16 जनवरी 2026, NHAI का आवारा पशुओं के लिए रीयल-टाइम अलर्ट पायलट प्रोजेक्ट: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जनवरी 2026 में रोड सेफ्टी मंथ के दौरान, NHAI ने आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चालकों को रीयल-टाइम अलर्ट प्रदान करता है, ताकि वे आवारा पशुओं वाले क्षेत्रों में सतर्क रह सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति में होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है, जहां अचानक पशुओं का सड़क पर आना घातक साबित होता है।
यह प्रोजेक्ट टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है, जैसे कि रिलायंस जियो। पायलट के रूप में जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्गों को चुना गया है, जो आवारा पशुओं के कारण उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से, चालकों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्र से लगभग 10 किलोमीटर पहले अलर्ट भेजा जाता है, जिससे वे गति कम कर सकें और सावधानी बरत सकें।
पृष्ठभूमि: आवारा पशुओं से सड़क दुर्घटनाओं की समस्या
भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती हैं। 2023 में, देश में 4.8 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.72 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह औसतन हर तीन मिनट में एक मौत का आंकड़ा है। इन दुर्घटनाओं में आवारा पशुओं का योगदान महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में ही पिछले दो वर्षों (2023-2025) में 237 दुर्घटनाएं आवारा पशुओं के कारण हुईं, जिनमें 94 मौतें और 133 घायल हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस समस्या पर चिंता जताई है। कोर्ट ने नोट किया कि न केवल कुत्तों के काटने से, बल्कि सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं से दुर्घटनाएं हो रही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के दो जजों को पिछले 20 दिनों में ऐसी दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ा, जिसमें एक को स्पाइनल इंजरी हुई। देश में लगभग 62 मिलियन आवारा कुत्ते हैं, जो न केवल काटने की घटनाओं बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। आवारा गायों और अन्य पशुओं से ट्रेन और सड़क दुर्घटनाएं आम हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह समस्या और गंभीर है, जहां उच्च गति वाले वाहन चलते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक पशुओं को खुला छोड़ देते हैं, जो सड़कों पर चरते हुए दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। मौसम संबंधी कारक जैसे वर्षा और कम तापमान भी दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं। केरल के एक अध्ययन में पाया गया कि न्यूनतम तापमान 21.71°C से कम होने और 2.15 मिमी से कम वर्षा में दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।
प्रोजेक्ट का विस्तृत विवरण
यह पायलट प्रोजेक्ट टेलीकॉम तकनीक पर आधारित है। NHAI ने पिछले दुर्घटना डेटा और फील्ड इनपुट्स से आवारा पशुओं वाले जोनों की पहचान की है। जब कोई वाहन चालक इन जोनों से 10 किमी पहले पहुंचता है, तो उसके मोबाइल पर फ्लैश एसएमएस भेजा जाता है, उसके बाद हिंदी में वॉयस अलर्ट। एसएमएस में लिखा होता है: “आगे पशु चराने का क्षेत्र है। कृपया धीरे चलें और सावधानी बरतें।”
यह सिस्टम लोकेशन-बेस्ड है, जो जीपीएस या सेल टावर के माध्यम से चालक की स्थिति ट्रैक करता है। अलर्ट फ्रीक्वेंसी को नियंत्रित किया गया है ताकि अलर्ट फेटीग न हो। प्रोजेक्ट की शुरुआत 14 जनवरी 2026 को हुई, और यह रोड सेफ्टी मंथ (1-31 जनवरी) का हिस्सा है।
लाभ और प्रभाव
यह प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। अलर्ट से चालक पहले से तैयार रहेंगे, जिससे दुर्घटनाओं में 20-30% की कमी आ सकती है। पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी, क्योंकि कम स्पीड से टक्कर की संभावना कम होगी। आर्थिक रूप से, दुर्घटनाओं से होने वाला नुकसान कम होगा – भारत में सड़क दुर्घटनाओं से सालाना जीडीपी का 3% नुकसान होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप, यह प्रोजेक्ट आवारा पशुओं को हटाने के प्रयासों का पूरक है। स्थानीय निकायों और NHAI को पशुओं को हटाने का आदेश है, लेकिन अलर्ट सिस्टम तत्काल समाधान प्रदान करता है।
चुनौतियां और समाधान
प्रोजेक्ट की चुनौतियां включают मोबाइल कवरेज की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में, और अलर्ट की सटीकता। यदि जोन सही से मैप न किए गए, तो फाल्स अलर्ट हो सकते हैं। लागत भी एक मुद्दा है – टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना पड़ सकता है।
समाधान के रूप में, NHAI भविष्य में AI-आधारित कैमरा और सेंसर जोड़ सकता है, जो रीयल-टाइम में पशुओं का पता लगाए। पशुपालकों को जागरूक करने और गौशालाओं का निर्माण भी जरूरी है।
भविष्य की योजनाएं
पायलट की सफलता पर, इसे पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा। NHAI अन्य जोखिमों जैसे कोहरे या निर्माण कार्य के लिए भी अलर्ट सिस्टम विकसित कर सकता है। सरकार की योजना है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50% कम किया जाए।
निष्कर्ष
NHAI का यह प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। आवारा पशुओं की समस्या जटिल है, लेकिन तकनीक और जागरूकता से इसे हल किया जा सकता है। यह न केवल मानव जीवन बचाएगा बल्कि पशुओं की रक्षा भी करेगा। सरकार, नागरिकों और टेलीकॉम कंपनियों के सहयोग से भारत की सड़कें सुरक्षित बन सकती हैं।
Sources: एनडीटीवी