18 जनवरी 2026, IndiGo फ्लाइट में बम की धमकी: भारत की प्रमुख बजट एयरलाइन इंडिगो की एक फ्लाइट में आज सुबह बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। दिल्ली से बागडोगरा जा रही इंडिगो फ्लाइट 6E 6650 को लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी, जब फ्लाइट के टॉयलेट में एक टिशू पेपर पर “बम ऑन बोर्ड” लिखा हुआ मिला। अधिकारियों ने बताया कि कोई वास्तविक खतरा नहीं पाया गया, लेकिन जांच अभी भी जारी है। इस घटना ने एक बार फिर एविएशन सिक्योरिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर हाल के महीनों में बढ़ती बम थ्रेट्स की घटनाओं के संदर्भ में। इस रिपोर्ट में हम घटना के विवरण, बैकग्राउंड, सरकारी प्रतिक्रियाओं, पैसेंजर्स के अनुभवों और संभावित प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
घटना का विवरण और समयरेखा
घटना की शुरुआत सुबह लगभग 8:46 AM पर हुई, जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को इंडिगो फ्लाइट 6E 6650 पर बम थ्रेट की सूचना मिली। फ्लाइट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बागडोगरा (पश्चिम बंगाल) के लिए उड़ी थी, जिसमें लगभग 150 पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स सवार थे। क्रू मेंबर्स को फ्लाइट के टॉयलेट में एक टिशू पेपर मिला, जिस पर हैंडराइटिंग में “बम ऑन बोर्ड” लिखा था। यह संदेश इतना स्पष्ट था कि पायलट ने तुरंत ATC को अलर्ट किया और सबसे नजदीकी सुरक्षित एयरपोर्ट लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया।
लैंडिंग के बाद, एयरपोर्ट को हाई अलर्ट पर रखा गया। सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड और लोकल पुलिस ने तुरंत प्लेन की तलाशी ली। सभी पैसेंजर्स और क्रू को सुरक्षित रूप से निकाला गया, और प्लेन को रिमोट एरिया में पार्क किया गया। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली, लेकिन पूरी स्कैनिंग के लिए डॉग स्क्वाड और एक्सप्लोसिव डिटेक्शन टीम को बुलाया गया। इंडिगो ने एक बयान जारी कर कहा कि “पैसेंजर्स की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, और हम सभी प्रोटोकॉल्स का पालन कर रहे हैं।” फ्लाइट को दोपहर तक क्लियर कर दिया गया, लेकिन पैसेंजर्स को वैकल्पिक व्यवस्था के साथ बागडोगरा भेजा गया, जिससे कई घंटों की देरी हुई।
बैकग्राउंड: बढ़ती बम थ्रेट्स की ट्रेंड
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय एविएशन सेक्टर में बम थ्रेट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। दिसंबर 2025 में अकेले 20 से अधिक फ्लाइट्स को इसी तरह की धमकियां मिलीं, जिनमें से ज्यादातर फर्जी साबित हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और अनाम ईमेल्स के जरिए ये थ्रेट्स दिए जा रहे हैं, जो अक्सर राजनीतिक या व्यक्तिगत दुश्मनी से प्रेरित होते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 150 से अधिक थ्रेट्स रिकॉर्ड की गईं, जो 2024 की तुलना में दोगुनी हैं। इंडिगो, जो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है, को इनमें से 40% थ्रेट्स का सामना करना पड़ा।
