Trump at annual meeting davos 2026Trump at annual meeting davos 2026

22 जनवरी 2026, Trump का बड़ा यू-टर्न: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद में अचानक पीछे हटते हुए यूरोपीय सहयोगियों पर लगाने वाली टैरिफ की धमकियां वापस ले लीं। विश्व आर्थिक मंच (डावोस 2026) में NATO महासचिव मार्क रुटे से बातचीत के बाद ट्रंप ने “ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र के लिए भविष्य की डील का फ्रेमवर्क” तैयार होने की घोषणा की। इस घोषणा से वैश्विक शेयर बाजारों में राहत की लहर दौड़ी और यूरोपीय तथा एशियाई बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई।

विवाद की पृष्ठभूमि ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर महत्वाकांक्षा नई नहीं है। 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड को “खरीदने” की इच्छा जताई थी, जिसे डेनमार्क ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। 2026 में दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने इस मुद्दे को फिर उठाया। उनका तर्क था कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों से अमेरिकी सुरक्षा को खतरा है, और ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

17 जनवरी को ट्रंप ने डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे आठ NATO सहयोगी देशों पर 10% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। यह शुल्क 1 फरवरी से लागू होने वाला था और जून में 25% तक बढ़ाया जाना था। ट्रंप ने कहा था कि जब तक ग्रीनलैंड की “पूर्ण और कुल खरीद” का सौदा नहीं हो जाता, ये शुल्क जारी रहेंगे। इस घोषणा से यूरोपीय नेता आक्रोशित हो गए और NATO की एकता पर सवाल उठने लगे।

डावोस में निर्णायक मोड़ डावोस विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप का भाषण और NATO महासचिव मार्क रुटे से मुलाकात ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया कि NATO के साथ “ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र के लिए भविष्य की डील का फ्रेमवर्क” तैयार हो गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस समझ के आधार पर फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ अब नहीं लगाए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने बल प्रयोग की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया।

रुटे ने बाद में पुष्टि की कि बातचीत सकारात्मक रही, हालांकि ग्रीनलैंड की संप्रभुता का मुद्दा चर्चा में नहीं आया। NATO प्रवक्ता ने कहा कि आगे की वार्ताएं डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच होंगी, जिनका उद्देश्य रूस और चीन को आर्कटिक में आर्थिक या सैन्य पैठ बनाने से रोकना है।

शेयर बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव ट्रंप की धमकी वापसी की खबर से वैश्विक शेयर बाजारों में जबरदस्त राहत देखी गई। मंगलवार को टैरिफ धमकी के कारण अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन बुधवार को ट्रंप की घोषणा के बाद तेज रिकवरी हुई। S&P 500 में 1.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि डॉव जोन्स और नैस्डैक में भी मजबूत उछाल आया। यूरोपीय बाजारों (STOXX 600) और एशियाई बाजारों में भी 1-2% की तेजी रही।

विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ युद्ध टलने से व्यापार अनिश्चितता कम हुई, जिससे निवेशकों का विश्वास लौटा। गोल्ड और बॉन्ड्स में पहले आई तेजी भी थमी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं यूरोपीय नेता सतर्क लेकिन राहत महसूस कर रहे हैं। डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर जोर दिया, जबकि जर्मनी के वित्त मंत्री ने कहा कि “कागज पर क्या लिखा है, उसे देखना होगा।” रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इसे “अमेरिका-यूरोप का आंतरिक मामला” बताकर दूर रहने का संकेत दिया।

आगे की राह फ्रेमवर्क की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है। संभावना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैन्य आधार या खनिज अधिकार मिल सकते हैं, बिना पूर्ण स्वामित्व के। यह समझौता आर्कटिक सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, लेकिन NATO की एकता और अमेरिका-यूरोप संबंधों पर इसका लंबा असर पड़ेगा।

ट्रंप का यह यू-टर्न उनकी “आर्ट ऑफ द डील” शैली का उदाहरण है – पहले दबाव बनाओ, फिर समझौता। वैश्विक बाजारों के लिए यह राहत की खबर है, लेकिन आर्कटिक क्षेत्र की भू-राजनीति अभी शांत नहीं हुई है।

Sources: अल जज़ीरा

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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