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19 जनवरी 2026, ट्रंप की गाजा शांति योजना, भारत को ‘Board of Peace’ में शामिल होने का न्योता – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद की शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण और स्थायी शांति के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। यह न्योता ट्रंप की महत्वाकांक्षी 20-पॉइंट गाजा शांति योजना का दूसरा चरण है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नवंबर 2025 में प्रस्ताव 2803 के माध्यम से समर्थन दिया था। भारत सहित करीब 60 देशों को इस बोर्ड में आमंत्रित किया गया है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इसे ‘महत्वपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि भारत हमेशा शांति प्रयासों का समर्थन करता रहा है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है?

ट्रंप ने 15 जनवरी 2026 को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की औपचारिक घोषणा की। यह एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन होगा, जो शुरू में गाजा के पोस्ट-वार गवर्नेंस, हमास के निरस्त्रीकरण, पुनर्निर्माण और आर्थिक निवेश पर फोकस करेगा। बोर्ड का उद्देश्य गाजा को संघर्ष से शांति और समृद्धि की ओर ले जाना है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थायी सदस्यता के लिए देशों से 1 बिलियन डॉलर का योगदान मांगा जा रहा है, जबकि गैर-स्थायी सदस्यता मुफ्त होगी। बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवनभर करेंगे, और इसमें टोनी ब्लेयर, मार्को रुबियो जैसे वैश्विक नेता शामिल हैं।

बोर्ड के तहत एक अलग ‘गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ भी बनेगा, जिसमें तुर्की, कतर, मिस्र, इजरायल और यूएई के प्रतिनिधि होंगे। यह बोर्ड गाजा में दैनिक शासन और मानवीय सहायता की निगरानी करेगा। ट्रंप ने इसे ‘सबसे प्रभावशाली और परिणामकारी बोर्ड’ करार दिया है, जो भविष्य में अन्य वैश्विक संघर्षों को भी सुलझा सकता है।

भारत को न्योता: ट्रंप का पत्र और राजदूत की पोस्ट

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर ट्रंप का पत्र साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘फाउंडिंग मेंबर’ के रूप में आमंत्रित किया गया है। पत्र में ट्रंप ने लिखा, “यह समय है सपनों को हकीकत में बदलने का। बोर्ड ऑफ पीस गाजा में स्थायी शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” भारत को यह न्योता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का इजरायल और फिलिस्तीन दोनों से ऐतिहासिक संबंध है। भारत दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य मध्यस्थ माना जाता है।

भारत की प्रतिक्रिया और विदेश मंत्रालय का रुख

विदेश मंत्रालय ने अभी औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि भारत ट्रंप योजना के पहले चरण (बंदियों की रिहाई और मानवीय सहायता) का स्वागत कर चुका है। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अगुवाई में विचार-विमर्श चल रहा है। भारत हमेशा दो-राज्य समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का समर्थन करता रहा है और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से शांति प्रयासों को प्राथमिकता देता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड में शामिल होना भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगा, लेकिन यूएन की भूमिका कम होने की चिंता भी है।

अन्य देशों की स्थिति और वैश्विक प्रतिक्रियाएं

पाकिस्तान ने भी न्योता की पुष्टि की और कहा कि वह गाजा में शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होगा। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान और वियतनाम ने न्योता स्वीकार कर लिया है। अर्जेंटीना, कनाडा, अल्बानिया, साइप्रस समेत कई देशों को आमंत्रित किया गया है। इजरायल ने तुर्की और कतर की भूमिका पर आपत्ति जताई है। रूस और चीन ने यूएन की भूमिका कम होने पर चिंता व्यक्त की है।

गाजा में युद्धविराम के बाद पुनर्निर्माण के लिए 50 बिलियन डॉलर से अधिक की जरूरत बताई जा रही है। बोर्ड इस फंडिंग को जुटाने और खर्च की निगरानी करेगा।

भारत के लिए निहितार्थ

यह न्योता भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत का प्रमाण है। मध्य पूर्व में भारत की तटस्थता और दोनों पक्षों से अच्छे संबंध इसे उपयुक्त बनाते हैं। हालांकि, बोर्ड में शामिल होना यूएन-केंद्रित बहुपक्षीय व्यवस्था से हटकर अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यवस्था की ओर झुकाव माना जा सकता है। भारत ने गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में भागीदारी से इनकार किया है, क्योंकि यह यूएन के तहत नहीं है।

यह पहल भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चुनौती होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सतर्क लेकिन रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।

यह विकास मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में भारत की संभावित बड़ी भूमिका का संकेत है। दुनिया की नजरें अब नई दिल्ली के अगले कदम पर हैं।

Sources: रॉयटर्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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