22 जनवरी 2026, Bihar का मखाना पहुंचा वैश्विक बाजार: बिहार के किसानों ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली 2 मीट्रिक टन खेप समुद्री मार्ग से दुबई के लिए रवाना हो गई है। पूर्णिया जिले से 21 जनवरी को यह खेप भेजी गई, जो बिहार के ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य के कृषि मंत्री ने इसे “किसानों की मेहनत और सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम” करार दिया है। इस कदम से मखाना अब स्थानीय उत्पाद से वैश्विक सुपरफूड बनने की राह पर है।
मखाना: बिहार की धरोहर और पौष्टिक सुपरफूड मखाना या फॉक्स नट्स बिहार की सांस्कृतिक और कृषि पहचान का अभिन्न हिस्सा है। मिथिला क्षेत्र के दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और आसपास के जिलों के तालाबों में इसकी खेती होती है। बिहार विश्व का 90 प्रतिशत से अधिक मखाना उत्पादन करता है। कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह सुपरफूड स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 2022 में मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से इसकी ब्रांड वैल्यू और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी है।
पहले मखाना का निर्यात हवाई मार्ग से सीमित मात्रा में होता था, लेकिन समुद्री मार्ग का उपयोग पहली बार किया गया है। समुद्री मार्ग से लागत कम और बड़ी मात्रा में निर्यात संभव होने से यह कदम क्रांतिकारी साबित होगा। यह निर्यात केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय, एपीडा और बिहार सरकार के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ है।
खेप की यात्रा और तैयारी पूर्णिया से रवाना हुई 2 टन खेप अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरी है। मखाना को विशेष पैकेजिंग में तैयार किया गया, जिसमें साफ-सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के सख्त नियमों का पालन हुआ। खेप पहले सड़क या रेल मार्ग से बंदरगाह तक पहुंचेगी, फिर समुद्री जहाज से दुबई। एपीडा ने निर्यातकों को प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन और लॉजिस्टिक्स में सहायता प्रदान की। पूर्णिया के किसानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और सहकारी समितियों ने मिलकर यह उपलब्धि हासिल की।
किसानों और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव यह निर्यात बिहार के लाखों छोटे-सीमांत किसानों, विशेषकर महिलाओं के लिए बड़ी राहत और अवसर लेकर आया है। मखाना की खेती तालाबों में कम पानी वाली फसल होने से जलवायु-अनुकूल भी है। पहले स्थानीय बाजार में कम दाम मिलते थे, लेकिन जीआई टैग और निर्यात से कीमतें दोगुनी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किसानों की आय में 30-50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। मध्य पूर्व के बाजारों में, विशेषकर दुबई में, स्वास्थ्य लाभों के कारण मखाना की मांग तेजी से बढ़ रही है। वहां इसे स्नैक्स, सलाद और हेल्थ फूड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
प्रतिक्रियाएं और सरकारी प्रयास कृषि मंत्री ने कहा, “यह बिहार के किसानों की जीत है। समुद्री मार्ग से निर्यात से लागत कम होगी और मात्रा बढ़ेगी। हम मखाना बोर्ड गठन की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं, जो उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।” एपीडा अधिकारियों ने इसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की मिसाल बताया। पूर्णिया के एक किसान ने खुशी जताते हुए कहा, “अब हमारा मखाना दुबई के बाजारों में बिकेगा। इससे हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बेहतर हो सकेगी।”
चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं सफलता के बावजूद कुछ चुनौतियां बाकी हैं। प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी, कोल्ड स्टोरेज और क्वालिटी कंट्रोल में और सुधार जरूरी है। सरकार मखाना क्लस्टर विकसित कर रही है और निर्यातकों को सब्सिडी व ट्रेनिंग दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही तो 2026-27 में मखाना निर्यात कई गुना बढ़ सकता है। अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में भी मखाना की अच्छी मांग है। यह कदम बिहार को कृषि निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
यह उपलब्धि बिहार के किसानों की लगन, सरकारी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है। मिथिला मखाना अब वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
Sources: आज तक