Rajasthan CM Bhajan Lal SharmaRajasthan CM Bhajan Lal Sharma

21 जनवरी 2026, Rajasthan में ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ को मंजूरी: राजस्थान सरकार ने आज बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘द राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमोवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन्स फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम द प्रेमिसेस इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी गई। यह बिल गुजरात के विवादित ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसके तहत कुछ इलाकों को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करके वहां संपत्ति के लेन-देन पर सख्त नियंत्रण लगाया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सामुदायिक सद्भाव और जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, जबकि विपक्ष ने इसे ‘साम्प्रदायिक’ और ‘भेदभावपूर्ण’ करार देते हुए तीखा विरोध जताया है।

बिल के मुख्य प्रावधान: क्या बदलेगा?

यह बिल आगामी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके पारित होने के बाद राज्य सरकार को अधिकार मिलेगा कि वह किसी भी क्षेत्र को ‘अशांत’ या ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित कर सके। ऐसे इलाकों में अचल संपत्ति (जमीन, मकान आदि) की बिक्री, खरीद, गिफ्ट, एक्सचेंज या लीज पर बिना जिला कलेक्टर (DM) की पूर्व अनुमति के कोई सौदा नहीं हो सकेगा। अनुमति के लिए विक्रेता और खरीदार को आवेदन करना होगा, जिसमें विक्रेता को शपथ-पत्र देना होगा कि सौदा स्वेच्छा से और उचित बाजार मूल्य पर हुआ है।

सरकार का तर्क है कि कुछ इलाकों में हिंसा, दंगे, भीड़ उन्माद या ‘अनुचित क्लस्टरिंग’ (एक समुदाय का असंतुलित जमावड़ा) के कारण जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा हो रहा है, जो सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालता है। ऐसे क्षेत्रों में संपत्ति के जबरन या डिस्ट्रेस सेल को रोकने के लिए यह कानून जरूरी है। कानून मंत्री ने कहा कि यह स्थायी निवासियों और किरायेदारों के अधिकारों की रक्षा करेगा तथा सामाजिक संरचना को मजबूत बनाएगा।

गुजरात मॉडल: मूल और विवाद

यह बिल पूरी तरह गुजरात के ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ (1991) पर आधारित है, जिसे 2019-2020 में संशोधित किया गया था। गुजरात में यह कानून दंगों के बाद डिस्ट्रेस सेल रोकने के नाम पर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में इसे ‘पोलराइजेशन’ या ‘इम्प्रॉपर क्लस्टरिंग’ रोकने के लिए विस्तार दिया गया। वहां कलेक्टर को अधिकार है कि वह किसी भी क्षेत्र को disturbed घोषित कर सके, भले ही वहां पहले दंगे न हुए हों। आलोचकों का कहना है कि गुजरात में यह कानून अल्पसंख्यक समुदायों (खासकर मुस्लिमों) के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है, जिससे गेटोइजेशन बढ़ रहा है और संपत्ति खरीदने की स्वतंत्रता छिन रही है। गुजरात हाई कोर्ट ने 2021 में कुछ संशोधनों पर स्टे लगा दिया था, लेकिन कानून अभी भी लागू है।

राजस्थान में यह कानून पहले जयपुर से शुरू होने की संभावना है, फिर अन्य जिलों में विस्तार किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह साम्प्रदायिक सौहार्द और पारदर्शिता लाएगा।

विपक्ष का तीखा विरोध: ‘साम्प्रदायिक और असंवैधानिक’

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और अन्य सेक्युलर पार्टियों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति’ करार दिया और कहा कि यह संविधान के मौलिक अधिकारों (संपत्ति का अधिकार, समानता) का उल्लंघन है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “यह कानून एक समुदाय को निशाना बनाकर गेटो बनाने का औजार बनेगा। गुजरात में इसका दुरुपयोग हो रहा है, राजस्थान में भी यही होगा।” विपक्ष ने चेतावनी दी कि विधानसभा में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

सिविल सोसाइटी और मानवाधिकार संगठनों ने भी आशंका जताई है कि यह कानून संपत्ति बाजार में भेदभाव बढ़ाएगा और अल्पसंख्यकों को प्रभावित इलाकों में बसने से रोकेगा। कुछ ने इसे ‘लैंड जिहाद’ के नाम पर हिंदू वोटों को मजबूत करने की कोशिश बताया।

संभावित प्रभाव: समाज और अर्थव्यवस्था पर

यह कानून लागू होने से राजस्थान के रियल एस्टेट मार्केट पर गहरा असर पड़ेगा। disturbed क्षेत्रों में प्रॉपर्टी सौदे धीमे हो जाएंगे, क्योंकि कलेक्टर की अनुमति प्रक्रिया लंबी हो सकती है। निवेशक सतर्क हो सकते हैं। सामाजिक स्तर पर यह ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है या रोक सकता है – यह बहस का विषय है। सरकार का मानना है कि इससे दंगों और जबरन कब्जे जैसी घटनाएं रुकेंगी।

राजस्थान में पहले से सांप्रदायिक तनाव के कुछ इतिहास वाले इलाके हैं, जहां यह कानून सबसे पहले लागू हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सफल क्रियान्वयन पारदर्शी और निष्पक्ष जांच पर निर्भर करेगा।

राजस्थान कैबिनेट का यह फैसला राज्य की राजनीति को गरमा सकता है। एक तरफ सरकार इसे सामाजिक सद्भाव का कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे विभाजनकारी नीति। विधानसभा सत्र में इस बिल पर तीखी बहस तय है। अगर यह कानून बन जाता है, तो राजस्थान गुजरात के बाद दूसरा बड़ा राज्य होगा जहां ऐसा सख्त प्रावधान लागू होगा। आने वाले दिन बताएंगे कि यह सद्भाव बढ़ाता है या तनाव।

Sources: इंडियन एक्सप्रेस,

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *