21 जनवरी 2026, Japan के पूर्व पीएम शिंजो आबे के हत्यारे को उम्रकैद की सजा: जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे शिंजो आबे की सनसनीखेज हत्या के मामले में नारा जिला अदालत ने आज बड़ा फैसला सुनाया। आरोपी तेत्सुया यामागामी (45) को हत्या और बंदूक कानून उल्लंघन सहित कई आरोपों में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह सजा अभियोजन पक्ष की मांग के अनुरूप है, जबकि बचाव पक्ष ने धार्मिक शोषण का हवाला देकर कम सजा की अपील की थी।
शिंजो आबे: जापान के सबसे प्रभावशाली नेता शिंजो आबे जापान के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 2006-2007 और फिर 2012 से 2020 तक देश का नेतृत्व किया। उनकी ‘अबेनॉमिक्स’ नीतियों ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की, जबकि विदेश नीति में अमेरिका के साथ गठबंधन और Indo-Pacific रणनीति को बढ़ावा दिया। स्वास्थ्य कारणों से 2020 में इस्तीफा देने के बाद भी वे लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में प्रभावशाली बने हुए थे।
8 जुलाई 2022: वह काला दिन
8 जुलाई 2022 को नारा शहर के यामातो-सैदाइजी रेलवे स्टेशन के पास आबे चुनाव प्रचार कर रहे थे। अपराह्न करीब 11:30 बजे तेत्सुया यामागामी ने पीछे से घर में बने हथियार से दो गोलियां चलाईं। पहली गोली चूकी, लेकिन दूसरी ने आबे की गर्दन और छाती को भेद दिया। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। यह हमला जापान जैसे देश में चौंकाने वाला था, जहां बंदूक अपराध लगभग न के बराबर हैं।
हमलावर यामागामी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में पता चला कि उसने घर पर धातु की पाइपों, डक्ट टेप और बारूद से हथियार बनाया था।
आरोपी का मोटिव: यूनिफिकेशन चर्च से पुरानी दुश्मनी
यामागामी ने अदालत में कबूल किया कि उसका निशाना आबे इसलिए थे क्योंकि वे यूनिफिकेशन चर्च (जिसे मूनीज भी कहा जाता है) से जुड़े थे। यह दक्षिण कोरियाई मूल का विवादास्पद धार्मिक संगठन है। यामागामी की मां ने चर्च को करोड़ों येन दान कर दिए थे, जिससे परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया। यामागामी का मानना था कि आबे इस चर्च के सबसे बड़े राजनीतिक समर्थक थे। उसने पहले चर्च के प्रमुख को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन असफल रहने पर आबे को चुना।
मुकदमा और सजा का आधार
मुकदमा अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ। यामागामी ने सभी आरोप कबूल कर लिए। अभियोजन पक्ष ने इसे “युद्धोत्तर जापान के इतिहास में अभूतपूर्व” अपराध बताया और उम्रकैद की मांग की। बचाव पक्ष ने दावा किया कि यामागामी खुद “धार्मिक शोषण” का शिकार था और अधिकतम 20 साल की सजा होनी चाहिए। अदालत ने अभियोजन के पक्ष को मजबूत माना और उम्रकैद सुनाई। जापान में उम्रकैद का मतलब आमतौर पर पैरोल की संभावना के साथ आजीवन कारावास होता है, लेकिन कई कैदी जेल में ही मर जाते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस हत्या ने जापान की राजनीति को हिला दिया। जांच में पता चला कि LDP के आधे से ज्यादा सांसदों के यूनिफिकेशन चर्च से संबंध थे। इससे पार्टी की लोकप्रियता घटी और कई नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा। पर नए कानून बने, जिनमें दान की निगरानी बढ़ाई गई। जापान में बंदूक नियंत्रण पहले से सख्त है, लेकिन घरेलू हथियारों पर नई बहस छिड़ गई। नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई।
जनता की राय बंटी हुई है। कुछ लोग यामागामी को चर्च का शिकार मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक हिंसा का घिनौना उदाहरण बताते हैं। अदालत के बाहर सैकड़ों लोग फैसले के लिए इकट्ठा हुए।
शिंजो आबे की हत्या ने जापान को न केवल एक प्रमुख नेता से वंचित किया, बल्कि धार्मिक संगठनों और राजनीति के गठजोड़ पर गंभीर सवाल उठाए। आज की सजा से इस मामले का एक अध्याय समाप्त हुआ, लेकिन इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक रहेंगे। जापान अब और सुरक्षित, पारदर्शी राजनीतिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
Sources: रॉयटर्स