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21 जनवरी 2026, भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, Sensex 271 अंक लुढ़का: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 271 अंक की कमजोरी के साथ 81,910 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 75 अंक फिसलकर 25,158 पर बंद हुआ। तीन सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक और निफ्टी 500 अंक से ज्यादा टूट चुका है, जिससे निवेशकों की पूंजी से लगभग 14-18 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार की यह कमजोरी वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की रिकॉर्ड गिरावट से प्रभावित रही।

कारोबार का विवरण: शुरुआती गिरावट से अंत तक दबाव

बाजार की शुरुआत कमजोर वैश्विक संकेतों के साथ हुई। सेंसेक्स सुबह करीब 700 अंक तक गिर गया था, लेकिन दोपहर में कुछ रिकवरी आई और यह दिन के निचले स्तर से 1,200 अंक ऊपर चढ़ा। फिर भी अंत में बिकवाली हावी रही और इंडेक्स लाल निशान में बंद हुआ। निफ्टी भी 25,000 के नीचे फिसला। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1-2% की गिरावट रही। कुल मिलाकर बाजार की चौड़ाई नकारात्मक रही – एडवांस-डिक्लाइन रेशियो कमजोर रहा।

सेक्टरवार प्रदर्शन: बैंकिंग पर भारी दबाव, मेटल्स चमके

सेक्टोरल इंडेक्स में बैंकिंग, फाइनेंशियल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। ICICI बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक बैंक जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स 2-3% तक गिरे। आईटी सेक्टर में भी दबाव रहा, लेकिन मेटल सेक्टर अपवाद रहा – यहां तेजी देखी गई क्योंकि ग्लोबल कमोडिटी प्राइस में उछाल आया। टॉप गेनर्स में मेटल कंपनियां रहीं, जबकि लूजर्स में बैंक और ऑटो स्टॉक्स प्रमुख थे।

गिरावट के प्रमुख कारण

  1. ट्रंप की टैरिफ धमकियां: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डावोस में यूरोपीय उत्पादों पर 200% तक टैरिफ की धमकी से वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा। यूरोपीय शेयर गिरे, एशियाई मार्केट्स कमजोर खुले और इसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
  2. FII की लगातार बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हजारों करोड़ की बिक्री की। पिछले तीन सत्रों में FII आउटफ्लो बड़ा कारण रहा। वहीं घरेलू संस्थानों (DII) ने खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा दिया।
  3. रुपये की रिकॉर्ड गिरावट: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 91.69 पर बंद हुआ। इससे आयात महंगा होने और इन्फ्लो पर दबाव की आशंका बढ़ी।
  4. भू-राजनीतिक तनाव: ग्रीनलैंड अधिग्रहण विवाद और अन्य वैश्विक तनाव से निवेशक सतर्क हो गए। सेफ हेवन एसेट्स जैसे गोल्ड में तेजी आई।
  5. तकनीकी दबाव: निफ्टी 25,000 के महत्वपूर्ण सपोर्ट से नीचे फिसला, जिससे और बिकवाली ट्रिगर हुई।

निवेशकों की पूंजी पर असर

तीन दिनों में बाजार पूंजीकरण से करीब 15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर निचले स्तर पर आ गया। रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े फंड्स तक सभी प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह करेक्शन लंबे समय से चले आ रहे बुल रन के बाद स्वाभाविक है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता इसे गहरा रही है।

विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान

मार्केट एनालिस्टों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव बना रहेगा। ट्रंप की नीतियों और फेडरल रिजर्व के रुख पर नजर रहेगी। कुछ ब्रोकरेज ने सलाह दी है कि क्वालिटी स्टॉक्स में डिप पर खरीदारी का मौका है, खासकर मेटल्स और डिफेंसिव सेक्टर्स में। निफ्टी का अगला सपोर्ट 24,800-25,000 के आसपास है। अगर वैश्विक संकेत सुधरे तो रिकवरी संभव है, अन्यथा और गिरावट आ सकती है। लंबे निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए।

भारतीय शेयर बाजार वैश्विक अनिश्चितता की चपेट में है। ट्रंप की टैरिफ धमकियां और FII बिकवाली मुख्य ट्रिगर हैं। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है और कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीजन में कुछ पॉजिटिव सरप्राइज आ सकते हैं। निवेशकों को सतर्क रहते हुए मौके तलाशने चाहिए। बाजार की यह गिरावट लंबे बुल रन के बाद करेक्शन का हिस्सा लग रही है, लेकिन वैश्विक घटनाएं इसे और लंबा खींच सकती हैं।

Sources: इकनोमिक टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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