इसके पीछे का कारण क्या है? साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि डार्क वेब पर आसानी से उपलब्ध टूल्स से अनाम थ्रेट्स भेजना आसान हो गया है। साथ ही, COVID-19 के बाद एविएशन इंडस्ट्री में रिकवरी के दौरान, पैसेंजर्स की संख्या बढ़ने से सिक्योरिटी चेकपॉइंट्स पर दबाव बढ़ा है। हाल ही में, डीजीसीए ने इंडिगो पर 22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जो दिसंबर में उड़ानों की देरी से जुड़ा था, लेकिन अब थ्रेट्स के कारण और देरी हो रही है। लखनऊ एयरपोर्ट, जो उत्तर भारत का प्रमुख हब है, ने पहले भी ऐसी घटनाओं का सामना किया है, जैसे कि 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट की थ्रेट।
पैसेंजर्स और क्रू के अनुभव
पैसेंजर्स ने इस घटना को “डरावना” बताया। एक पैसेंजर, जो बागडोगरा जा रहे थे, ने मीडिया से कहा कि “अचानक अनाउंसमेंट हुआ कि इमरजेंसी लैंडिंग होगी, और हम सब घबरा गए।” कई पैसेंजर्स ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव शेयर किए, जहां उन्होंने इंडिगो की हैंडलिंग की तारीफ की, लेकिन थ्रेट के कारण हुई देरी पर नाराजगी जताई। क्रू मेंबर्स ने प्रोफेशनल तरीके से स्थिति संभाली, पैसेंजर्स को शांत रखा और सेफ्टी इंस्ट्रक्शंस दिए।
बागडोगरा एयरपोर्ट ने एक स्टेटमेंट जारी कर कहा कि “फ्लाइट को लखनऊ में डायवर्ट किया गया, और हमारी टीम पैसेंजर्स की मदद के लिए तैयार है।” पैसेंजर्स को लखनऊ में रिफ्रेशमेंट्स और वैकल्पिक फ्लाइट्स की व्यवस्था की गई। हालांकि, कुछ पैसेंजर्स ने शिकायत की कि सूचना में देरी हुई, जिससे चिंता बढ़ी।
सरकारी और एयरलाइन की प्रतिक्रियाएं
इंडिगो ने तुरंत बयान जारी कर कहा कि “हमने सभी सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स फॉलो किए, और पैसेंजर्स सुरक्षित हैं। जांच जारी है, और हम संबंधित अथॉरिटीज के साथ सहयोग कर रहे हैं।” डीजीसीए ने घटना की जांच शुरू कर दी है, और कहा कि “ऐसी थ्रेट्स को गंभीरता से लिया जाता है, भले ही फर्जी हों।” CISF ने प्लेन की पूरी जांच की, और कोई खतरा न मिलने पर राहत की सांस ली।
नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा कि “एविएशन सिक्योरिटी में कोई कमी नहीं बरती जाएगी, और दोषियों को सजा मिलेगी।” पुलिस ने थ्रेट के सोर्स की जांच शुरू की, जो संभवतः पैसेंजर या ग्राउंड स्टाफ से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि एयरलाइंस को AI-बेस्ड थ्रेट डिटेक्शन सिस्टम अपनाने चाहिए।
प्रभाव और विश्लेषण
इस घटना से एविएशन इंडस्ट्री पर गहरा प्रभाव पड़ा। इंडिगो की उड़ानों में पहले से ही देरी की समस्या है, और अब थ्रेट्स से और नुकसान हो रहा है। आर्थिक रूप से, प्रत्येक इमरजेंसी लैंडिंग पर लाखों रुपये का खर्च आता है, जिसमें फ्यूल, ग्राउंड हैंडलिंग और पैसेंजर्स कॉम्पेंसेशन शामिल है। पैसेंजर्स की ट्रस्ट में कमी आ सकती है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब फॉग पहले से देरी का कारण बनता है।
विश्लेषकों का मानना है कि ये थ्रेट्स एक पैटर्न का हिस्सा हैं, जो साइबर क्रिमिनल्स या असंतुष्ट तत्वों द्वारा किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी, यूएस और यूरोप में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। भारत को सख्त कानून बनाने की जरूरत है, जैसे कि फर्जी थ्रेट्स के लिए 5-10 साल की सजा। साथ ही, एयरपोर्ट्स पर बेहतर स्कैनिंग और पैसेंजर वेरिफिकेशन सिस्टम लगाने चाहिए।
यह घटना एक चेतावनी है कि एविएशन सिक्योरिटी को और मजबूत करने की जरूरत है। हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पैसेंजर्स का डर और देरी अस्वीकार्य है। सरकार और एयरलाइंस को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकना चाहिए, ताकि हवाई यात्रा सुरक्षित और विश्वसनीय बनी रहे। जांच के नतीजे आने पर और अपडेट्स मिलेंगे।