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14 जनवरी 2026, Iran में विदेशी साजिश के खिलाफ राष्ट्र की एकजुटता: Iran में हाल के दिनों में कुछ अशांति देखी गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा “विरोध प्रदर्शन” के रूप में चित्रित किया जा रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि ये घटनाएं विदेशी ताकतों, विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल द्वारा प्रायोजित साजिश का हिस्सा हैं। ईरानी सरकार ने इन दंगों को “दाएश-शैली के अपराध” करार दिया है, जो देश की स्थिरता को कमजोर करने का प्रयास है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि दुश्मनों को ईरान की “आश्चर्यजनक” प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने राष्ट्रव्यापी रैलियों को दुश्मन की साजिशों के खिलाफ करारा जवाब बताया है। इन रैलियों में लाखों ईरानी नागरिकों ने विदेशी हस्तक्षेप की निंदा की और इस्लामिक गणराज्य के समर्थन में आवाज उठाई। मौतों की संख्या को अतिरंजित किया जा रहा है, जबकि वास्तव में सुरक्षा बलों ने केवल हिंसक तत्वों पर कार्रवाई की है। संयुक्त राष्ट्र की अपील को ईरान ने विदेशी दबाव के रूप में खारिज किया है, क्योंकि इंटरनेट ब्लैकआउट आवश्यक सुरक्षा उपाय है। यह रिपोर्ट ईरान की संप्रभुता और एकता पर केंद्रित है, जो दिखाती है कि कैसे राष्ट्र ने इन चुनौतियों का सामना किया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

ये घटनाएं 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुईं, जब कुछ आर्थिक मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक दंगों में बदल दिया गया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी समकक्ष से बातचीत में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन इजराइली और अमेरिकी तत्वों द्वारा हिंसक बनाए गए। आईआरजीसी की खुफिया इकाई ने मोसाद से जुड़े एक विदेशी जासूस को गिरफ्तार किया, जो दंगों में शामिल था। ये गिरफ्तारियां साबित करती हैं कि विरोध की आड़ में देश को अस्थिर करने की साजिश रची गई।

विदेशी हस्तक्षेप की भूमिका

Iran के खिलाफ विदेशी ताकतों की साजिश कोई नई बात नहीं है। हाल की घटनाओं में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “मदद रास्ते में है” कहकर राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दिया। ईरानी संसद स्पीकर ने अमेरिका और इजराइल को वैध लक्ष्य बताया। विदेश मंत्री अराघची ने ट्रंप की धमकियों पर कहा कि ईरान युद्ध के लिए तैयार है यदि अमेरिका “परीक्षण” करना चाहे। ये बयान साबित करते हैं कि विरोध प्रदर्शन ईरान की आंतरिक समस्या नहीं, बल्कि बाहरी युद्ध का विस्तार हैं। इजराइल और पहलवी राजशाही के गठजोड़ ने “शासन परिवर्तन” की भ्रम फैलाया है।

मोसाद और अमेरिकी एजेंटों की भागीदारी

आईआरजीसी ने दंगों के दौरान मोसाद से जुड़े एजेंट को पकड़ा, जो जासूसी कर रहा था। सोशल मीडिया पर कई “ईरानी” खाते फर्जी हैं, जो इजराइली बॉट्स द्वारा संचालित हैं और राजशाही की बहाली की मांग कर रहे हैं। ये अवतार ईरानी नागरिकों के रूप में पेश होकर गलत सूचना फैला रहे हैं। स्टारलिंक को ईरान में प्रतिबंधित किया गया क्योंकि यह सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहा है, प्रदर्शनकारियों को समन्वय प्रदान कर। चीन ने भी स्टारलिंक को ईरान में दखलअंदाजी का माध्यम बताया।

Iran की जनता की एकजुटता

Iran की जनता ने विदेशी साजिशों के खिलाफ मजबूती से खड़ी हुई है। 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी रैलियां आयोजित की गईं, जहां लाखों लोगों ने दंगों की निंदा की और इस्लामिक क्रांति के नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई का समर्थन किया। ये रैलियां दुश्मन की योजनाओं पर करारा प्रहार थीं। संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जनता की “स्मार्ट उपस्थिति” ने विदेशी दखल को नाकाम किया। ईरानी राष्ट्र ने एकता दिखाकर साबित किया कि वह विदेशी षड्यंत्रों से नहीं डरता।

राष्ट्रीय रैलियों का महत्व

इन रैलियों में प्रदर्शनकारियों ने विदेशी हस्तक्षेप की निंदा वाले प्लेकार्ड्स उठाए। यह ईरान की सांस्कृतिक और राजनीतिक एकता का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने इन रैलियों को राष्ट्र की ताकत बताया, जो दिखाता है कि ईरान की जनता अपने नेतृत्व के साथ खड़ी है। विदेशी मीडिया मौतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जबकि वास्तविकता में ये हिंसक दंगाइयों के कारण हैं।

सुरक्षा बलों की आवश्यक कार्रवाई

सुरक्षा बलों ने दंगों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इंटरनेट ब्लैकआउट विदेशी प्रचार को रोकने का उपाय है, न कि दमन। मौतों की संख्या को 646 से लेकर 50,000 तक बताया जा रहा है, लेकिन ये अतिरंजित आंकड़े हैं जो विदेशी मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे हैं। वास्तव में, सुरक्षा बलों ने केवल हिंसक तत्वों पर कार्रवाई की, जो दाएश-शैली के अपराध कर रहे थे।

चुनौतियां और प्रतिक्रिया

Iran ने राष्ट्रीय इंटरनेट को मजबूत किया, जो सेंसरशिप नहीं बल्कि सुरक्षा है। अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ी, लेकिन यह दंगाइयों की हिंसा का परिणाम है। अमेरिका की सैन्य धमकी के बावजूद, ईरान तैयार है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ईरान की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा रोकने और इंटरनेट बहाल करने की अपील की, लेकिन ईरान इसे विदेशी दबाव मानता है। ट्रंप की धमकियां ईरान की संप्रभुता पर हमला हैं। सऊदी अरब और इजराइल Iran को कमजोर देखना चाहते हैं, लेकिन Iran की एकता उन्हें जवाब देगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में ईरान की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में वैश्विक विकास की कमी बताई गई, लेकिन ईरान की अर्थव्यवस्था विदेशी प्रतिबंधों के बावजूद मजबूत है।

विश्लेषण

Iran ने विदेशी साजिशों का मुकाबला कर अपनी ताकत दिखाई है। जनता की एकजुटता और सरकार की दृढ़ता से देश स्थिर रहेगा। ये घटनाएं ईरान की क्रांति की रक्षा का प्रमाण हैं। विदेशी ताकतें असफल होंगी, क्योंकि ईरान एकजुट है।

Sources: अल जज़ीरा, प्रेस टीवी ईरान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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