। रूस ने 2022 में चार यूक्रेनी क्षेत्रों को अवैध रूप से अपने में मिला लिया था, लेकिन युद्धक्षेत्र में वह पूरा डोनेट्स्क कब्जा नहीं कर सका। अमेरिकी प्रस्ताव में डॉनबास को डिमिलिटराइज्ड और फ्री इकोनॉमिक जोन बनाने की बात है, बदले में यूक्रेन को मजबूत सुरक्षा गारंटी। जेलेंस्की ने कहा कि सुरक्षा गारंटी पर समझौता तैयार है, लेकिन क्षेत्रीय मुद्दा अनसुलझा है।

अलग से आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें रूस ने फ्रोजन रूसी एसेट्स का इस्तेमाल कब्जाए क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए करने का सुझाव दिया, जिसे जेलेंस्की ने “बकवास” करार दिया।

कोई समझौता नहीं, हमले जारी

अमेरिकी अधिकारियों ने वार्ता को “उत्पादक” बताया और कहा कि यह शनिवार को भी जारी रहेगी। लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। जेलेंस्की ने कहा, “रूस को यह युद्ध खत्म करने के लिए तैयार होना चाहिए, जो उसने खुद शुरू किया। अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।” क्रेमलिन ने क्षेत्रीय मुद्दों के हल न होने तक सैन्य अभियान जारी रखने की बात दोहराई।

वार्ता के ठीक बाद रूस ने यूक्रेन पर नए हमले किए। कीव में विस्फोट हुए, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और चार घायल हुए। खारकीव में मेटर्निटी अस्पताल और विस्थापितों के हॉस्टल को नुकसान पहुंचा, 11 लोग घायल हुए। इन हमलों से यूक्रेन की ऊर्जा संरचना को भारी क्षति हुई, जिससे लाखों लोग बिजली और हीटिंग से वंचित हैं। सर्दी में तापमान शून्य से नीचे होने से स्थिति मानवीय संकट की ओर बढ़ रही है।

विश्लेषण और भविष्य

यह वार्ता युद्ध समाप्ति की दिशा में एक कदम है, लेकिन उम्मीदें कम हैं। क्षेत्रीय मांगों पर दोनों पक्षों की जिद के कारण गतिरोध बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन का दबाव यूक्रेन पर शांति समझौते के लिए बढ़ रहा है, जबकि रूस युद्धक्षेत्र में रणनीतिक लाभ बनाए रखना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा गारंटी और आर्थिक पैकेज पर प्रगति हो सकती है, लेकिन डॉनबास मुद्दा बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

यूक्रेन के लिए यह वार्ता महत्वपूर्ण है क्योंकि वह मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहता है। रूस की ओर से हमलों का जारी रहना दर्शाता है कि वह बातचीत के साथ-साथ सैन्य दबाव भी बनाए रखना चाहता है। आने वाले दिनों में वार्ता के परिणाम पर दुनिया की नजर रहेगी।

Sources: अल जज़ीरा

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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