15 जनवरी 2026, Congress के सभी छह विधायक एक साथ पलट जाएंगे: बिहार की राजनीति में दलबदल कोई नई बात नहीं है। पिछले दशकों में कई बार विधायकों ने पार्टियां बदली हैं, जिससे सरकारें बनीं और गिरीं। उदाहरण के लिए, 2020 में नीतीश कुमार की जदयू को अरुणाचल प्रदेश में झटका लगा जब उसके सात में से छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए। यह घटना जदयू के लिए बड़ा झटका थी, लेकिन बिहार में भी ऐसी घटनाएं आम हैं। नीतीश कुमार खुद कई बार गठबंधन बदल चुके हैं—2017 में राजद से अलग होकर भाजपा के साथ गए, फिर 2022 में भाजपा से अलग होकर राजद के साथ। Congress के संदर्भ में, 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को सिर्फ छह सीटें मिलीं, जो महागठबंधन के लिए कमजोरी का संकेत था। भूतकाल में Congress विधायकों ने भी दलबदल किया है, जैसे 2015 में कुछ विधायक राजद में चले गए। ये घटनाएं दिखाती हैं कि बिहार में सत्ता की राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और गठबंधन की मजबूतियां दलबदल को बढ़ावा देती हैं।
दलबदल के कारणों का विश्लेषण
दलबदल के पीछे मुख्य कारण सत्ता में हिस्सेदारी और विकास के अवसर होते हैं। भूत में देखें तो, जब जदयू की ताकत कम हुई, उसके विधायक भाजपा की ओर रुख कर गए। इसी तरह, Congress के विधायक अब जदयू की ओर देख रहे हैं क्योंकि पार्टी विधानसभा में अपनी उपस्थिति खोने के कगार पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि दलबदल विरोधी कानून के बावजूद, अगर पूरी पार्टी या बड़ा गुट बदलता है, तो अयोग्यता से बचाव होता है। बिहार में यह रणनीति कई बार अपनाई गई है, जैसे 2005 में जब लोजपा के कई विधायक जदयू में शामिल हुए।
वर्तमान स्थिति: कांग्रेस विधायकों की जदयू से निकटता
हाल की घटनाओं का अवलोकन
वर्तमान में, बिहार की राजनीति में हलचल मची हुई है क्योंकि Congress के सभी छह विधायक जदयू से संपर्क में बताए जा रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ये विधायक—सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, मनोज विश्वास, अबिदुर रहमान, कमरुल होदा और मनोहर प्रसाद—जदयू में शामिल होने की तैयारी में हैं। मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर Congress के ‘दही-चूड़ा’ भोज में कोई विधायक नहीं पहुंचा, जिससे अटकलें तेज हो गईं। एलजेपी (RV) के मंत्री संजय सिंह ने दावा किया कि खरमास के बाद सभी NDA में शामिल होंगे। भाजपा के नेताओं ने भी इसकी पुष्टि की, लेकिन Congress ने इसे अफवाह बताया।
NDA में एक-दूसरे पर बढ़त की जंग
NDA में भाजपा के 89 और जदयू के 85 विधायक हैं। अगर Congress के छ: विधायक जदयू में जाते हैं, तो जदयू की संख्या 91 हो जाएगी, जो भाजपा से ज्यादा होगी। यह नीतीश कुमार के लिए रणनीतिक जीत होगी, क्योंकि गठबंधन में संख्याबल महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, विधायकों की अनुपस्थिति और बैठकें छोड़ना Congress में असंतोष का संकेत दे रही हैं। उदाहरण के लिए, मनरेगा बचाओ संघर्ष बैठक में दो विधायक गायब थे।
भविष्य की संभावनाएं: दलबदल का प्रभाव
सकारात्मक संभावनाएं जदयू के लिए
भविष्य में, अगर सभी छह विधायक जदयू में शामिल होते हैं, तो Congress बिहार विधानसभा से पूरी तरह गायब हो जाएगी, जो महागठबंधन के लिए बड़ा झटका होगा। जदयू मजबूत होगा, और नीतीश कुमार एनडीए में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर सकेंगे। संभावना है कि विधायक विकास निधि या पदों के लालच में ऐसा करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले यह कदम NDA को मजबूत करेगा। इसके अलावा, अन्य छोटी पार्टियों जैसे AIMIM के विधायक भी जदयू की ओर रुख कर सकते हैं।
नकारात्मक संभावनाएं और चुनौतियां
हालांकि, अगर दलबदल नहीं हुआ, तो Congress अपनी एकता दिखा सकती है। लेकिन संभावना कम लगती है, क्योंकि भाजपा और जदयू के नेता दावा कर रहे हैं कि कुछ दिनों में फैसला हो जाएगा। भविष्य में, यह दलबदल NDA में आंतरिक कलह बढ़ा सकता है, क्योंकि भाजपा को जदयू की बढ़त पसंद नहीं आएगी। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में अस्थिरता बनी रहेगी।
Congress और महागठबंधन के लिए खतरा
Congress की अस्तित्व की लड़ाई
Congress के लिए सबसे बड़ी आशंका विधानसभा में शून्य प्रतिनिधित्व है, जो पार्टी की नैतिक हार होगी। राज्य अध्यक्ष राजेश राम ने इसे राजनीतिक अफवाह बताया, लेकिन विधायकों की चुप्पी चिंता बढ़ा रही है। आशंका है कि यह दलबदल राष्ट्रीय स्तर पर Congress की छवि खराब करेगा, खासकर जब इंडिया गठबंधन पहले से कमजोर है। इसके अलावा, विधायकों के बीच असंतोष—जैसे मदन मोहन झा के खिलाफ—आशंका को बल देता है।
एनडीए और विपक्ष पर प्रभाव
NDA के लिए आशंका है कि यह एक-दूसरे पर बढ़त की जंग में बदल जाए, जैसे भाजपा और जदयू के बीच। महागठबंधन के लिए, राजद की 25 सीटों के साथ गठबंधन कमजोर होगा। आशंका है कि इससे बिहार में विपक्षी एकता टूटेगी, और नीतीश कुमार की सरकार और मजबूत हो जाएगी। कुल मिलाकर, दलबदल की आशंका राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देगी।
संभावनाएं: क्या होगा अगर…
सकारात्मक परिदृश्य
संभावना है कि विधायक जदयू में शामिल होकर नई शुरुआत करें, जिससे बिहार में विकास कार्य तेज हों। अगर वे रहते हैं, तो Congress पुनर्निर्माण कर सकती है।
नकारात्मक परिदृश्य
अगर दलबदल हुआ, तो Congress का अंत हो सकता है, लेकिन अगर नहीं, तो NDA में कलह बढ़ेगी। संभावनाएं बताती हैं कि राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस