20 जनवरी 2026, India-Bangladesh राजनयिक तनाव बढ़ा: भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में हाल के महीनों में काफी तनाव देखने को मिला है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला लिया, जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों में अपनाई गई नीति की श्रेणी में आता है। हालांकि यह कदम मुख्य रूप से 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उठाया गया था, लेकिन 2025-2026 में जारी तनाव ने इसे और प्रासंगिक बना दिया है। बांग्लादेश सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने संबंधों को नया मोड़ दिया है।
घटना का विवरण और भारत का कदम
2024 अगस्त में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत ने ढाका स्थित हाई कमीशन और अन्य कांसुलेट्स से गैर-जरूरी स्टाफ तथा उनके परिवारों को वापस बुला लिया था। यह कदम सुरक्षा चिंताओं के कारण उठाया गया, क्योंकि प्रदर्शनों ने सांप्रदायिक रंग ले लिया था और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमले की खबरें आईं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सभी जरूरी राजनयिक बांग्लादेश में बने रहे, लेकिन परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। यह नीति उन देशों के लिए अपनाई जाती है जहां सुरक्षा स्थिति गंभीर मानी जाती है, जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान।
2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में यह तनाव और बढ़ा। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के तहत अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं जारी रहीं, जिस पर भारत ने बार-बार चिंता जताई। दिसंबर 2025 में भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को समन कर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। जवाब में बांग्लादेश ने भारत में अपने तीन प्रमुख मिशन्स (नई दिल्ली सहित) की वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दीं, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए।
बांग्लादेश सरकार का पक्ष
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारतीय कदम को सामान्य बताया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच चल रही प्रक्रियाओं का हिस्सा है। ढाका ने भारत पर आरोप लगाया कि भारतीय क्षेत्र से कुछ तत्व बांग्लादेश में अस्थिरता फैला रहे हैं। दिसंबर 2025 में बांग्लादेश ने अपने भारत स्थित हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्लाह को परामर्श के लिए वापस बुलाया। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने इसे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा बताया, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह अल्पसंख्यक सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर भारत की आलोचना का जवाब था।
बांग्लादेश ने भारत में अपने मिशन्स पर सुरक्षा चिंताएं जताते हुए वीजा सेवाएं रोकीं, जिससे व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं पर असर पड़ा। ढाका का कहना है कि भारत को अपनी सीमा से अवैध घुसपैठ रोकनी चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और जारी तनाव
शेख हसीना की सरकार के समय भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत थे—व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग बढ़ा। लेकिन 2024 में छात्र आंदोलन से सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) ने भारत के साथ दूरी बनाई। जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों का प्रभाव बढ़ा, जिसे भारत संदेह से देखता है। अल्पसंख्यकों पर हमले, शेख हसीना की भारत में शरण और सीमा विवादों ने तनाव बढ़ाया।
2025 में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को समन किया। भारत ने हिंदू, ईसाई और बौद्ध अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर दिया, जबकि बांग्लादेश ने भारत पर अलगाववादी समूहों को समर्थन का आरोप लगाया।
प्रभाव और आगे की राह
यह तनाव दोनों देशों के लिए नुकसानदेह है। बांग्लादेश भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, और भारत की पूर्वोत्तर क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बांग्लादेश से होकर गुजरती है। वीजा प्रतिबंधों से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं—चिकित्सा, शिक्षा और व्यापार यात्राएं रुकीं। क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ा, क्योंकि सीमा पर तस्करी और उग्रवाद के खतरे बढ़े।
विश्लेषक मानते हैं कि दोनों देशों को बातचीत से समाधान निकालना चाहिए। भारत ने हमेशा पड़ोसी पहले नीति पर जोर दिया, लेकिन अल्पसंख्यक सुरक्षा और स्थिरता जरूरी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वह लोकतंत्र बहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करे।
आने वाले दिनों में उच्च स्तरीय बैठकें संभव हैं, लेकिन फिलहाल तनाव के संकेत बरकरार हैं। दोनों देशों के लिए संयम और संवाद ही आगे की राह है।
Sources: बीबीसी