12 जनवरी 2026, Sensex ने 5 दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा: भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। BSE Sensex 301.93 पॉइंट्स यानी 0.36% की तेजी के साथ 83,878.17 पर बंद हुआ, जबकि NSE NIFTY 106.95 पॉइंट्स यानी 0.42% चढ़कर 25,790 पर बंद हुआ। यह बंद भाव दिन के निचले स्तर से उल्लेखनीय रिकवरी दर्शाता है, जहां Sensex 82,861.07 के निचले स्तर तक फिसला था और बाद में 1,000 पॉइंट्स से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी भी 25,473.40 के निचले स्तर से उछलकर 25,813.15 के उच्च स्तर पर पहुंचा। इस रिकवरी ने बाजार के निवेशकों में नई उम्मीद जगाई है, खासकर पिछले पांच दिनों की लगातार गिरावट के बाद।
दिनभर के कारोबार में उतार-चढ़ाव भरा माहौल रहा। सुबह के सत्र में बाजार दबाव में था, लेकिन दोपहर बाद अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों पर सकारात्मक खबरों ने बाजार को सपोर्ट दिया। कुल मिलाकर, यह सत्र बाजार की लचीलता को दर्शाता है, जहां वैश्विक संकेतों और घरेलू भावनाओं का मिश्रण देखा गया।
5 दिनों की गिरावट का अंत: पिछले सत्रों में 2,000 पॉइंट्स से ज्यादा का नुकसान
यह बंद भाव पिछले पांच कारोबारी सत्रों की निरंतर गिरावट को तोड़ने वाला रहा। 7 से 10 जनवरी 2026 के बीच Sensex में 2,000 पॉइंट्स से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी, जो वैश्विक व्यापार चिंताओं, अमेरिकी टैरिफ धमकियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली का परिणाम था। निफ्टी भी इसी दौरान 2.3% नीचे आया था। 8 जनवरी को Sensex 780 पॉइंट्स टूटकर 84,180.96 पर बंद हुआ, जबकि 9 जनवरी को और गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट की मुख्य वजह ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां और भारत पर 50% तक के टैरिफ थे, जिसने एशिया में सबसे ऊंचा स्तर बनाया। FII ने जनवरी के पहले हफ्ते में भारी बिकवाली की, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी। लेकिन 12 जनवरी को सकारात्मक खबरों ने इस सिलसिले को रोका, जिससे निवेशकों को राहत मिली। इस रिकवरी ने बाजार की अस्थिरता को भी उजागर किया, जहां एक सकारात्मक समाचार बाजार को 1% से ज्यादा ऊपर ले जा सकता है।
अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता की सकारात्मक खबरें: ट्रंप-मोदी दोस्ती और नई वार्ताएं
बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह नई अमेरिकी राजदूत सरजियो गोर के बयान थे। उन्होंने कहा कि ट्रंप और मोदी “असली दोस्त” हैं, और दोनों देश व्यापार मुद्दों पर सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। गोर ने भारत को अमेरिका का “सबसे आवश्यक पार्टनर” बताया और कल (13 जनवरी) व्यापार वार्ताओं के नए दौर की घोषणा की। उन्होंने टैरिफ चिंताओं को कम करने की बात की, साथ ही ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भारत की खरीदारी का जिक्र किया।
यह बयान बाजार के लिए बड़ा बूस्टर साबित हुआ। पहले टैरिफ से तनाव था, लेकिन अब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं। भारत ने 25 बिलियन डॉलर तक की अमेरिकी ऊर्जा खरीदने का वादा किया है, जो व्यापार घाटे (47 बिलियन डॉलर) को कम करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-US संबंधों को मजबूत करेगा, खासकर टेक्नोलॉजी और रक्षा में। X (पूर्व ट्विटर) पर भी निवेशकों ने इस खबर को साझा किया, जहां बैंक निफ्टी 677 पॉइंट्स ऊपर चढ़ा।
सेक्टर-वार प्रदर्शन: मेटल और पीएसयू बैंक चमके, आईटी में दबाव
सेक्टर स्तर पर मेटल और माइनिंग शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, उसके बाद पीएसयू बैंक और एफएमसीजी। बैंक निफ्टी 59,500 के पार पहुंच गया। वहीं, आईटी और रियल एस्टेट सेक्टर में बिकवाली का दबाव रहा। कैपिटल गुड्स में भी कमजोरी दिखी। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि व्यापार वार्ता की खबर से निर्यात-आधारित सेक्टर जैसे मेटल को फायदा हुआ, जबकि वैश्विक अनिश्चितता से आईटी प्रभावित रहा।
वैश्विक और आर्थिक कारक: दिसंबर मुद्रास्फीति 1.33% पर नियंत्रित
वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में मिले-जुले संकेत थे, लेकिन यूएस बाजारों में सकारात्मक रुख रहा। भारत में दिसंबर की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 1.33% रही, जो नवंबर के 0.71% से ऊपर लेकिन बाजार के अनुमानित 1.50% से नीचे है। यह नियंत्रित मुद्रास्फीति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नीतिगत सहूलियत दी। FII अब सकारात्मक व्यापार विकास पर खरीदारी की ओर मुड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: व्यापार सौदे से FII वापसी की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 13 जनवरी की वार्ता सकारात्मक रही, तो FII 2026 में खरीदार बन सकते हैं। अर्थव्यवस्था की GDP वृद्धि और कमाई में सुधार से बाजार को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि, लंबे समय में वास्तविक सौदे और वैश्विक कारक महत्वपूर्ण होंगे। कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ जारी रहे, तो गिरावट वापस आ सकती है।
आगे क्या? 13 जनवरी की वार्ता और आय सीजन पर नजर
आने वाले सत्रों में 13 जनवरी की भारत-US व्यापार वार्ता पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही, Q3 आय सीजन शुरू हो रहा है, जहां धातु और सीमेंट सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। निवेशकों को वैश्विक रुझानों, नीतिगत संकेतों और FII फ्लो पर नजर रखनी चाहिए। अगर सौदा आगे बढ़ा, तो सेंसेक्स 85,000 और निफ्टी 26,000 के स्तर छू सकता है।
निष्कर्ष: सकारात्मक भावना से भरा बाजार
12 जनवरी 2026 का सत्र भारतीय बाजार की लचीलता का प्रमाण है। अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता की सकारात्मक खबरों ने 5 दिनों की गिरावट को रोका और निवेशकों में विश्वास जगाया। ट्रंप-मोदी दोस्ती और नई वार्ताओं से दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत होंगे। निवेशकों को सतर्क रहते हुए अवसर तलाशने चाहिए। लंबे समय में, यह सौदा भारत की वैश्विक स्थिति को बढ़ावा देगा। कुल मिलाकर, बाजार अब आशान्वित नजर आ रहा है।
Sources: BSE वेबसाइट, NSE वेबसाइट