12 जनवरी 2026, Bihar में राजनीतिक हलचल: तेज प्रताप यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व नेता और अब जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष, ने मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह भोज 14 जनवरी 2026 को पटना स्थित उनके सरकारी आवास 26 एम, स्ट्रैंड रोड पर होगा। तेज प्रताप ने एनडीए के कई प्रमुख नेताओं को निमंत्रित किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। यह कदम उनके परिवार से अलगाव और नई पार्टी गठन के बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है
तेज प्रताप यादव का राजनीतिक सफर
तेज प्रताप यादव, RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे हैं। मई 2025 में लालू प्रसाद ने उन्हें “अनुत्तरदायी व्यवहार” के कारण आरजेडी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) का गठन किया और हालिया विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। उनकी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली। परिवारिक स्तर पर भी उनके संबंध खराब हो गए हैं, जहां लालू प्रसाद ने उन्हें परिवार से अलग कर दिया। तेज प्रताप की पत्नी से तलाक और एक युवती के साथ संबंधों का खुलासा भी विवादास्पद रहा।
चुनाव के दौरान केंद्र सरकार ने उन्हें वाई-प्लस सुरक्षा प्रदान की, जो एनडीए के साथ उनके संभावित संबंधों की ओर इशारा करता है। चुनाव के बाद उन्होंने एनडीए नेताओं को बधाई दी और जेएनयू में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारों पर आपत्ति जताई। अब यह भोज उनके लिए राजनीतिक आधार मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।
परिवारिक विवाद और राजनीतिक अलगाव
तेज प्रताप और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के बीच सार्वजनिक मतभेद जगजाहिर हैं। तेजस्वी, जो आरजेडी के नेता और विपक्ष के नेता हैं, चुनाव हारने के बाद पटना से बाहर हैं। तेज प्रताप ने भोज में तेजस्वी को भी आमंत्रित किया है, जो परिवारिक मेल-मिलाप का संकेत हो सकता है। हालांकि, RJD के एक अनाम नेता ने इसे आरजेडी को ब्लैकमेल करने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा, “उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता खत्म हो गई है और वे ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।”
लालू प्रसाद की आंख की सर्जरी के कारण परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ऐसे में तेज प्रताप का यह कदम परिवारिक एकता की दिशा में एक प्रयास लगता है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे सत्ता की ओर बढ़ने की रणनीति मानते हैं।
भोज का निमंत्रण: किसे और क्यों?
तेज प्रताप ने एनडीए के प्रमुख नेताओं को व्यक्तिगत रूप से मिलकर निमंत्रण दिया। इनमें डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (BJP), Bihar विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह (BJP), मंत्री संतोष कुमार सुमन (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा-सेकुलर), और मंत्री दीपक प्रकाश (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) शामिल हैं। इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार (JDU), राज्यपाल, और विपक्ष के नेता को भी आमंत्रित किया गया है।
तेज प्रताप ने मीडिया से कहा, “यह कार्यक्रम पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अलग है, व्यक्तिगत संबंध अलग।” उन्होंने सोशल मीडिया पर इन मुलाकातों की तस्वीरें साझा कीं, जो वायरल हो गईं। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “आज बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश नारायण सिंह जी से मिलकर उन्हें आमंत्रित किया।”
मकर संक्रांति की परंपरा
Bihar में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज की परंपरा लालू प्रसाद ने शुरू की थी। इसमें चपटा चावल, दही, गुड़, मिश्रित सब्जियां और तिलकुट परोसा जाता है। यह सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है, जहां अलग-अलग दिनों में हिंदू और मुस्लिम मेहमानों को आमंत्रित किया जाता है। राजनीतिक रूप से यह मतभेद दूर करने, बातचीत और समझौते का मंच रहा है। तेज प्रताप अब इस परंपरा को अपनी पार्टी के बैनर तले जारी रख रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अटकलें
इस निमंत्रण पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने व्यंग्य किया, “तेज प्रताप को यह भोज अपने महुआबाग या कौटिल्य नगर आवास पर आयोजित करना चाहिए, जहां जगह ज्यादा है और उनके समर्थकों की संख्या का पता चले। सरकारी आवास छोटा पड़ सकता है।” उन्होंने लालू की बीमारी और तेजस्वी की अनुपस्थिति का जिक्र कर इसे संकट काल में साहस बताया।
आरजेडी में इसे तेज प्रताप की हताशा माना जा रहा है। एक नेता ने कहा, “बीजेपी भी उन्हें नहीं अपनाएगी, क्योंकि उनका कोई राजनीतिक आधार नहीं है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भोज नई राजनीतिक समीकरणों का संकेत हो सकता है। तेज प्रताप बीजेपी कोटे से विधान परिषद सदस्यता की तलाश में हो सकते हैं, जहां कुछ सीटें खाली हैं।
संभावित प्रभाव
यह घटना Bihar की राजनीति में नए गठबंधनों की संभावना जगा रही है। एनडीए की हालिया जीत के बाद तेज प्रताप का एनडीए नेताओं से संपर्क सत्ता की ओर उनके झुकाव को दिखाता है। यदि एनडीए नेता शामिल होते हैं, तो यह आरजेडी के लिए झटका होगा। वहीं, परिवारिक स्तर पर यह मेल-मिलाप का अवसर बन सकता है।
हालांकि, कई विश्लेषक इसे महज ध्यानाकर्षण की कोशिश मानते हैं। तेज प्रताप की “ओवरएक्टिव” राजनीति चुनाव हार के बाद भी जारी है, लेकिन बिना आधार के यह लंबा नहीं चलेगी।
निष्कर्ष: राजनीति और परंपरा का मिश्रण
तेज प्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज Bihar की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ है। यह न केवल मकर संक्रांति की सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि राजनीतिक अटकलों को भी हवा देता है। क्या यह नई शुरुआत है या सिर्फ एक इवेंट? 14 जनवरी को होने वाला यह भोज इसका जवाब देगा। बिहार की राजनीति में ऐसे अवसर अक्सर बड़े बदलाव लाते हैं, और तेज प्रताप की यह पहल उसी दिशा में एक कदम लगती है।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया