18 जनवरी 2026, Iran विरोध प्रदर्शनों में हजारों मौतें: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनी ने हालिया विरोध प्रदर्शनों में हजारों मौतों को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है, लेकिन इसका दोष अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मढ़ा है। खामेनी ने इन मौतों में से कुछ को “अमानवीय और बर्बर” करार दिया, जबकि प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” बताते हुए विदेशी शक्तियों द्वारा समर्थित बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से बड़े पैमाने पर अशांति का सामना कर रहा है, जिसमें आर्थिक संकट से शुरू हुए विरोध सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए हैं। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के बैकग्राउंड, मौतों की संख्या, सरकारी दमन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और संभावित परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
विरोध प्रदर्शनों का बैकग्राउंड और कारण
ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान में शुरू हुए, जब व्यापारियों ने रियाल की अचानक गिरावट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। शुरुआत में आर्थिक असंतोष पर केंद्रित ये प्रदर्शन जल्द ही पूरे देश में फैल गए और सरकार विरोधी नारों में बदल गए। प्रदर्शनकारी ईरान की इस्लामिक गणराज्य व्यवस्था के अंत की मांग करने लगे, जो 1979 की क्रांति के बाद से कायम है। आर्थिक संकट प्रमुख कारण रहा: बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। खामेनी ने खुद स्वीकार किया कि देश की आर्थिक स्थिति “वास्तव में कठिन” है, लेकिन उन्होंने लोगों से “इस्लामिक सिस्टम और प्रिय ईरान की रक्षा” में एकजुट होने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आग लगाकर आंसू गैस का मुकाबला किया, सड़कें अवरुद्ध कीं, और पत्थरों का इस्तेमाल किया। एक गुमनाम प्रदर्शनकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने लेजर से निशाना साधकर चेहरे पर गोली मारी, जिससे “हमारे सबसे सुंदर, बहादुर बच्चों” की मौत हुई। सरकार ने इन प्रदर्शनों को “विदेशी एजेंटों” द्वारा प्रायोजित बताया, बिना कोई सबूत दिए। खामेनी ने प्रदर्शनकारियों को दो श्रेणियों में बांटा: अमेरिका और इजराइल द्वारा समर्थित, प्रशिक्षित और वित्तपोषित लोग, तथा उनके प्रभाव में आए “भोले-भाले युवा”। उन्होंने कहा कि इन “दंगाइयों” ने बिजली सुविधाएं, मस्जिदें, शैक्षणिक संस्थान, बैंक, चिकित्सा केंद्र और किराने की दुकानें क्षतिग्रस्त कीं।
मौतों की संख्या और सरकारी दमन
मौतों की संख्या पर विभिन्न अनुमान हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, 3,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 500 से 16,500 तक बताई गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने “हजारों” की संख्या को खारिज करते हुए कहा कि मौतें सैकड़ों में हैं और बाकी “गलत सूचना अभियान” का हिस्सा। खामेनी ने हजारों मौतों को स्वीकारा, लेकिन कुछ को “अमानवीय” बताया, बिना सटीक आंकड़ा दिए।
सरकार की प्रतिक्रिया बेहद हिंसक रही। सुरक्षा बलों ने सड़कों पर और छतों से गोलीबारी की, ड्रोन उड़ाए, और बसीज (खामेनी द्वारा स्थापित स्वयंसेवी पैरामिलिट्री ग्रुप) का इस्तेमाल किया। इंटरनेट शटडाउन 8 जनवरी से जारी है, जिससे कनेक्टिविटी सामान्य स्तर की 2% रह गई। साइबरसिक्योरिटी वॉचडॉग नेटब्लॉक्स के अनुसार, कुछ सब्सक्राइबर्स को आंशिक पहुंच मिली, लेकिन कुल मिलाकर ब्लैकआउट जारी है। 22,000 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए, और कई को मौत की सजा की धमकी दी गई। एक वरिष्ठ क्लर्क अहमद खातामी ने “सशस्त्र पाखंडियों” को मौत की सजा की मांग की, उन्हें अमेरिका और इजराइल के “नौकर” बताया। तेहरान के अभियोजक अली सालेही ने कहा कि प्रतिक्रिया “दृढ़, निरोधक और तेज” होगी। मानवाधिकार समूहों ने हिरासत में यातना और सामूहिक हत्याओं की आशंका जताई।
खामेनी का बयान और अमेरिका पर आरोप
खामेनी ने अपने वेबसाइट पर प्रकाशित भाषण में कहा कि “दंगाइयों ने लोगों को नुकसान पहुंचाकर कई हजारों की हत्या की”। उन्होंने मौतों को “पूरी तरह से बर्बर” बताया और इसे “सेडिशन” का पूर्व-योजित हिस्सा करार दिया। उन्होंने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया, ट्रंप को “अपराधी” कहा, और कहा कि “अमेरिका को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए”। खामेनी ने कहा कि देश को युद्ध में नहीं झोंका जाएगा, लेकिन “घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों” को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति दोगुनी करने की अपील की। सोमवार को सरकारी समर्थक रैलियां हुईं, जिन्हें खामेनी ने विरोध प्रदर्शनों के “समाप्त” होने का प्रमाण बताया।
ट्रंप ने खामेनी के एक्स पोस्ट पढ़ने के बाद कहा कि “ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है”। उन्होंने खामेनी को “बीमार आदमी” कहा, जो “देश चलाने के बजाय लोगों की हत्या कर रहा है”। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को “संस्थाओं पर कब्जा” करने और जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया, “सहायता आने वाली है” का वादा किया। उन्होंने संभावित 800 निष्पादनों को रुकवाने का श्रेय लिया, हालांकि ईरान ने इसे नकारा। ट्रंप ने कहा कि खामेनी ने “800 से अधिक लोगों को फांसी न देने का सबसे अच्छा फैसला किया”, अन्यथा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई होती।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और विश्लेषण
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ईरान की निंदा की। ह्यूमन राइट्स वॉच ने “प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हत्याओं” की बात कही, जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने वैश्विक कूटनीतिक कार्रवाई की मांग की ताकि “दंडमुक्ति समाप्त” हो। संयुक्त राष्ट्र ने निष्पादनों की धमकी पर चिंता जताई। ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी ने ट्रंप से हस्तक्षेप की अपील की, कहा कि “ईरानी लोगों को लड़ाई जारी रखनी होगी”।
ईरान की सरकार ने विदेशी “सबोटर्स” का सबूत दिखाने के लिए फुटेज जारी किया, जिसमें सशस्त्र व्यक्ति दिखाए गए। रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह ने कुछ मौतों को “औद्योगिक ड्रग्स के ओवरडोज” से जोड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि यह दमन ईरान की सत्ता को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन आर्थिक संकट और युवा असंतोष से दीर्घकालिक अस्थिरता बढ़ सकती है। इंटरनेट ब्लैकआउट ने सूचना प्रवाह रोका, जिसे “डिजिटल अंधकार में नरसंहार” कहा जा रहा है। ट्रंप की बयानबाजी ने तनाव बढ़ाया, लेकिन सैन्य हमला टाला गया।
यह घटना ईरान की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाती है। जबकि खामेनी ने एकता की अपील की, प्रदर्शनकारी स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। वैश्विक दबाव बढ़ने से ईरान को सुधार करने पड़ सकते हैं, लेकिन फिलहाल दमन जारी है।
Sources: बीबीसी