23 जनवरी 2026, अमेरिका का WHO से अलगाव: अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपनी सदस्यता आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने इसकी घोषणा करते हुए जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय से अमेरिकी झंडा हटा लिया गया। यह कदम वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि अमेरिका WHO का सबसे बड़ा दानदाता था। इस अलगाव से न केवल संगठन की फंडिंग पर असर पड़ेगा, बल्कि महामारी प्रतिक्रिया, वैक्सीन वितरण और वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों पर भी गहरा प्रभाव होगा।
पृष्ठभूमि: पुराना विवाद फिर से जीवित
ट्रंप प्रशासन का यह फैसला नया नहीं है। अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई 2020 में WHO से अलग होने की घोषणा की थी। मुख्य आरोप थे कि संगठन ने कोविड-19 महामारी के शुरुआती चरण में चीन के प्रभाव में आकर गलतियां कीं और पारदर्शिता नहीं दिखाई। हालांकि, जो बाइडेन प्रशासन ने 2021 में सत्ता संभालते ही इस फैसले को रिवर्स कर दिया और अमेरिका को फिर से WHO में शामिल किया।
दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को शपथ लेते ही कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी कर प्रक्रिया फिर शुरू की। WHO के नियमों के अनुसार, सदस्यता समाप्त करने के लिए एक साल की नोटिस पीरियड जरूरी है। ठीक एक साल बाद, 22-23 जनवरी 2026 को यह प्रक्रिया पूरी हुई। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) और राज्य विभाग ने संयुक्त बयान में कहा कि सभी फंडिंग रोक दी गई है और सदस्यता समाप्त हो गई है।
घोषणा के विवरण और प्रतीकात्मक कदम
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय से अमेरिकी झंडा उतार लिया गया। यह प्रतीकात्मक कदम अलगाव की औपचारिकता को दर्शाता है। HHS के फैक्ट शीट में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने WHO को “अमेरिकी हितों के विपरीत” बताया और इसे “चीन-प्रभावित” संगठन करार दिया। withdrawal के साथ ही अमेरिका ने WHO को कोई बकाया भुगतान नहीं करने का फैसला किया, जबकि WHO का दावा है कि अमेरिका पर 2024-2025 के लिए करीब 260 मिलियन डॉलर बकाया है।
ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में WHO से दोबारा जुड़ने की कोई योजना नहीं है, कम से कम वर्तमान महानिदेशक टेड्रोस एडहनॉम घेब्रेयेसस के कार्यकाल (जुलाई 2027 तक) में तो नहीं।
मुख्य कारण: सुधारों की कमी और संप्रभुता
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, WHO ने कोविड-19 महामारी के दौरान गंभीर गलतियां कीं – जैसे शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज करना और चीन की जानकारी पर अंधा विश्वास। प्रशासन का कहना है कि संगठन ने मांगे गए सुधार नहीं किए, जैसे पारदर्शिता बढ़ाना, राजनीतिक प्रभाव कम करना और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना।
इसके अलावा, यह फैसला ट्रंप की व्यापक “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है। हाल ही में प्रशासन ने 66 अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी अलग होने की घोषणा की, जिनमें जलवायु, मानवाधिकार और UN से जुड़े कई निकाय शामिल हैं। उद्देश्य करदाताओं के पैसे बचाना और अमेरिकी संप्रभुता को मजबूत करना बताया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: चिंता और आलोचना
WHO महानिदेशक टेड्रोस ने इस फैसले पर “गहरा अफसोस” जताया और कहा कि उम्मीद है अमेरिका पुनर्विचार करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वैश्विक स्वास्थ्य प्रयास कमजोर होंगे। कई विशेषज्ञों ने इसे “वैज्ञानिक रूप से लापरवाह” बताया। BBC, CNN और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया ने रिपोर्ट किया कि यह कदम फ्लू वैक्सीन स्ट्रेन शेयरिंग, महामारी निगरानी और विकासशील देशों की मदद पर बुरा असर डालेगा।
यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और कनाडा ने चिंता जताई, जबकि चीन ने मौन साधा। भारत जैसे देशों ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक वैक्सीन कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य पर प्रभाव: चुनौतियां बढ़ीं
अमेरिका WHO का सबसे बड़ा योगदानकर्ता था – सालाना सैकड़ों मिलियन डॉलर। इस अलगाव से संगठन का बजट 15-20% कम हो सकता है। मुख्य प्रभाव:
- महामारी प्रतिक्रिया: फ्लू, इबोला या नई महामारियों में अमेरिकी डेटा और विशेषज्ञता की कमी।
- वैक्सीन और दवाएं: COVAX जैसे कार्यक्रम कमजोर, विकासशील देशों तक पहुंच मुश्किल।
- वैकल्पिक व्यवस्था: ट्रंप प्रशासन ने कहा कि अमेरिका सीधे द्विपक्षीय समझौतों से काम करेगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे समन्वय बिगड़ेगा।
भारत के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि हम WHO के कई कार्यक्रमों (पोलियो उन्मूलन, टीकाकरण) पर निर्भर हैं।
निष्कर्ष: नई वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की शुरुआत?
ट्रंप प्रशासन का यह फैसला वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नया आकार दे सकता है। जहां कुछ इसे अमेरिकी संप्रभुता की जीत मान रहे हैं, वहीं अधिकांश इसे वैश्विक एकता के लिए झटका बता रहे हैं। आने वाले महीनों में देखना होगा कि WHO कैसे अनुकूलन करता है और अमेरिका अपनी “स्वतंत्र” स्वास्थ्य नीति से क्या हासिल करता है। यह बदलाव निश्चित रूप से इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा।
Sources: रॉयटर्स