Bridge in KishanganjBridge in Kishanganj

23 जनवरी 2026 Kishanganj में सरकारी इंजीनियरों का अजब कारनामा: बिहार के किशनगंज जिले में सरकारी इंजीनियरों और ठेकेदारों का एक अनोखा कारनामा सामने आया है। जहां नदी या नाले पर पुलिया बननी थी, वहां के बजाय बीच खेत में पुलिया का निर्माण कर दिया गया। नदी या पानी का कोई नामोनिशान नहीं, फिर भी लाखों रुपये खर्च करके पुलिया खड़ी कर दी गई। इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अधिकारी (DM) ने घटना का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

घटना का विवरण: खेत में खड़ी पुलिया

यह मामला किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड क्षेत्र से सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर जब प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, तो सभी हैरान रह गए। पुलिया पूरी तरह तैयार है – सीमेंट, सरिया और मजबूत संरचना के साथ – लेकिन नीचे नदी या नाला नहीं, बल्कि किसान का हरा-भरा खेत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में कोई नदी या बड़ा नाला कभी था ही नहीं। पुलिया के दोनों सिरों पर सड़क भी नहीं जुड़ी हुई है, जिससे यह पूरी तरह बेकार साबित हो रही है।

अनुमान है कि इस पुलिया के निर्माण पर लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च हुई होगी। ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों ने डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में गलत लोकेशन दिखाकर काम पूरा कर लिया। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य कई महीनों से चल रहा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब पुलिया बन चुकी है, लेकिन इसका कोई उपयोग नहीं।

पृष्ठभूमि: बिहार में ऐसी घटनाएं नई नहीं

यह पहला मामला नहीं है जब बिहार में ऐसी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई हो। पिछले साल अररिया जिले में भी ठीक इसी तरह का कारनामा हुआ था, जहां खेत में पुल बना दिया गया था। उस मामले में भी जांच हुई और कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही गई। किशनगंज में यह घटना उसकी याद ताजा कर रही है। बिहार में ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत पुल-पुलिया निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन गुणवत्ता और लोकेशन की अनदेखी अक्सर सुर्खियां बनती है।

हाल के वर्षों में बिहार में कई पुल धंसने या गिरने की घटनाएं भी हुई हैं, जो निर्माण में अनियमितता को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ठेकेदारों और इंजीनियरों की मिलीभगत से ऐसे काम होते हैं, जिसमें सरकारी धन का दुरुपयोग होता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच के आदेश

जिला अधिकारी ने घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत संज्ञान लिया। DM ने संबंधित विभाग – ग्रामीण विकास या पथ निर्माण – को जांच सौंपी है। जांच में लोकेशन सर्वे, डीपीआर की वैधता, ठेकेदार की जिम्मेदारी और खर्च की डिटेल्स की पड़ताल होगी। DM ने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय SDM और इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही है।

ग्रामीणों ने DM को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि बेकार पुलिया को हटाकर असली जरूरत वाली जगह पर निर्माण कराया जाए।

स्थानीय लोगों और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

स्थानीय किसान और ग्रामीण गुस्से में हैं। उनका कहना है कि उनके खेत की फसल प्रभावित हो रही है और सरकारी पैसा बर्बाद हुआ है। एक किसान ने कहा, “नदी कहां है? पुलिया हमारे खेत में क्यों? यह पैसों की लूट है।”

विपक्षी दलों ने इस मामले को मुद्दा बनाया है। RJD और कांग्रेस नेताओं ने नीतीश सरकार पर हमला बोला कि विकास के नाम पर भ्रष्टाचार चरम पर है। एक स्थानीय नेता ने कहा, “बिहार में पुल या तो गिर जाते हैं या गलत जगह बन जाते हैं। सरकार जवाब दे।”

NDA खेमे के नेताओं ने जांच का स्वागत किया और कहा कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।

प्रभाव: सरकारी योजनाओं पर सवाल

यह घटना ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। बिहार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य की योजनाओं के तहत हजारों पुल-पुलिया बन रहे हैं, लेकिन ऐसी लापरवाही से जनता का भरोसा टूटता है। इससे न केवल धन की बर्बादी होती है, बल्कि जरूरतमंद इलाकों में विकास रुकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि निर्माण कार्यों में जीआईएस मैपिंग और स्थानीय पंचायतों की भागीदारी अनिवार्य की जाए।

निष्कर्ष: जवाबदेही जरूरी

किशनगंज की यह घटना बिहार में प्रशासनिक सुधार की जरूरत को रेखांकित करती है। खेत में बनी पुलिया न केवल हास्यास्पद है, बल्कि सरकारी सिस्टम की कमियों को उजागर करती है। जांच से उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। ऐसे मामलों से सबक लेकर भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Sources: ज़ी न्यूज़

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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