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17 जनवरी 2026, Bihar का मत्स्य उत्पादन: मत्स्य पालन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, Bihar ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 8.5 लाख टन से अधिक मछली उत्पादन किया, जिससे राज्य देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया। पहले तीन स्थान पर आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश हैं। आंध्र प्रदेश अभी भी नंबर वन है, लेकिन Bihar ने पिछले पांच वर्षों में अपनी स्थिति को लगातार सुधारा है। 2015-16 में बिहार सातवें-आठवें स्थान पर था, लेकिन अब यह टॉप-4 में शामिल हो गया।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी बढ़कर 5.2 टन हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। तालाबों, नदियों, जलाशयों और पोखरों का बेहतर उपयोग इसके पीछे मुख्य कारण है। बिहार की गंगा, कोसी, गंडक जैसी नदियां और मैथिली-मैथिल संस्कृति में मछली का महत्वपूर्ण स्थान इस क्षेत्र को प्राकृतिक लाभ देता है।

बीज उत्पादन में 44% की रिकॉर्ड वृद्धि

सबसे बड़ी उपलब्धि मछली बीज उत्पादन में आई है। विभाग के अनुसार, 2024-25 में 1,200 करोड़ से अधिक मछली बीज (फिंगरलिंग्स) का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष से 44 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीज की उपलब्धता मत्स्य पालन की आधारशिला है। पहले Bihar को पड़ोसी राज्यों से बीज आयात करना पड़ता था, लेकिन अब राज्य आत्मनिर्भर हो रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी हैचरियों और निजी उद्यमियों की संयुक्त मेहनत से यह संभव हुआ। विशेष रूप से रोहू, कतला, मृगल और पंगास जैसी प्रजातियों के बीज उत्पादन में तेजी आई है। विभाग ने 500 से अधिक नई हैचरियां स्थापित करने और सब्सिडी देने का श्रेय लिया है।

सरकार की योजनाएं और योगदान

प्रमुख पहल और सब्सिडी

नीतीश कुमार सरकार ने मत्स्य पालन को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाएं चलाई हैं। ‘बिहार मत्स्य बीज विकास योजना’, ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) और ‘जीविका मत्स्य पालन समूह’ इसके प्रमुख उदाहरण हैं। PMMSY के तहत केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जीविका दीदियों को मत्स्य पालन में प्रशिक्षण और लोन दिए जा रहे हैं। लगभग 2 लाख महिलाएं अब इस क्षेत्र से जुड़ी हैं। तालाब खनन, बायोफ्लॉक तकनीक और केज कल्चर को बढ़ावा देने से उत्पादन बढ़ा है। विभाग ने 10,000 नए तालाबों का निर्माण और पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार कराया है।

रोजगार और आर्थिक प्रभाव

यह प्रगति Bihar की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रही है। मत्स्य पालन से सीधे 15 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 30 लाख लोग जुड़े हैं। राज्य का मत्स्य निर्यात भी बढ़ा है – कोलकाता और दिल्ली के बाजारों में Bihar की मछली की मांग बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र से राज्य को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और पोषण सुरक्षा में भी योगदान बड़ा है। मछली प्रोटीन का सस्ता स्रोत है, जिससे कुपोषण पर अंकुश लग रहा है।

चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं

बाधाएं और समाधान

रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों का भी जिक्र है – जलवायु परिवर्तन से बाढ़, जल प्रदूषण और बाजार पहुंच की कमी। विभाग ने इनके लिए विशेष प्लान बनाया है, जैसे जल संरक्षण और ऑर्गेनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा।

भविष्य में Bihar को टॉप-3 में लाने का लक्ष्य है। 2030 तक 15 लाख टन उत्पादन और 100% बीज आत्मनिर्भरता का प्लान है। नई तकनीक जैसे रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और ड्रोन से मॉनिटरिंग शुरू की जाएगी।

Bihar का मत्स्य उत्पादन में चौथा स्थान और बीज उत्पादन में 44% वृद्धि राज्य के विकास की नई कहानी लिख रही है। मत्स्य पालन विभाग की रिपोर्ट न केवल आंकड़ों की सफलता है, बल्कि लाखों मत्स्य किसानों और महिलाओं की मेहनत की गाथा है। नीतीश सरकार की दूरदर्शी नीतियों से यह क्षेत्र बिहार को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। आने वाले वर्षों में Bihar मत्स्य पालन के क्षेत्र में नंबर-1 बनने की राह पर है। यह उपलब्धि हर बिहारी के लिए गर्व की बात है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।

Sources: दैनिक जागरण

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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